देहरादून/ऋषिकेश: उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 का आगाज होने में अब कुछ ही समय शेष है। हिमालय की गोद में स्थित बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन के लिए देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की नजरें कपाट खुलने की तिथियों पर टिकी हैं। उत्तराखंड सरकार और पर्यटन विभाग इस वर्ष की यात्रा को अब तक की सबसे सुगम और सुरक्षित यात्रा बनाने के लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक में स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
कब खुलेंगे चारधामों के कपाट?
हिंदू पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार, चारधाम यात्रा की शुरुआत हर साल अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर होती है।
- गंगोत्री और यमुनोत्री धाम: इन दोनों धामों के कपाट अक्षय तृतीया के दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
- केदारनाथ धाम: बाबा केदार के कपाट खुलने की तिथि महाशिवरात्रि के दिन उखीमठ के ओंकारेश्वर मंदिर में तय की जाती है।
- बदरीनाथ धाम: बदरी विशाल के कपाट खुलने का समय बसंत पंचमी के दिन टिहरी राजदरबार में घोषित किया जाता है।
प्रशासन का अनुमान है कि इस बार यात्रा मई के प्रथम सप्ताह से पूरी गति पकड़ लेगी।
पंजीकरण (Registration) की नई और सख्त प्रक्रिया
भीड़ को नियंत्रित करने और प्रत्येक श्रद्धालु का रिकॉर्ड रखने के लिए सरकार ने पंजीकरण प्रक्रिया में कुछ बड़े बदलाव किए हैं: - ऑनलाइन और ऑफलाइन स्लॉट: यात्रियों को उत्तराखंड पर्यटन विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। इस बार ‘डेली लिमिट’ (प्रतिदिन यात्रियों की संख्या) को और अधिक व्यवस्थित किया गया है।
- बायोमेट्रिक अनिवार्य: यात्रा मार्ग के मुख्य पड़ावों जैसे ऋषिकेश और हरिद्वार में बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन काउंटर स्थापित किए गए हैं। बिना वैध रजिस्ट्रेशन के किसी भी यात्री को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
- QR कोड आधारित एंट्री: प्रत्येक पंजीकृत यात्री को एक विशेष QR कोड जारी किया जाएगा, जिसे सोनप्रयाग, गोविंदघाट और अन्य चेक पॉइंट्स पर स्कैन किया जाएगा।
स्वास्थ्य और सुरक्षा: नई गाइडलाइन्स
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ऑक्सीजन की कमी और ठंड के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त एडवाइजरी जारी की है: - हेल्थ स्क्रीनिंग: 60 वर्ष से अधिक आयु के यात्रियों और पहले से किसी बीमारी (जैसे हृदय रोग या अस्थमा) से ग्रस्त लोगों के लिए मुख्य पड़ावों पर अनिवार्य हेल्थ चेकअप कैंप लगाए गए हैं।
- एयर एम्बुलेंस की सुविधा: केदारनाथ और बदरीनाथ मार्ग पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एयर एम्बुलेंस को ‘स्टैंडबाय’ पर रखा गया है।
- मौसम का अपडेट: यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने मोबाइल पर मौसम विभाग के अलर्ट्स को ध्यान से देखें और भारी बारिश या बर्फबारी की स्थिति में यात्रा रोक दें।
सड़क और बुनियादी ढांचा (Infrastructure)
‘ऑल वेदर रोड’ प्रोजेक्ट के पूरा होने से चारधाम यात्रा पहले की तुलना में काफी सुगम हुई है। हालांकि, संवेदनशील भूस्खलन वाले क्षेत्रों (Landslide Zones) में इस बार विशेष ‘क्विक रिस्पांस टीमें’ (QRT) तैनात की गई हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना के चलते कुछ क्षेत्रों में ट्रैफिक डायवर्जन हो सकता है, जिसकी जानकारी यात्रियों को पोर्टल पर दी जाएगी।
हेली सेवा और आवास की बुकिंग
केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग केवल आधिकारिक IRCTC की वेबसाइट के माध्यम से ही की जा सकेगी। सरकार ने चेतावनी दी है कि श्रद्धालु फर्जी वेबसाइटों और एजेंटों के झांसे में न आएं। वहीं, ‘गढ़वाल मंडल विकास निगम’ (GMVN) के गेस्ट हाउसों की प्री-बुकिंग भी शुरू हो चुकी है।
श्रद्धालुओं के लिए 5 विशेष सुझाव: - गर्म कपड़े साथ रखें: मई-जून में भी धामों का तापमान काफी कम रहता है, इसलिए पर्याप्त ऊनी कपड़े साथ ले जाएं।
- रजिस्ट्रेशन कार्ड की कॉपी: अपने मोबाइल में रजिस्ट्रेशन की पीडीएफ (PDF) रखने के साथ-साथ एक प्रिंटआउट भी जेब में रखें।
- स्थानीय गाइड: यदि आप पहली बार जा रहे हैं, तो अधिकृत गाइड की मदद लें।
- पर्यावरण का ध्यान: देवभूमि की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्लास्टिक और गंदगी न फैलाएं।
- ड्राइविंग: पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग करते समय विशेष सावधानी बरतें और रात में यात्रा करने से बचें।







