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Uttarakhand SIR पर कांग्रेस का महाअभियान: विधानसभा स्तर पर समन्वयक नियुक्त, हरिद्वार-देहरादून और ऊधमसिंह नगर पर खास नजर

On: August 17, 2026 7:02 PM
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Uttarakhand SIR: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी तैयारियों के बीच कांग्रेस ने भी Uttarakhand SIR को लेकर अपना संगठनात्मक अभियान तेज करने का फैसला किया है। पार्टी ने विधानसभा स्तर पर समन्वयकों की नियुक्ति कर कार्यकर्ताओं को मतदाता सूची की निगरानी और जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने की जिम्मेदारी दी है।

कांग्रेस का फोकस खास तौर पर हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे अधिक मतदाताओं वाले जिलों पर है। पार्टी का प्रयास है कि Uttarakhand SIR की प्रक्रिया के दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर न हो और मतदाता सूची में सामने आने वाली गड़बड़ियों की जानकारी समय रहते संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाए।

Uttarakhand SIR: विधानसभा स्तर पर कांग्रेस ने कसी कमर

कांग्रेस ने Uttarakhand SIR को केवल चुनाव आयोग की प्रशासनिक प्रक्रिया न मानते हुए इसे संगठन के लिए भी महत्वपूर्ण अभियान के तौर पर लिया है। विधानसभा स्तर पर नियुक्त किए गए समन्वयक स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क में रहेंगे और मतदाता सूची से जुड़े मामलों की निगरानी करेंगे।

इन समन्वयकों की जिम्मेदारी में बूथ स्तर तक संगठन के साथ तालमेल, मतदाताओं को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना और ऐसे लोगों की पहचान करना शामिल होगा, जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में नहीं हैं या जिनके विवरण में किसी प्रकार की त्रुटि है। कांग्रेस इस पूरी कवायद के जरिए अपने बूथ संगठन को भी सक्रिय करने की तैयारी में है।

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हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर पर खास नजर

Uttarakhand SIR के आंकड़ों में हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर तीन ऐसे जिले हैं जहां मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है। 14 जुलाई को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में प्रदेश में 71,33,785 मतदाता शामिल किए गए थे। इनमें हरिद्वार में करीब 12.45 लाख, देहरादून में 11.90 लाख और ऊधमसिंह नगर में करीब 11.55 लाख मतदाता दर्ज हैं।

इसी वजह से कांग्रेस इन तीन जिलों को विशेष रूप से महत्वपूर्ण मान रही है। पार्टी की कोशिश है कि इन क्षेत्रों में बूथ स्तर पर कार्यकर्ता मतदाता सूची का बारीकी से परीक्षण करें। खासकर उन नामों पर नजर रखी जा रही है जिनके संबंध में अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या अन्य श्रेणियों के कारण सूची में बदलाव हुआ है।

ड्राफ्ट सूची के बाद बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

Uttarakhand SIR के पहले चरण के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो चुकी है। निर्वाचन आयोग के अनुसार इस प्रक्रिया में 8.26 लाख नाम ऐसे पाए गए जिन्हें अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित या दोहरे नाम जैसी श्रेणियों के कारण ड्राफ्ट सूची से हटाया गया। इसके अलावा करीब 19.04 लाख मतदाताओं के गणना प्रपत्रों में विसंगतियां सामने आई हैं, जिनके संबंध में नोटिस और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

यही वजह है कि राजनीतिक दल अब मतदाता सूची पर विशेष नजर रख रहे हैं। कांग्रेस का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नामों और विवरणों में बदलाव होने के कारण जमीनी स्तर पर निगरानी जरूरी है। पार्टी कार्यकर्ताओं को मतदाताओं के साथ संपर्क बढ़ाने और उन्हें प्रक्रिया की जानकारी देने के निर्देश दिए जा रहे हैं।

