Uttarkashi News: 1 Fire Incident in Mori Arakot Claims Life
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​Uttarkashi Fire Incident: मोरी के आराकोट में देर रात स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आग, सेवानिवृत्त एएनएम की दर्दनाक मौत

On: September 29, 2026 6:53 AM
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​Uttarkashi Fire Incident ने पूरे उत्तरकाशी जनपद के मोरी प्रखंड को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार देर रात आराकोट स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पुराने भवन में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर चुकी इस अग्निकांड की घटना में भवन पूरी तरह से जलकर खाक हो गया। इस दुर्भाग्यपूर्ण हादसे के दौरान इमारत में रह रहीं सेवानिवृत्त एएनएम पार्वती जैन की मौके पर ही जलकर दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे आराकोट और बंगाण क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।

​Uttarkashi Fire Incident: आराकोट में आधी रात को मची अफरा-तफरी

​यह दर्दनाक हादसा मोरी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आराकोट क्षेत्र में मंगलवार आधी रात के आसपास घटित हुआ। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, स्वास्थ्य केंद्र परिसर में स्थित पुराने लकड़ी और कंक्रीट से बने भवन से अचानक ऊंची लपटें उठने लगीं। पहाड़ी इलाका होने और सूखी लकड़ी के उपयोग के कारण आग ने चंद मिनटों में ही पूरी दो मंजिला पुरानी इमारत को घेर लिया।

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​रात के अंधेरे में आग की लपटें देखकर आसपास के ग्रामीण तुरंत घटनास्थल की ओर दौड़े और अपने स्तर पर पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। हालांकि, आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयास नाकाफी साबित हुए और देखते ही देखते पूरे इलाके में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

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​3 फायर ब्रिगेड टीमों ने पाया काबू: Uttarkashi Fire Incident

​घटना की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस और अग्निशमन विभाग को दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की और मोरी, त्यूणी तथा सीमावर्ती राज्य हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू से अग्निशमन वाहनों को मौके पर रवाना किया।

​तीन अलग-अलग स्टेशनों से पहुंची अग्निशमन टीमों और पुलिस कर्मियों ने ग्रामीणों की मदद से राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दुर्गम भौगोलिक स्थिति और रात का समय होने के कारण दमकलकर्मियों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लगभग 3 से 4 घंटे की अथक मशक्कत के बाद दमकल टीम ने लपटों पर काबू पाया, लेकिन तब तक पुराना स्वास्थ्य भवन पूरी तरह जलकर राख के ढेर में तब्दील हो चुका था।

​Uttarkashi Fire Incident में वर्षो से रह रहीं सेवानिवृत्त ANM की मौत

​इस भीषण Uttarkashi Fire Incident में जान गंवाने वाली 75 वर्षीया पार्वती जैन स्वास्थ्य विभाग की एक समर्पित पूर्व कर्मचारी थीं। वह वर्षों पूर्व आराकोट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) के पद से सेवानिवृत्त हुई थीं।

​सेवानिवृत्ति के बाद से ही वह इस पुराने सरकारी आवास में अकेली रह रही थीं। क्षेत्र के लोगों के बीच उनकी पहचान एक समाजसेवी और मिलनसार महिला के रूप में थी, जिन्होंने वर्षों तक दुर्गम ग्रामीण इलाकों में अपनी सेवाएं दी थीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि उनका मूल निवास देहरादून के आराघर क्षेत्र में था। उनके पास समय-समय पर देहरादून से उनकी एक मुंहबोली बेटी मिलने आया करती थी। उनकी दुखद मृत्यु से स्थानीय ग्रामीण स्तब्ध और मर्माहत हैं।

​चूल्हे या अंगीठी से आग भड़कने की आशंका: Uttarkashi Fire Incident Investigation

​घटना की जानकारी मिलते ही मोरी थानाध्यक्ष दीपक रावत अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक पड़ताल के अनुसार, हादसे की वजह कमरा गर्म रखने या खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला चूल्हा हो सकता है।

​थानाध्यक्ष दीपक रावत ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि मृतका जिस कमरे में रहती थीं, वहां खाना पकाने और ठंड से बचने के लिए पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे का उपयोग किया जाता था। आशंका व्यक्त की जा रही है कि देर रात चूल्हे की कोई चिंगारी आसपास की ज्वलनशील वस्तुओं या सूखी लकड़ी के संपर्क में आ गई होगी, जिससे आग भड़क गई और सो रही वृद्धा को बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।

​पुलिस प्रशासन द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई जारी

​घटना के बाद पुलिस ने मृतका के शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थानाध्यक्ष ने जानकारी दी कि देहरादून में रह रहे महिला के भतीजे और रिश्तेदारों को हादसे की सूचना दे दी गई है, जो खबर मिलते ही आराकोट के लिए रवाना हो चुके हैं।

​प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि घटना के सभी पहलुओं की बारीक जांच की जा रही है। फॉरेंसिक टीम और अग्निशमन विशेषज्ञ भी हादसे के सही कारणों का तकनीकी विश्लेषण कर रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट थी या फिर चूल्हे की चिंगारी।

​Uttarakhand के पर्वतीय क्षेत्रों में आग सुरक्षा पर उठे सवाल

​इस हादसे ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी और सीमांत क्षेत्रों में पुरानी इमारतों की सुरक्षा और अग्निशमन व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहाड़ी इलाकों में अक्सर स्वास्थ्य केंद्र, डाकघर और आवासीय भवन लकड़ी के बने होते हैं, जो आग के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाते हैं।

​स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में अग्निशमन केंद्रों की दूरी अधिक होने के कारण दमकल गाड़ियों को पहुंचने में समय लगता है। यदि स्थानीय स्तर पर त्वरित अग्निशमन किट और सुरक्षा उपकरण मौजूद हों, तो ऐसे जानलेवा हादसों को टालने में मदद मिल सकती है। फिलहाल पूरे आराकोट गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई अपनी पूर्व स्वास्थ्य कर्मी के इस तरह असमय चले जाने पर दुखी है। 

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