प्राकृतिक आपदा: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ और शोपियां में बादल फटने से तबाही, गाड़ियों का बहाव और हाईवे प्रभावित

जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में मानसून की भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। किश्तवाड़ और शोपियां जिलों में देर रात और तड़के हुए हादसों में भारी तबाही देखने को मिली है। पहाड़ी ढलानों से आए तेज बहाव और मलबे की वजह से कई गाड़ियां बह गईं, मकानों और सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचा है, तथा सुरक्षा के लिहाज से राष्ट्रीय राजमार्ग को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

​तमाम तबाही के बीच सबसे राहत की बात यह रही कि प्रशासन की मुस्तैदी और स्थानीय टीमों की त्वरित कार्रवाई के चलते किसी भी तरह की जनहानि या किसी व्यक्ति के घायल होने की सूचना नहीं है।

​किश्तवाड़ के चत्रू में आधी रात को फटा बादल

​किश्तवाड़ जिले के चत्रू इलाके में शुक्रवार देर रात लगभग 2:30 बजे अचानक बादल फटने की घटना घटी। पहाड़ी क्षेत्र से आए पानी का बहाव इतना अप्रत्याशित और तेज था कि निचले इलाकों में खड़े वाहन और अन्य कीमती सामान ताश के पत्तों की तरह बह गए।

​स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के सन्नाटे में अचानक मलबे और पानी के गर्जन से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। तेज पानी के साथ आए पत्थरों और कीचड़ ने निजी व सार्वजनिक संपत्तियों को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया है। जिला प्रशासन की ओर से नुकसान का सही और विस्तृत आकलन करने के लिए सर्वेक्षण दल तैनात कर दिए गए हैं।

​शोपियां में एसडीआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन: घरों और स्कूल में घुसा पानी

​दूसरी ओर, शनिवार को शोपियां जिले के पेहलीपोरा इलाके में भी बादल फटने का मामला सामने आया। मूसलाधार बारिश के चलते पहाड़ों से भारी मात्रा में पानी, गाद और कीचड़ रिहायशी इलाकों की तरफ बहकर आ गया।

प्रमुख बिंदु:

▪ ​पेहलीपोरा में 5 रिहायशी मकान और 1 स्कूल की इमारत जलमग्न हो गई।
▪ ​राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) और स्थानीय पुलिस ने तुरंत संयुक्त बचाव अभियान शुरू किया।
▪ ​संवेदनशील स्थानों से नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया।

​स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमों ने सूचना मिलते ही मौके पर पहुँचकर बिना समय गंवाए लोगों को घरों से निकाला, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

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​यातायात और राजमार्ग पर असर

​आपदा के तुरंत बाद सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने चत्रू-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन और मलबे के जमा हो जाने के कारण सड़कें बंद हैं।

​संवेदनशील मार्गों पर भारी मशीनों को तैनात किया गया है ताकि मौसम साफ होते ही मलबे को हटाकर यातायात बहाल किया जा सके। लगातार हो रही रिमझिम और तेज बारिश के कारण मरम्मत कार्यों में भी बाधा आ रही है।

​क्षेत्रीय स्थिति: अमरनाथ यात्रा और वैष्णो देवी मार्ग पर प्रभाव

​जम्मू संभाग के विभिन्न हिस्सों में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने धार्मिक और सामान्य आवाजाही को भी बड़े पैमाने पर प्रभावित किया है:

• ​अमरनाथ यात्रा: सुरक्षा स्थिति और भूस्खलन के बढ़ते खतरों को देखते हुए शुक्रवार को बालटाल मार्ग से यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया। पारंपरिक पहलगाम मार्ग पर भी बारिश और भूस्खलन के चलते आवाजाही पहले से ही रोक दी गई थी।

• ​वैष्णो देवी धाम: त्रिकुटा पर्वत पर बादल छाए रहने और दोपहर बाद हुई बारिश से कटड़ा-सांझीछत चॉपर (हेलीकॉप्टर) सेवा दिनभर बाधित रही। हालांकि, 12 दिनों के लंबे अंतराल के बाद बैटरी कार मार्ग पर आवाजाही को पुनः बहाल कर दिया गया है।

• ​सुरक्षा बल तैनात: श्राइन बोर्ड, पुलिस, सीआरपीएफ, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन दल संवेदनशील स्थानों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे तैनात हैं।

​मौसम विभाग की सख्त चेतावनी: 4 अगस्त तक ऑरेंज अलर्ट

​मौसम विज्ञान केंद्र (Srinagar Meteorological Centre) ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आगामी 4 अगस्त तक जम्मू संभाग के लगभग 10 जिलों के लिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।

अनुमानित बारिश
संभावित खतरे
संवेदनशील क्षेत्र

100 मिमी से 200 मिमी
अचानक बाढ़ (Flash Floods), भूस्खलन (Landslides), पहाड़ों से पत्थर गिरना (Shooting Stones)
किश्तवाड़, शोपियां, डोडा, उधमपुर, रियासी और अन्य पहाड़ी जिले

मौसम विभाग ने पहाड़ी और नदी-नालों के आसपास रहने वाले सभी नागरिकों और यात्रियों को अत्यंत सतर्क रहने की सलाह दी है। प्रशासन ने लोगों से बेवजह यात्रा न करने और केवल आपातकालीन स्थिति में ही घर से बाहर निकलने की अपील की है।

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