मतदाता सूची की चौकसी बनेगी अभियान का मुख्य आधार

कांग्रेस के Uttarakhand SIR अभियान का सबसे बड़ा फोकस मतदाता सूची की चौकसी पर रहने वाला है। पार्टी बूथ स्तर पर यह देखने की कोशिश करेगी कि किसी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम अनजाने में सूची से बाहर तो नहीं हुआ है।

इसके साथ ही ऐसे मतदाताओं की भी मदद की जाएगी जिन्हें अपने नाम, पते या अन्य विवरण में सुधार की आवश्यकता है। ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलने पर पात्र नागरिकों को निर्धारित चुनावी प्रक्रिया के तहत दावा प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। निर्वाचन विभाग ने भी मतदाताओं से अपनी जानकारी जांचने और जरूरत पड़ने पर संबंधित प्रक्रिया अपनाने की अपील की है।

Uttarakhand SIR: कांग्रेस कार्यकर्ताओं को बूथ तक पहुंचाने की तैयारी

पार्टी का विधानसभा स्तर पर समन्वयक नियुक्त करने का फैसला सीधे तौर पर बूथ नेटवर्क को सक्रिय करने की रणनीति से जुड़ा माना जा रहा है। समन्वयक विधानसभा क्षेत्र के अलग-अलग मंडलों और बूथों पर कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय करेंगे।

कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि कार्यकर्ताओं को केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें मतदाता सूची से संबंधित काम में भी सक्रिय किया जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर मतदाताओं से संवाद, सूची की जांच और आपत्तियों से जुड़े मामलों को चिन्हित करने पर जोर दिया जा सकता है।

चुनावी लिहाज से भी अहम है SIR

Uttarakhand SIR का महत्व केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है। उत्तराखंड में आने वाले चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों के लिए मतदाता सूची बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज है। ऐसे में हर पार्टी अपने संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने और मतदाताओं के साथ सीधा संपर्क बढ़ाने में जुटी है।

कांग्रेस का मौजूदा अभियान इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जैसे जिलों में बड़ी संख्या में मतदाता होने के कारण यहां छोटी-सी सूचीगत गलती भी राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है। यही कारण है कि पार्टी इन क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है।

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निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया भी जारी

दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से Uttarakhand SIR की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ रही है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर SIR-2026 से जुड़ी ड्राफ्ट रोल, अनुपस्थित-स्थानांतरित-मृत मतदाताओं की सूची और अन्य जानकारी उपलब्ध कराई गई है।

हरिद्वार जिला प्रशासन ने भी SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करने के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की हैं। जिले में BLO, सुपरवाइजर और BLA को प्रशिक्षण देने के साथ मतदाताओं को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया गया है।

15 सितंबर को अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 15 सितंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। इससे पहले मतदाताओं और राजनीतिक दलों के पास सूची की जांच और आवश्यक आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर रहेगा।

ऐसे में कांग्रेस का विधानसभा स्तर पर समन्वयक नियुक्त करना आने वाले दिनों में और महत्वपूर्ण हो सकता है। पार्टी अब बूथ स्तर तक अपनी निगरानी व्यवस्था मजबूत कर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि Uttarakhand SIR के दौरान किसी पात्र मतदाता का नाम छूटने न पाए। साथ ही पार्टी की नजर उन क्षेत्रों पर भी रहेगी जहां मतदाता संख्या अधिक है और सूची में बड़े स्तर पर बदलाव सामने आए हैं।

कुल मिलाकर, Uttarakhand SIR अब उत्तराखंड की सियासत में भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। कांग्रेस ने विधानसभा स्तर पर अपनी टीम सक्रिय कर दी है, जबकि चुनाव आयोग प्रशासनिक प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहा है। आने वाले सप्ताह इस लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि दावे-आपत्तियों के निस्तारण के साथ यह स्पष्ट होगा कि ड्राफ्ट सूची में हुए बदलावों में कितने नाम वापस जुड़ते हैं और अंतिम मतदाता सूची का स्वरूप क्या रहता है।

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