लॉर्ड्स (लंदन): भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इंग्लैंड की धरती पर वो ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है, जिसकी गूंज सदियों तक क्रिकेट जगत में सुनाई देगी। क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले ऐतिहासिक लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए एकमात्र टेस्ट मैच में हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली टीम इंडिया ने मेजबान इंग्लैंड को 270 रनों के विशाल अंतर से धूल चटा दी।
इस जीत के साथ ही भारतीय महिला टीम ने न सिर्फ इंग्लैंड का घमंड तोड़ा, बल्कि टेस्ट क्रिकेट के 142 साल के इतिहास को भी पूरी तरह से पलट कर रख दिया।
मेजबान इंग्लिश टीम अपने ही घर में भारतीय गेंदबाजों और बल्लेबाजों के सामने पूरी तरह बेबस और लाचार नजर आई। खेल के हर विभाग—बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग में भारत ने ऐसा एकतरफा दबदबा बनाया कि इंग्लैंड की टीम मुकाबले में कहीं टिक ही नहीं सकी।
टी20 वर्ल्ड कप के जख्मों पर लगाया मरहम
भारतीय महिला टीम के लिए यह ऐतिहासिक जीत कई मायनों में बेहद खास है। दरअसल, इसी लॉर्ड्स के मैदान पर हाल ही में संपन्न हुए महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम को ऑस्ट्रेलिया के हाथों करारी शिकस्त झेलनी पड़ी थी। उस हार के साथ ही भारत का विश्व कप जीतने का सपना टूट गया था और टीम का अभियान बेहद निराशाजनक मोड़ पर समाप्त हुआ था।
लेकिन, कप्तान हरमनप्रीत कौर और उनकी जांबाज सेना ने हिम्मत नहीं हारी। भारतीय टीम ने इस एकमात्र टेस्ट मैच को जीतकर न सिर्फ उस पुराने जख्म पर मरहम लगाया, बल्कि इस दौरे का अंत सुनहरे अक्षरों में इतिहास लिखकर किया।
लॉर्ड्स में टूटा 142 साल का सूखा, भारत का ऐतिहासिक दबदबा
लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर पहला पुरुष टेस्ट मैच आयोजित होने के बाद से अब तक करीब 150 से अधिक मुकाबले खेले जा चुके हैं, लेकिन जो कारनामा इस बार भारतीय महिला टीम ने किया, वो पिछले 142 सालों में कभी नहीं देखा गया था। भारतीय टीम ने लॉर्ड्स की चुनौतीपूर्ण पिचों पर इंग्लिश टीम को चारों खाने चित कर दिया।
इस जीत के साथ ही एक बेहद अनोखा और हैरान करने वाला रिकॉर्ड भी सामने आया है। महिला क्रिकेट के इतिहास में इंग्लैंड की टीम आज तक अपने घरेलू मैदान (लॉर्ड्स) पर भारत के खिलाफ कोई भी टेस्ट मैच जीतने में नाकाम रही है।
टेस्ट प्रारूप में भारतीय महिलाओं का दबदबा इस कदर कायम है कि इंग्लैंड की टीम ने भारत के खिलाफ आखिरी बार साल 1995 में कोई टेस्ट मैच जीता था। यानी पिछले 31 सालों से इंग्लिश टीम भारत को टेस्ट क्रिकेट में हराने के लिए तरस रही है, और यह सूखा इस हार के बाद और लंबा हो गया है।
हेड-टू-हेड रिकॉर्ड में भारत का पलड़ा भारी
भारत और इंग्लैंड की महिला टीमों के बीच टेस्ट क्रिकेट के इतिहास पर नजर डालें, तो दोनों देशों के बीच अब तक कुल 16 टेस्ट मैच खेले जा चुके हैं। इन मुकाबलों में भारतीय टीम का पलड़ा हमेशा भारी रहा है:
- भारत की जीत: 04 मैच
- इंग्लैंड की जीत: 01 मैच
- ड्रॉ मुकाबले: 11 मैच
ये आंकड़े साफ गवाही देते हैं कि पारंपरिक लाल गेंद के क्रिकेट में भारतीय महिला टीम का स्तर इंग्लैंड से कहीं बेहतर रहा है। इंग्लैंड की टीम इतने सालों में मात्र एक बार भारत को हरा पाई है, जो उनकी घरेलू पिचों के रिकॉर्ड को देखते हुए बेहद शर्मनाक है।
यास्तिका का शतक और क्रांति गौड़ का ‘सप्तक’
भारत की इस एकतरफा और ऐतिहासिक जीत की पटकथा दो मुख्य किरदारों ने लिखी। पहली पारी में स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज यास्तिका भाटिया ने इंग्लिश गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए एक शानदार और जुझारू शतक जड़ा। यास्तिका के इस शतक की बदौलत भारत ने बोर्ड पर एक ऐसा मजबूत स्कोर खड़ा कर दिया, जिसके दबाव से इंग्लैंड की टीम मैच में कभी उबर ही नहीं पाई।
बल्लेबाजों के बाद रही-सही कसर भारतीय गेंदबाजी सनसनी क्रांति गौड़ ने पूरी कर दी। क्रांति ने अपनी आग उगलती गेंदों और बेहतरीन लाइन-लेंथ के दम पर इंग्लैंड की बल्लेबाजी लाइन-अप को तहस-नहस कर दिया। उन्होंने मैच में घातक गेंदबाजी करते हुए 7 विकेट चटकाए और मेजबान टीम की कमर तोड़ दी। इन दोनों खिलाड़ियों के बेजोड़ प्रदर्शन के दम पर ही भारत ने इंग्लैंड को 270 रनों के विशाल अंतर से मात दी।
टेस्ट इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी जीत
इंग्लैंड के खिलाफ मिली यह 270 रनों की जीत भारतीय महिला टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की दूसरी सबसे बड़ी जीत बन गई है। दिलचस्प बात यह है कि टेस्ट क्रिकेट में रनों के लिहाज से भारत की सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड भी इंग्लैंड के खिलाफ ही है।
साल 2023 में भारत के डीवाई पाटिल स्टेडियम में खेले गए टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को 347 रनों से शिकस्त दी थी, जो न सिर्फ भारत की, बल्कि वैश्विक महिला टेस्ट इतिहास की भी अब तक की सबसे बड़ी जीत है। अब लॉर्ड्स में मिली यह दूसरी सबसे बड़ी जीत यह साबित करती है कि हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में यह टीम विश्व क्रिकेट पर राज करने के लिए तैयार है।









