Uttarakhand  News- साल का इंतजार खत्म: 1 अगस्त से फिर शुरू होगा भारत-चीन सीमा व्यापार, लेकिन नया सामान ले जाने पर 'रेड सिग्नल' - Doonprimenews
अल्मोड़ा बागेश्वर चमोली चम्पावत देहरादून हरिद्वार नैनीताल पौड़ी गढ़वाल पिथौरागढ़ रुद्रप्रयाग टिहरी गढ़वाल उधम सिंह नगर उत्तरकाशी

Uttarakhand  News- साल का इंतजार खत्म: 1 अगस्त से फिर शुरू होगा भारत-चीन सीमा व्यापार, लेकिन नया सामान ले जाने पर ‘रेड सिग्नल’

On: June 5, 2026 5:20 PM
Follow Us:
Indian traders walking towards the Lipulekh border pass to reach Taklakot market in Tibet

​पिथौरागढ़:

उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले सीमांत व्यापारियों के लिए छह साल के लंबे इंतजार के बाद एक राहत भरी खबर तो आई है, लेकिन इस राहत के साथ निराशा की एक बड़ी टीस भी जुड़ी हुई है। ऐतिहासिक लिपुलेख दर्रे के जरिए होने वाला भारत-चीन सीमा व्यापार आखिरकार दोबारा पटरी पर लौटता दिख रहा है।

हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"

आगामी 1 अगस्त को भारतीय व्यापारियों का पहला दल तिब्बत (चीन) स्थित प्रसिद्ध ‘तकलाकोट मंडी’ के लिए रवाना होने जा रहा है। हालांकि, विडंबना यह है कि इस बार हमारे व्यापारियों को अपने साथ कोई भी नया व्यापारिक सामान ले जाने की इजाजत नहीं मिली है। नतीजतन, सीमांत व्यापारी बिना किसी नए उत्पाद के खाली हाथ ही सीमा पार करने को मजबूर होंगे।

स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ

​कोरोना महामारी और कूटनीतिक तनाव की भेंट चढ़ा था व्यापार

​गौरतलब है कि वर्ष 1992 में शुरू हुआ यह पारंपरिक भारत-चीन सीमा व्यापार वर्ष 2019 के बाद से पूरी तरह ठप पड़ा हुआ था। वर्ष 2020 में फैली वैश्विक कोरोना महामारी (कोविड-19) और उसके बाद गलवान घाटी की घटना के चलते दोनों देशों के बीच उपजे कूटनीतिक और सैन्य तनाव की वजह से इस व्यापार मार्ग को पूरी तरह से बंद कर दिया गया था।

​स्थानीय शौका (भोटिया) समुदाय और अन्य व्यापारी हर साल इस व्यापार के जरिए अपना जीवनयापन करते रहे हैं। वर्ष 2026 में जब कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के बाद व्यापार की दोबारा बहाली की सुगबुगाहट शुरू हुई, तो पिथौरागढ़ और धारचूला के स्थानीय व्यापारियों में उत्साह की एक लहर दौड़ गई थी। व्यापारियों ने महीनों पहले से ही चीन की मंडियों में मांग में रहने वाली जड़ी-बूटियों, कालीन, हस्तशिल्प और रोजमर्रा के सामान को तैयार कर लिया था।

​जून में भी नहीं मिली थी चीनी प्रशासन से हरी झंडी

​व्यापार शुरू होने की उम्मीद में कई उत्साहभरे व्यापारी जून महीने में ही भारी खर्च उठाकर अपना करोड़ों रुपये का सामान ट्रकों में लादकर गुंजी (उच्च हिमालयी व्यापारिक पड़ाव) तक पहुंच गए थे। हालांकि, उस समय चीनी अधिकारियों की ओर से सीमा पार करने की अंतिम मंजूरी (ट्रेड पास और अनुमति) नहीं दी गई।

​चीनी प्रशासन के इस अनमने रुख के कारण व्यापारियों को मजबूरन अपना लाखों-करोड़ों रुपये का कीमती सामान गुंजी के गोदामों में छोड़कर भारी मन से धारचूला और पिथौरागढ़ लौटना पड़ा था। तब से व्यापारी लगातार सीमा खुलने और चीन की ओर से स्पष्ट निर्देश आने का इंतजार कर रहे थे।

