Uttarakhand Monsoon: उत्तराखंड में इस बार Uttarakhand Monsoon का असर बेहद व्यापक दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश, भूस्खलन और पहाड़ी क्षेत्रों में मलबा आने की वजह से प्रदेशभर में सड़क यातायात प्रभावित हुआ है। लोक निर्माण विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 21 जून से 12 अगस्त 2026 के बीच राज्य में कुल 1944 सड़कें बाधित हुईं। इनमें से 1821 सड़कों को पूरी तरह खोल दिया गया है, जबकि 102 सड़क मार्ग अभी भी प्रभावित हैं।
बारिश से क्षतिग्रस्त सड़कों को सामान्य स्थिति में लाने के लिए अब तक करीब 19 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। वहीं, सड़कों को पूरी तरह उनकी पूर्व स्थिति में बहाल करने के लिए 211.10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। खास बात यह है कि मानसून सीजन अभी खत्म नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में बारिश के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
Uttarakhand Monsoon में 1944 सड़कें हुईं बाधित
प्रदेश में सक्रिय Uttarakhand Monsoon के दौरान सबसे ज्यादा असर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों की सड़कों पर पड़ा है। लोक निर्माण विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 21 जून से 12 अगस्त की दोपहर तक कुल 1944 सड़क मार्ग किसी न किसी वजह से बाधित हुए।
इनमें 1629 विलेज मार्ग, 144 स्टेट हाईवे, 86 मुख्य जिला मार्ग, 70 अन्य जिला मार्ग, 18 राष्ट्रीय राजमार्ग, 15 गांवों को जोड़ने वाले मार्ग और 12 अन्य सड़कें शामिल हैं। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बारिश के बीच इन मार्गों पर लगातार यातायात बहाल रखना है।
कई जगहों पर सड़क खुलने के कुछ समय बाद दोबारा मलबा आने या भूस्खलन होने से आवाजाही प्रभावित हो रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बदलते मौसम के कारण राहत और मरम्मत कार्य भी आसान नहीं है।

पौड़ी में सबसे ज्यादा सड़कें प्रभावित
इस मानसून सीजन में पौड़ी जिला सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है। यहां अब तक 375 सड़कें बाधित हो चुकी हैं। इसके बाद टिहरी में 261, चमोली में 186, पिथौरागढ़ में 182 और अल्मोड़ा में 181 सड़कें प्रभावित हुई हैं।
देहरादून में 173, उत्तरकाशी में 164, नैनीताल में 138, रुद्रप्रयाग में 101 और बागेश्वर में 100 सड़कें बाधित हुई हैं। चंपावत में 61, हरिद्वार में 17 और ऊधम सिंह नगर में केवल एक सड़क प्रभावित हुई है। इसके अलावा चार अन्य सड़क मार्ग भी बारिश की वजह से प्रभावित बताए गए हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि Uttarakhand Monsoon का सबसे ज्यादा असर राज्य के पर्वतीय जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां भूस्खलन और मलबा गिरने से सड़क संपर्क बार-बार बाधित हो रहा है।
102 सड़कें अभी भी बंद
लोक निर्माण विभाग के अनुसार, बाधित हुई 1944 सड़कों में से 1821 सड़कें पूरी तरह खोल दी गई हैं, जबकि 21 मार्गों पर सामान्य आवाजाही शुरू कराई जा चुकी है। इसके बावजूद 102 सड़कें अभी भी बाधित हैं।
विभाग की कोशिश है कि प्रभावित मार्गों को जल्द से जल्द यातायात के लिए खोला जाए। इसके लिए संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी और अन्य मशीनरी तैनात की गई है। लगातार बारिश के कारण कई बार राहत कार्य रोकना भी पड़ता है, जिससे सड़क खोलने में अपेक्षा से ज्यादा समय लग जाता है।
211 करोड़ रुपये में होगी सड़कों की मरम्मत
बारिश से सड़क मार्गों को हुए नुकसान का आर्थिक असर भी बड़ा है। विभाग के मुताबिक, अब तक प्रभावित सड़कों पर यातायात बहाल करने में करीब 19 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। वहीं, क्षतिग्रस्त सड़कों को पूरी तरह पूर्व स्थिति में लाने के लिए 211.10 करोड़ रुपये की जरूरत का अनुमान लगाया गया है।
यह राशि अभी अनुमानित है और मानसून के दौरान आगे होने वाले नुकसान के साथ इसमें बदलाव हो सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण और मरम्मत की लागत मैदानी इलाकों की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में लगातार बारिश सरकार और संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
पिछले साल भी हुआ था भारी नुकसान
उत्तराखंड में मानसून के दौरान सड़कें बाधित होना कोई नई समस्या नहीं है। पिछले साल यानी 21 जून से 30 सितंबर 2025 के बीच प्रदेश में कुल 1997 सड़कें प्रभावित हुई थीं।
इनमें 135 स्टेट हाईवे, 1575 विलेज मार्ग, 112 मुख्य जिला मार्ग, 30 राष्ट्रीय राजमार्ग, 114 अन्य जिला मार्ग और गांवों को जोड़ने वाली 17 सड़कें शामिल थीं। इन मार्गों को यातायात के लिए खोलने में करीब 91.83 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। वहीं, सड़कों को पहले जैसी स्थिति में लाने के लिए 313.43 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया था।
इस लिहाज से इस साल 12 अगस्त तक ही 1944 सड़कें प्रभावित होना चिंता का विषय है, क्योंकि मानसून सीजन में अभी काफी समय बाकी है।
24 घंटे में सड़क खोलने का लक्ष्य
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पांडेय के अनुसार, प्रदेश में मानसून सक्रिय रहने के कारण अलग-अलग स्थानों पर सड़कें बंद हो रही हैं। विभाग का प्रयास है कि किसी भी महत्वपूर्ण सड़क को 24 घंटे से ज्यादा समय तक बंद न रहने दिया जाए।
इसके लिए संवेदनशील और महत्वपूर्ण मार्गों पर मशीनें पहले से तैनात की गई हैं। हालांकि, एक ही सड़क के अलग-अलग हिस्सों में नुकसान होने पर मरम्मत में अधिक समय लग सकता है। कई स्थानों पर मलबा हटाने के बाद दोबारा पहाड़ से मलबा आने की समस्या भी सामने आती है।
मानसून में यात्रियों को सतर्क रहने की जरूरत
Uttarakhand Monsoon के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। सड़क खुली होने की जानकारी मिलने के बाद भी मौसम और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए यात्रा की योजना बनाना जरूरी है।
प्रशासन और लोक निर्माण विभाग की टीमें लगातार सड़क मार्गों की निगरानी कर रही हैं। ऐसे में यात्रियों को प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी का पालन करना चाहिए और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक रुकने से बचना चाहिए। आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने की स्थिति में सड़क बंद होने और दोबारा खुलने का सिलसिला जारी रह सकता है।







