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एशिया की सबसे कठिन पैदल यात्रा नंदा देवी राजजात 2026 टली, 23 जनवरी को होगा अंतिम निर्णय

On: January 18, 2026 1:17 PM
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उत्तराखंड की सबसे लंबी, कठिन और ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा नंदा देवी राजजात को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। एशिया की सबसे कठिन पैदल यात्राओं में शुमार इस हिमालयी महाकुंभ का आयोजन वर्ष 2026 में नहीं होगा। नंदा देवी राजजात यात्रा समिति ने इसे स्थगित करने की घोषणा करते हुए संकेत दिया है कि अब यह यात्रा वर्ष 2027 में आयोजित की जा सकती है।
नंदा देवी राजजात 2026 नहीं, अब 2027 में होगी यात्रा
राजजात समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर और महासचिव भुवन नौटियाल ने कर्णप्रयाग में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2026 में प्रस्तावित यात्रा को स्थगित करने का निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया है। समिति के अनुसार, हिमालयी क्षेत्रों में आवश्यक तैयारियां समय पर पूरी नहीं हो सकीं, जिससे यात्रा की सुरक्षा और व्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती थीं।
23 जनवरी को मनौती के दिन होगी औपचारिक घोषणा
समिति ने बताया कि आगामी 23 जनवरी को नौटी गांव में मनौती का कार्यक्रम विधिवत रूप से संपन्न किया जाएगा। इसी दिन वर्ष 2027 में नंदा देवी राजजात यात्रा आयोजित करने की औपचारिक घोषणा की जाएगी। यह निर्णय पंचांग और शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए लिया जाएगा।
मौसम और अधूरी तैयारियां बनीं स्थगन का कारण
राजजात समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर ने बताया कि पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में यात्रा 19 और 20 सितंबर को उच्च हिमालयी क्षेत्रों में प्रवेश करती, जहां उस समय भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम की आशंका रहती है।
इसके अलावा कई निर्जन पड़ावों पर आवश्यक आधारभूत सुविधाएं और व्यवस्थागत कार्य अभी अधूरे हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौतियां सामने आ सकती थीं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए यात्रा को एक वर्ष आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
पहली बार शुभ मुहूर्त में लिया गया विधिवत संकल्प
नंदा देवी राजजात समिति के महासचिव भुवन नौटियाल ने बताया कि यह पहली बार है जब यात्रा को लेकर शुभ मुहूर्त के अनुसार विधिवत संकल्प लिया गया है।
उन्होंने कहा कि नंदा देवी राजजात यात्रा हमेशा ठीक 12 वर्षों के अंतराल पर नहीं हो पाई है और विषम परिस्थितियों में यात्रा का आयोजन जोखिम भरा साबित हो सकता है। इसी कारण वर्ष 2027 को अधिक उपयुक्त माना गया है। यात्रा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव शासन को भी भेजे जाएंगे।
280 किलोमीटर लंबी हिमालय की सबसे कठिन यात्रा
गौरतलब है कि नंदा देवी राजजात यात्रा लगभग 280 किलोमीटर लंबी पैदल धार्मिक यात्रा है, जो हर 12 वर्षों में आयोजित की जाती है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान मानी जाती है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण इसे हिमालय की सबसे चुनौतीपूर्ण यात्राओं में शामिल किया जाता है।
चार सींग वाला खाडू करता है यात्रा का नेतृत्व
नंदा राजजात की सबसे अनोखी परंपरा है चौसिंगा खाडू, यानी चार सींग वाला भेड़ा। मान्यता है कि खाडू के जन्म के साथ ही राजजात का समय तय हो जाता है। इसे मां नंदा का प्रतिनिधि माना जाता है और यही यात्रा का अग्रदूत होता है।
यह ऐतिहासिक यात्रा चमोली जिले के नौटी गांव से प्रारंभ होकर होमकुंड तक पहुंचती है।
जिला प्रशासन ने भी जताई सहमति
चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि अभी औपचारिक रूप से प्रशासन को समिति की ओर से लिखित सूचना नहीं मिली है, लेकिन प्रशासन का दायित्व यात्रा को सुरक्षित और सुचारू रूप से संपन्न कराना है।
उन्होंने बताया कि हालिया आपदा परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन ने भी समिति को यात्रा की तिथि पर पुनर्विचार करने के लिए पत्र लिखा था।
23 जनवरी को लगेगी अंतिम मुहर
फिलहाल राजजात समिति के स्तर पर यात्रा को 2026 के बजाय 2027 में आयोजित करने पर सहमति बन चुकी है। अंतिम निर्णय की औपचारिक घोषणा 23 जनवरी को मनौती कार्यक्रम के साथ की जाएगी।

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