​केवल 20 लोगों का पहला दल जाएगा तकलाकोट

​ताजा घटनाक्रम के मुताबिक, चीनी प्रशासन ने आखिरकार 1 अगस्त को पहले दल को तकलाकोट मंडी में प्रवेश करने की अनुमति दे दी है। इस पहले जत्थे में कुल 20 लोग शामिल होंगे, जिनमें व्यापारी और उनके सहयोगी (हेल्पर) शामिल हैं।

​हालांकि, चीन प्रशासन ने एक कड़ा नियम लागू किया है। इस दल में केवल उन्हीं व्यापारियों को जगह दी गई है, जिनका वर्ष 2019 या उससे पहले का पुराना सामान और पूंजी तकलाकोट मंडी के गोदामों में फंसी या डंप पड़ी हुई है। चीन ने साफ कर दिया है कि यह दल केवल वहां जाकर अपनी पुरानी दुकानों और गोदामों में रखे सामान का निपटारा कर सकता है, लेकिन भारत से एक भी नया सामान सीमा पार ले जाने की इजाजत फिलहाल नहीं होगी।

​तकलाकोट पहुंचने के बाद ही साफ होगी आगे की तस्वीर

​भारत-चीन सीमा व्यापार समिति के महासचिव दौलत रायपा के अनुसार, पहला दल तकलाकोट पहुंचकर वहां की मौजूदा व्यापारिक व्यवस्थाओं, गोदामों की स्थिति और दुकानों की सुरक्षा का मुआयना करेगा। इसके अलावा, भारतीय व्यापारी चीनी अधिकारियों और स्थानीय तिब्बती व्यापारियों के साथ सीधी बैठकें करेंगे।

​व्यापारियों का कहना है कि 1 अगस्त को तकलाकोट पहुंचने और वहां के प्रशासन से बातचीत करने के बाद ही यह तस्वीर साफ हो पाएगी कि क्या इस साल नियमित व्यापार शुरू हो सकेगा और यदि होगा, तो उसके लिए क्या शर्तें और नियम लागू किए जाएंगे।

​व्यापार के दो अहम महीने पहले ही गंवा चुके हैं व्यापारी

​पिथौरागढ़ के सीमांत व्यापारियों के लिए समय की कमी एक बड़ी चुनौती बन गई है। सामान्य दिनों में भारत-चीन सीमा व्यापार हर साल 1 जून से शुरू हो जाता था और अक्टूबर के अंतिम सप्ताह तक (बर्फबारी शुरू होने से पहले) चलता था।
​इस वर्ष जून और जुलाई के दो बेहद महत्वपूर्ण महीने बिना किसी व्यापार के निकल चुके हैं।

यदि अगस्त के पहले या दूसरे सप्ताह में नया माल ले जाने की अनुमति मिल भी जाती है, तो भी भारतीय व्यापारियों के पास कारोबार करने के लिए मुश्किल से दो या ढाई महीने का समय ही बचेगा। इतने कम समय में बड़ा व्यापार कर पाना और मुनाफा कमाना व्यापारियों के लिए बेहद कठिन साबित होगा।

ये भी पढ़े➜जेल हो या मौत, दिसंबर तक लौटूंगी देश’: पूर्व पीएम शेख हसीना का बड़ा एलान; बांग्लादेश की राजनीति में हलचल

​क्या कहते हैं व्यापारी और विशेषज्ञ?

​स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि छह साल के लंबे अंतराल के बाद तकलाकोट का रास्ता खुलना कूटनीतिक नजरिए से भले ही एक सकारात्मक कदम हो, लेकिन खाली हाथ जाना एक आर्थिक झटका है। 2019 से उनका पुराना सामान गोदामों में बंद पड़ा है, जिसकी गुणवत्ता और मौजूदा स्थिति को लेकर व्यापारी खुद सशंकित हैं।

​व्यापारियों की मांग है कि केंद्र और राज्य सरकार को इस विषय में हस्तक्षेप कर चीनी प्रशासन से वार्ता करनी चाहिए, ताकि भारतीय व्यापारियों को नया माल ले जाने की अनुमति मिल सके और वर्षों से चला आ रहा यह ऐतिहासिक व्यापार एक बार फिर अपने पुराने स्वरूप में लौट सके। फिलहाल, सभी की नजरें 1 अगस्त को तकलाकोट जाने वाले इस 20 सदस्यीय दल की रिपोर्ट और चीनी रुख पर टिकी हुई हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment