Aftab Ansari Kolkata Jail मामले ने पश्चिम बंगाल के सुरक्षा तंत्र और जेल प्रशासन में हड़कंप मचा दिया है। कोलकाता के अलीपुर स्थित अति-सुरक्षित प्रेसिडेंसी सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कुख्यात आतंकी आफताब अहमद अंसारी की सेल से तीन प्रीमियम आईफोन, दो हाई-स्पीड वाई-फाई राउटर, पेन ड्राइव और 31 हजार रुपये की नकदी बरामद की गई है। 2002 के अमेरिकन सेंटर हमले के मुख्य सूत्रधार के पास जेल की चारदीवारी के भीतर से ऐसे अत्याधुनिक गैजेट्स का मिलना सीधे तौर पर जेल सुरक्षा और निगरानी तंत्र की गंभीर विफलता को उजागर करता है।
Aftab Ansari Kolkata Jail: सेल नंबर 14 में आधी रात की छापेमारी
खुफिया एजेंसियों से मिले सटीक इनपुट के आधार पर जेल विभाग और सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम ने प्रेसिडेंसी जेल के सेल नंबर 14 में औचक तलाशी अभियान चलाया। यह वही सेल है जहां आतंकी आफताब अंसारी को कड़े सुरक्षा घेरे में रखा गया है।
तलाशी के दौरान सुरक्षाकर्मियों को पहले तो कोई संदिग्ध वस्तु नजर नहीं आई, लेकिन जब बिस्तरों, गद्दों और कपड़ों की तहों की बारीकी से जांच की गई, तो वहां छिपाकर रखे गए हाई-टेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण देखकर अधिकारी दंग रह गए।
जेल प्रशासन ने मौके से निम्नलिखित वस्तुएं जब्त की हैं:
- तीन आईफोन (Apple iPhones)
- दो पोर्टेबल वाई-फाई राउटर
- दो कार्ड रीडर और हाई-कैपेसिटी पेन ड्राइव
- इयरफोन और चार्जिंग केबल
- 500 रुपये के नोटों में कुल ₹31,000 की नकदी
इस चौंकाने वाली बरामदगी के तुरंत बाद कोलकाता के हेस्टिंग्स थाने में अज्ञात जेल कर्मियों और आफताब अंसारी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियों एवं जेल नियमों के उल्लंघन की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई।
सुरक्षा में सेंध: Aftab Ansari Kolkata Jail में कैसे पहुंचे ये उपकरण?
प्रेसिडेंसी सेंट्रल जेल को राज्य की सबसे सुरक्षित जेलों में गिना जाता है, जहां त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा, मेटल डिटेक्टर, बॉडी स्कैनर और 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों का पहरा रहता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि तीन आईफोन, राउटर और नकदी जैसी चीजें सुरक्षा जांच को चकमा देकर सेल नंबर 14 तक कैसे पहुंचीं।
प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि बिना जेल के अंदरूनी कर्मचारियों और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के इतना बड़ा नेटवर्क चलाना संभव नहीं था। खुफिया एजेंसियां अब उन सभी जेल वार्डरों, संतरी और कर्मचारियों की ड्यूटी रोस्टर की जांच कर रही हैं जो पिछले छह महीनों के दौरान आफताब की सेल के आसपास तैनात थे। सूत्रों का कहना है कि पैसे के लालच या दबाव में आकर कुछ कर्मचारियों ने कुरियर के रूप में काम किया हो सकता है।
Aftab Ansari Kolkata Jail मामले में सीमा पार नेटवर्क की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार, बरामद आईफोन में एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स जैसे व्हाट्सएप, सिग्नल और टेलीग्राम के सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स अब इन सभी फोन्स की कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR), आईपी लॉग्स और चैट बैकअप का तकनीकी विश्लेषण कर रहे हैं।
विशेषज्ञ मुख्य रूप से तीन पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं:
- सीमा पार संपर्क: क्या आफताब अंसारी पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद या अपने पुराने हैंडलर्स के संपर्क में था?
- जेल से आपराधिक नेटवर्क का संचालन: क्या वह हवाला ऑपरेटरों, फिरौती सिंडिकेट या अंडरवर्ल्ड सहयोगियों को निर्देश दे रहा था?
- वाई-फाई कनेक्शन का स्रोत: जेल परिसर के भीतर राउटर के लिए सिम कार्ड और ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी किस नाम पर और कैसे एक्टिवेट कराई गई थी?
आतंकी आफताब अंसारी का आपराधिक इतिहास
आफताब अहमद अंसारी भारत के सबसे कुख्यात आतंकियों में से एक है। 22 जनवरी 2002 को कोलकाता स्थित अमेरिकन सेंटर (USIS) पर हुए भीषण आतंकी हमले का मास्टरमाइंड वही था, जिसमें पांच पुलिसकर्मी शहीद हुए थे और 20 से अधिक लोग घायल हुए थे।
हमले के बाद वह दुबई भाग गया था, जहां से 2002 में ही उसे प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था। इसके अलावा वह 2001 में कोलकाता के मशहूर जूता व्यापारी पार्थ रॉय बर्मन के अपहरण और फिरौती कांड का भी मुख्य आरोपी रहा है। ट्रायल कोर्ट ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया था। तब से वह कोलकाता की प्रेसिडेंसी जेल में बंद है।
सुधारात्मक कदम और उच्च स्तरीय जांच के आदेश
इस घटना के सामने आने के बाद राज्य गृह विभाग ने प्रेसिडेंसी जेल के सुरक्षा प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है। जेल महानिदेशक ने घटना की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं और केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL) को जब्त किए गए सभी डिजिटल साक्ष्यों की क्लोनिंग और डेटा एक्सट्रैक्शन का जिम्मा सौंपा गया है।
आफताब अंसारी को तुरंत प्रभाव से एक अधिक नियंत्रित और आइसोलेटेड उच्च-सुरक्षा वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां चौबीसों घंटे सशस्त्र पहरा और अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। मामले में संलिप्त पाए जाने वाले किसी भी जेल कर्मी के खिलाफ निलंबन और आपराधिक धाराओं में सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
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