प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने 12वें संबोधन में देशवासियों को इस साल दीवाली पर दोहरा तोहफा देने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जीएसटी व्यवस्था में बड़ा सुधार किया जाएगा, जिससे रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं पर टैक्स कम हो जाएगा और आम जनता को राहत मिलेगी।
वित्त मंत्रालय ने जीएसटी काउंसिल को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें टैक्स दरों को घटाने, संरचना को सरल बनाने और नियमों को सुव्यवस्थित करने की सिफारिश की गई है। पीएम मोदी ने इसे ‘नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी’ करार देते हुए कहा कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से देश की अर्थव्यवस्था में बड़े बदलाव आए हैं और अब इसे और बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
सिर्फ दो टैक्स स्लैब का प्रस्ताव
सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा 0%, 5%, 12%, 18% और 28% के बजाय केवल दो स्लैब रखने पर विचार हो रहा है—एक स्टैंडर्ड दर और एक रियायती दर। जरूरी और महत्वाकांक्षी वस्तुओं पर टैक्स में कटौती की योजना है, जिससे उपभोग बढ़ेगा और कई रोजमर्रा की चीजें सस्ती होंगी।
संरचनात्मक सुधार और विवादों में कमी
प्रस्ताव में इनपुट और आउटपुट टैक्स रेट में अंतर खत्म करने की बात शामिल है, जिससे टैक्स क्रेडिट से जुड़ी जटिलताएं कम होंगी और घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही वस्तुओं के वर्गीकरण से जुड़े विवाद और नियम संबंधी समस्याएं घटाने का लक्ष्य है।
छोटे कारोबारियों और डिजिटल सिस्टम को फायदा
नए बदलावों में छोटे व्यवसायों के लिए प्रक्रियाओं को आसान बनाने पर जोर है। तकनीकी सुधार के जरिए जीएसटी रिटर्न पहले से भरे हुए फॉर्म के रूप में उपलब्ध कराना, मानवीय हस्तक्षेप कम करना और रिफंड की प्रक्रिया को तेज करना भी प्रस्ताव का हिस्सा है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह राज्यों के साथ मिलकर इन सुधारों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है।









