उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में हो रही मूसलाधार बारिश के चलते नदियों और नहरों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इस मानसूनी आफत के बीच अब Haridwar Crocodile Fear ने ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों की रातों की नींद उड़ा दी है। नदियां उफान पर आने के कारण मगरमच्छ अपने प्राकृतिक ठिकानों से बहकर आबादी वाले क्षेत्रों, खेतों और गंगनहर के किनारों तक पहुंच रहे हैं। रुड़की, कलियर और आसपास के दर्जनों गांवों में दहशत का माहौल है और लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
Haridwar Crocodile Fear के बीच गंगनहर और सोलानी नदी बनीं खतरा
गेस और पिछले एक महीने में हुई भारी बारिश के कारण रुड़की क्षेत्र की सोलानी नदी, कलियर की पुरानी व नई गंगनहर का जलस्तर काफी बढ़ गया है। पानी के तेज बहाव के साथ मगरमच्छ बहकर निचले और इंसानी बस्ती वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं।
धनौरी, कलियर, कान्हापुर, शेरपुर और पाडली झील के आसपास के इलाकों में मगरमच्छों की चहलकदमी लगातार देखी जा रही है। दो दिन पहले रुड़की और कलियर के बीच गंगनहर में एक विशालकाय मगरमच्छ तैरता हुआ दिखाई दिया, जिससे स्थानीय लोगों में Haridwar Crocodile Fear और ज्यादा गहरा गया है। नहर किनारे रहने वाले लोगों ने अब पानी के पास जाना लगभग बंद कर दिया है।
Haridwar Crocodile Fear से किसान और ग्रामीण परेशान, खेतों में मंडराया संकट
नदी और नहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों की दिनचर्या बुरी तरह प्रभावित हुई है। ग्रामीणों को दैनिक कार्यों, मवेशियों को पानी पिलाने और खेतों में काम करने के लिए नदी व नहर के किनारे जाना ही पड़ता है।
बारिश के मौसम में खेतों और रास्तों के आसपास पानी भरने और झाड़ियां उगने से मगरमच्छों को छिपने की जगह आसानी से मिल जाती है। ऐसे में जलभराव या झाड़ियों में छिपे मगरमच्छ को पहचानना ग्रामीणों के लिए बेहद मुश्किल हो रहा है, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। कलियर और धनौरी के ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ उन जगहों पर भी पहुंच रहे हैं जहां पहले उन्हें कभी नहीं देखा गया था।
वन विभाग की सुस्ती पर उठे सवाल, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल
बढ़ते Haridwar Crocodile Fear के बावजूद स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वन विभाग इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी दुर्घटना का इंतजार करने के बजाय संवेदनशील इलाकों में तुरंत गश्त बढ़ाई जानी चाहिए।
प्रशासन की ओर से कोई बड़ी कार्रवाई न होते देख, ग्रामीण अब मगरमच्छों के वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं, ताकि वन विभाग की नींद खुल सके। ग्रामीणों की मांग है कि आबादी के करीब दिखे मगरमच्छों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाए।
वन विभाग का रुख और प्रभावित इलाके
तनावपूर्ण स्थिति के बीच जिन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा बना हुआ है, उनमें प्रमुख हैं:
- कलियर और उससे सटे ग्रामीण क्षेत्र
- सोलानी नदी के किनारे बसे गांव
- कान्हापुर और शेरपुर
- रुड़की-कलियर गंगनहर का तटीय इलाका
- पाडली झील का आसपास का क्षेत्र
मामले पर रुड़की वन विभाग रेंज के रेंजर महेंद्र गिरी का कहना है कि सूचना मिलने पर टीम मौके पर भेजी जाती है। हालांकि, पानी के तेज बहाव या गंगनहर के अंदर रहने के दौरान मगरमच्छ को पकड़ना कठिन होता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जैसे ही मगरमच्छ आबादी या सूखे स्थान पर दिखे, तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि समय रहते रेस्क्यू किया जा सके।
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