उत्तराखंड में फिर खुली कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी, पर्यटकों की आवाजाही शुरू, कालाढूंगी में बढ़ेगी इको-टूरिज्म की रफ्तार – Doonprimenews

उत्तराखंड में फिर खुली कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी, पर्यटकों की आवाजाही शुरू, कालाढूंगी में बढ़ेगी इको-टूरिज्म की रफ्तार

Corbett Heritage Jungle Safari Reopens 2026: उत्तराखंड के नैनीताल जिले से पर्यटन के लिहाज से अच्छी खबर सामने आई है। मानसून के दौरान बंद की गई कालाढूंगी की कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी को पर्यटकों के लिए दोबारा खोल दिया गया है। सफारी शुरू होने के साथ ही यहां पर्यटकों की आवाजाही लौटने लगी है। इस पहल से न सिर्फ जंगल और वन्यजीवों को करीब से जानने का मौका मिलेगा, बल्कि जिम कॉर्बेट की ऐतिहासिक विरासत और कुमाऊंनी संस्कृति को समझने का अवसर भी मिलेगा। स्थानीय पर्यटन कारोबारियों और ग्रामीणों को भी इससे रोजगार तथा आमदनी बढ़ने की उम्मीद है।

मानसून में क्यों बंद की गई थी जंगल सफारी?

रामनगर वन प्रभाग के अंतर्गत आने वाले कालाढूंगी क्षेत्र में स्थित कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी को बारिश के मौसम में पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बंद किया गया था। मानसून के दौरान नदी-नालों में पानी का स्तर बढ़ने और जंगल के रास्तों पर जोखिम की आशंका के कारण 30 जून को यहां सफारी गतिविधियां रोक दी गई थीं।

अब मानसून के बाद परिस्थितियों का आकलन करते हुए सफारी का संचालन फिर शुरू किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दोबारा खुलने के पहले दिन शाम की पाली में पर्यटक जंगल की सैर करते नजर आए। इससे संकेत मिलता है कि कालाढूंगी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां फिर गति पकड़ सकती हैं। 

Corbett Heritage Jungle Safari Reopens 2026 की खबर उन पर्यटकों के लिए खास है, जो कॉर्बेट क्षेत्र में प्रकृति, स्थानीय इतिहास और सांस्कृतिक अनुभवों को एक साथ देखना चाहते हैं।

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सिर्फ जंगल सफारी नहीं, जिम कॉर्बेट की विरासत से भी परिचय

कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी की खासियत यह है कि यहां पर्यटकों को केवल जंगल में घूमने का अनुभव नहीं मिलता। इस पहल के जरिए जिम कॉर्बेट के जीवन, प्रकृति के प्रति उनके जुड़ाव और क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत के बारे में भी जानकारी दी जाती है।

नेचर गाइड पर्यटकों को जंगल की जैव विविधता, वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से परिचित कराते हैं। इस तरह सफारी को मनोरंजन के साथ सीखने का माध्यम बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

उत्तराखंड में वन्यजीव पर्यटन की पहचान लंबे समय से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और उसके आसपास के जंगलों से जुड़ी रही है। ऐसे में कालाढूंगी का यह सफारी जोन पर्यटकों को कॉर्बेट क्षेत्र के एक अलग पहलू से परिचित कराने में मदद कर सकता है।

कालाढूंगी और कोटाबाग में पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी को दोबारा खोले जाने से कालाढूंगी और कोटाबाग के आसपास पर्यटन गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय होमस्टे, खानपान से जुड़े व्यवसायों, गाइडों और छोटे दुकानदारों को फायदा मिल सकता है।

यहां पर्यटन को स्थानीय जीवन और संस्कृति से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। पर्यटक स्थानीय लोगों के बनाए स्मृति चिह्न और उत्पाद खरीद सकते हैं, कुमाऊंनी खानपान का अनुभव ले सकते हैं और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं को करीब से जान सकते हैं।

इसके साथ ही बच्चों के लिए प्रकृति शिक्षा जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। इससे नई पीढ़ी को जंगल, वन्यजीवों और पर्यावरण संरक्षण के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिल सकती है। 

इको-टूरिज्म से स्थानीय लोगों को रोजगार

कॉर्बेट हेरिटेज जंगल सफारी की शुरुआत लगभग दो साल पहले हुई थी। कम समय में यह क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में उभरी है। इसका उद्देश्य पर्यटन से होने वाली आमदनी को स्थानीय समुदायों तक पहुंचाना और साथ ही वन एवं वन्यजीव संरक्षण के महत्व को बनाए रखना है।

वरिष्ठ नेचर गाइड मोहन पांडे के मुताबिक, कालाढूंगी और कोटाबाग क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना उनका सपना रहा है। इस काम में वन विभाग का सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। उनका कहना है कि पर्यटकों के आने से गाइड, वाहन संचालकों, होमस्टे संचालकों, स्थानीय उत्पाद बनाने वाले लोगों और दूसरे सेवा प्रदाताओं को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है।

उनके अनुसार, एक पर्यटक के आने से करीब दस लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलने की संभावना बनती है। हालांकि, यह अनुमान है; वास्तविक रोजगार का स्तर पर्यटकों की संख्या और स्थानीय सेवाओं पर निर्भर करेगा। 

वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन का संतुलन जरूरी

कॉर्बेट और नैनीताल क्षेत्र में पर्यटन स्थानीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ जंगलों, वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। पर्यटन गतिविधियों का संचालन नियमों के अनुरूप होना चाहिए, ताकि शोर, कचरे और अनावश्यक मानवीय हस्तक्षेप से प्राकृतिक आवास प्रभावित न हों।

इको-टूरिज्म का मूल उद्देश्य यही है कि लोग प्रकृति का अनुभव करें, स्थानीय समुदायों को रोजगार मिले और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान न पहुंचे। इसलिए पर्यटकों को भी जंगल में निर्धारित नियमों का पालन करना चाहिए, वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और कचरा फैलाने से बचना चाहिए।

पर्यटकों के लिए क्या है खास?

Corbett Heritage Jungle Safari Reopens 2026 के बाद पर्यटक कालाढूंगी क्षेत्र में जंगल की प्राकृतिक सुंदरता, जिम कॉर्बेट से जुड़ी विरासत और कुमाऊंनी संस्कृति का अनुभव कर सकते हैं। सफारी में जाने से पहले पर्यटकों को संचालन के समय, बुकिंग, प्रवेश नियमों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी संबंधित वन विभाग या अधिकृत संचालक से लेनी चाहिए।

कुल मिलाकर, मानसून के बाद सफारी का दोबारा शुरू होना कालाढूंगी और कोटाबाग में पर्यटन कारोबार के लिए सकारात्मक कदम है। यदि इको-टूरिज्म को स्थानीय लोगों की भागीदारी और वन्यजीव संरक्षण के साथ आगे बढ़ाया जाता है, तो यह पहल क्षेत्र की आजीविका और प्राकृतिक विरासत दोनों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

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