Uttarakhand Tunnel Collapse: मौतों का आंकड़ा बढ़ा, दो मजदूर अब भी लापता, तलाश अभियान जारी – Doonprimenews

Uttarakhand Tunnel Collapse: मौतों का आंकड़ा बढ़ा, दो मजदूर अब भी लापता, तलाश अभियान जारी

Uttarakhand Tunnel Collapse: उत्तराखंड के चमोली जिले के पिपलकोटी क्षेत्र में निर्माणाधीन सुरंग में हुए भीषण हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी इलाकों में बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विष्णुगाड-पिपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में पानी और मलबा घुसने से कई श्रमिक अंदर फंस गए थे। हादसे के बाद शुरू किए गए बड़े राहत एवं बचाव अभियान के बीच मृतकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई है, जबकि दो श्रमिकों की तलाश अभी भी जारी बताई जा रही है।

Uttarakhand Tunnel Collapse के बाद जारी है सर्च ऑपरेशन

Uttarakhand Tunnel Collapse के बाद सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए कई एजेंसियों को अभियान में लगाया गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP), पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं।

हादसे के बाद सुरंग के भीतर पानी, कीचड़ और मलबे की स्थिति ने बचाव अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया। सुरंग की अस्थिर परिस्थितियों को देखते हुए बचाव दलों को सावधानी के साथ आगे बढ़ना पड़ रहा है। अधिकारियों की निगरानी में मलबा हटाने और लापता श्रमिकों तक पहुंचने की कोशिश लगातार जारी है।

अचानक सुरंग में घुसा पानी और मलबा

यह हादसा 14 अगस्त की रात चमोली जिले के पिपलकोटी क्षेत्र में हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, पहाड़ी हिस्से में भूस्खलन के बाद सुरंग के भीतर अचानक पानी और मलबे का तेज प्रवाह पहुंच गया। उस समय सुरंग में श्रमिक काम कर रहे थे।

अचानक आई इस स्थिति के कारण कर्मचारियों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिला। कुछ श्रमिक बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि कई लोग अंदर फंस गए। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू किया।

कितने श्रमिक सुरंग में मौजूद थे?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हादसे के समय सुरंग के भीतर कुल 22 श्रमिक मौजूद थे। इनमें से कई श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि कुछ लोगों की मौत हो गई और अन्य के फंसे होने की जानकारी सामने आई।

बचाव अभियान के दौरान लगातार श्रमिकों की स्थिति का पता लगाने का प्रयास किया गया। जैसे-जैसे मलबा हटाया गया, मृतकों के शव बरामद होते गए। नवीनतम रिपोर्टों में मृतकों की संख्या आठ बताई गई है और दो श्रमिकों की तलाश जारी होने की बात सामने आई है।

मुख्यमंत्री धामी ने दिए तत्काल निर्देश

हादसे की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए। राज्य सरकार की ओर से घटनास्थल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सुरंग में फंसे श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए उपलब्ध सभी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाए। साथ ही घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने और प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता देने पर भी जोर दिया गया है।

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कई एजेंसियां संयुक्त रूप से कर रहीं काम

Uttarakhand Tunnel Collapse के बाद बचाव अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया गया है। NDRF और SDRF की टीमें मलबा हटाने और सुरंग के भीतर सुरक्षित रास्ता बनाने का काम कर रही हैं। ITBP और पुलिस के जवान भी अभियान में सहयोग दे रहे हैं।

इस तरह के पहाड़ी सुरंग हादसों में केवल मलबा हटाना ही चुनौती नहीं होता। सुरंग की संरचनात्मक स्थिति, पानी का प्रवाह, चट्टानों के खिसकने का खतरा और अंदर मौजूद अन्य जोखिमों को भी लगातार ध्यान में रखना पड़ता है। इसी वजह से बचाव दलों को चरणबद्ध तरीके से अभियान आगे बढ़ाना पड़ रहा है।

घायलों को अस्पताल में कराया गया भर्ती

हादसे के बाद बाहर निकाले गए श्रमिकों में कई घायल थे। उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई और अस्पतालों में भर्ती कराया गया। अधिकारियों की ओर से घायलों के उपचार की निगरानी की जा रही है।

स्थानीय प्रशासन ने अस्पतालों को भी अलर्ट पर रखा ताकि बचाव अभियान के दौरान किसी भी घायल श्रमिक को तुरंत उपचार मिल सके। सुरंग के भीतर फंसे लोगों की तलाश के साथ-साथ बाहर निकाले गए श्रमिकों की मेडिकल जांच को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

सुरक्षा मानकों पर उठ रहे गंभीर सवाल

Uttarakhand Tunnel Collapse ने निर्माणाधीन सुरंगों में सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हादसे के बाद कुछ श्रमिकों की ओर से यह आरोप सामने आया कि सुरंग में पहले भी मलबा गिरने और पानी रिसने जैसी समस्याओं की जानकारी दी गई थी। उनका दावा है कि इन शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

यदि जांच में सुरक्षा संबंधी किसी लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग भी तेज हो सकती है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण कार्य के दौरान नियमित सुरक्षा ऑडिट और जोखिम का आकलन बेहद जरूरी माना जाता है।

हिमालयी क्षेत्र में सुरंग निर्माण बड़ी चुनौती

उत्तराखंड का भौगोलिक क्षेत्र भूकंपीय गतिविधियों, भूस्खलन और कमजोर चट्टानी संरचनाओं के कारण बेहद संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में सुरंग निर्माण के दौरान प्राकृतिक परिस्थितियां कभी भी चुनौती पैदा कर सकती हैं।

विशेषज्ञ लंबे समय से हिमालयी क्षेत्र में बड़े निर्माण और जलविद्युत प्रोजेक्ट्स के दौरान भूगर्भीय अध्ययन तथा सुरक्षा उपायों को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं। Uttarakhand Tunnel Collapse जैसी घटनाएं इस बहस को और महत्वपूर्ण बना देती हैं।

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2023 की सिलक्यारा घटना की याद फिर ताजा

पिपलकोटी हादसे ने नवंबर 2023 के सिलक्यारा-बड़कोट सुरंग हादसे की याद भी ताजा कर दी है। उस समय उत्तरकाशी में निर्माणाधीन सुरंग का एक हिस्सा ढहने के बाद 41 श्रमिक 17 दिनों तक अंदर फंसे रहे थे। लंबे और चुनौतीपूर्ण बचाव अभियान के बाद सभी श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

इसके अलावा जुलाई 2026 में सिलक्यारा सुरंग में कंक्रीट लाइनिंग का हिस्सा गिरने से एक श्रमिक की मौत हुई थी। उस घटना के बाद भी निर्माण कार्यों में सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठे थे।

लापता श्रमिकों की तलाश बनी प्राथमिकता

फिलहाल प्रशासन और बचाव एजेंसियों का सबसे बड़ा लक्ष्य सुरंग में लापता दो श्रमिकों का पता लगाना है। मलबे और पानी के बीच खोज अभियान को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है। बचाव दल किसी भी संभावित सुराग के आधार पर अभियान को दिशा दे रहे हैं।

परिजनों की निगाहें भी लगातार घटनास्थल और प्रशासन की ओर लगी हुई हैं। उनके लिए हर गुजरता घंटा चिंता और उम्मीद के बीच बीत रहा है। प्रशासन की कोशिश है कि अभियान को जल्द से जल्द पूरा कर लापता श्रमिकों की स्थिति स्पष्ट की जाए।

हादसे के बाद जांच भी जरूरी

बचाव अभियान पूरा होने के बाद हादसे के कारणों की विस्तृत जांच बेहद महत्वपूर्ण होगी। यह पता लगाना जरूरी होगा कि सुरंग में पानी और मलबा अचानक किस वजह से पहुंचा, क्या पहले से किसी खतरे के संकेत मौजूद थे और निर्माण स्थल पर निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।

Uttarakhand Tunnel Collapse से जुड़े सवालों के जवाब केवल मृतकों और लापता श्रमिकों की संख्या तक सीमित नहीं हैं। इस हादसे से भविष्य की सुरंग परियोजनाओं के लिए सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की सीख भी मिलनी चाहिए। हिमालयी क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के साथ श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना ही ऐसे हादसों से बचने की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा।

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