मुख्य बिंदु:
- घटनास्थल: तिलकामांझी थाना के ठीक सामने स्थित कार्यालय, भागलपुर।
- मृत्तक: जमीन कारोबारी व बिल्डर बजरंग कुमार।
- क्रूरता की पराकाष्ठा: गला रेतने के साथ हाथ की चार अंगुलियां और प्राइवेट पार्ट काटा, निर्वस्त्र मिला शव।
- पुलिसिया तंत्र पर सवाल: थाने के नाक के नीचे वारदात, परिजनों ने लगाया शिथिलता का आरोप; दो संदिग्ध हिरासत में।
भागलपुर (तिलकामांझी):
बिहार के भागलपुर जिले से कानून-व्यवस्था को ठेंगा दिखाने वाली एक ऐसी खौफनाक और रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है, जिसने न सिर्फ पुलिसिया इकबाल पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। शहर के सबसे व्यस्त और सुरक्षित माने जाने वाले इलाके तिलकामांझी थाना के ठीक सामने स्थित एक कार्यालय में कल रात जाने-माने बिल्डर और जमीन कारोबारी बजरंग कुमार की बेरहमी से हत्या कर दी गई।
कातिलों के सिर पर खून इस कदर सवार था कि उन्होंने महज जान नहीं ली, बल्कि दरिंदगी और प्रतिशोध का एक ऐसा भयावह तांडव रचा जो किसी के भी रोंगटे खड़े कर दे। हत्यारों ने पहले बजरंग के साथ बैठकर शराब पी, फिर उन्हें पूरी तरह निर्वस्त्र कर दिया। इसके बाद धारदार हथियारों से उनका गला रेता गया, हाथ की चार अंगुलियां काटी गईं और बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए उनके प्राइवेट पार्ट (गुप्तांग) को भी क्षत-विक्षत कर दिया गया। इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
हत्या नहीं, गहरी नफरत और संदेश देने की कोशिश
बिल्डर बजरंग कुमार की हत्या का जो तरीका कातिलों ने अख्तियार किया, वह साफ तौर पर इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि यह कोई सामान्य या जल्दबाजी में अंजाम दिया गया अपराध नहीं था। कातिलों के दिलो-दिमाग में बजरंग के प्रति कोई बेहद गहरी और पुरानी नफरत सुलग रही थी।
घटनास्थल की स्थिति को देखकर पुलिस विशेषज्ञों का भी मानना है कि यह हत्या केवल जीवन लीला समाप्त करने के लिए नहीं, बल्कि समाज या किसी खास वर्ग को क्रूरता का एक खौफनाक संदेश देने के अंदाज में की गई है।
हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद भी हत्यारों ने न तो कार्यालय में रखे सामानों के साथ कोई तोड़फोड़ की और न ही परिसर के नीचे खड़ी बजरंग की मोटरसाइकिल को हाथ लगाया। अमूमन लूटपाट के इरादे से की गई वारदातों में सामान बिखरा मिलता है, लेकिन यहाँ सब कुछ जस का तस था। इससे प्रारंभिक तौर पर यह आशंका शत-प्रतिशत मजबूत हो रही है कि कातिलों का एकमात्र और सीधा मकसद सिर्फ और सिर्फ बजरंग को तड़पा-तड़पा कर मौत के घाट उतारना था।
पहले दौर-ए-जाम, फिर अपनों ने ही पीठ में घोंपा खंजर!
घटना की कड़ियों को जोड़ने पर पुलिस को कार्यालय के भीतर से शराब के कई ग्लास और अन्य सामग्रियां बरामद हुई हैं। इन साक्ष्यों से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि वारदात से ठीक पहले कमरे में एक बड़ी शराब पार्टी चल रही थी। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि तिलकामांझी थाने के बिल्कुल सामने स्थित कार्यालय में आधी रात को बैठकर बेखौफ अंदाज में शराब पीना कैसे संभव हुआ?
पुलिस का मानना है कि ऐसा तभी मुमकिन है जब उस महफिल में शामिल लोग कोई बाहरी अपराधी न होकर स्वयं बजरंग के बेहद करीबी, मित्र या व्यावसायिक साझेदार रहे हों, जिनके आने-जाने पर बजरंग को कोई आपत्ति नहीं थी और जिन पर वे आंख मूंदकर भरोसा करते थे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर कातिलों ने पहले उन्हें नशे की हालत में लाचार किया और फिर इस खूनी खेल को अंजाम दिया।
निर्वस्त्र शव और आत्मरक्षा का मूक संघर्ष
जब पुलिस ने सुबह कार्यालय का ताला खुलवाया, तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए। बजरंग का शव फर्श पर पूरी तरह निर्वस्त्र अवस्था में खून से लथपथ पड़ा हुआ था। उनके हाथ की चार अंगुलियां कटी हुई थीं, जिससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि जब धारदार हथियार से उनके गले पर वार किया जा रहा होगा,
तो उन्होंने अपनी जान बचाने के आखरी प्रयास में कातिल के हथियार को अपने हाथों से पकड़ने की कोशिश की होगी। हालांकि, पुलिस इस बात से भी इनकार नहीं कर रही है कि तड़पाने के उद्देश्य से अंगुलियों को जानबूझकर काटा गया हो।
परिजनों का फूटा गुस्सा: पुलिस की सुस्ती पर गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर भी गंभीर उंगलियां उठ रही हैं। मृतक बिल्डर के लाचार पिता दिनेश्वर प्रसाद सिंह ने रोते हुए पुलिस प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, “हमने सुबह करीब सवा चार बजे ही पुलिस को अनहोनी की आशंका जताते हुए सूचना दे दी थी।
बजरंग की पत्नी ने भी पुलिस अधिकारियों को कुछ संदिग्ध लोगों के नाम स्पष्ट तौर पर बताए थे और जमीन कारोबार से जुड़े विवाद की जानकारी दी थी। इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और घंटों तक टालमटोल करती रही। अगर समय रहते पुलिस सक्रिय होकर तुरंत कार्यालय का ताला तोड़ती, तो शायद स्थिति कुछ और होती।”
परिजनों के मुताबिक, बजरंग अक्सर अपने साथ लाखों रुपये की नकदी लेकर चलते थे और कार्यालय में भी मोटी रकम रखते थे। पुलिस अब इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि क्या हत्यारे वारदात के बाद जमीन के कुछ महत्वपूर्ण कागजात या बड़ी नकदी भी अपने साथ समेट ले गए हैं।
एसएसपी ने बनाई स्पेशल टीम; दो संदिग्ध हिरासत में
थाने के ठीक सामने हुई इस नृशंस हत्या से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। वारदात की संवेदनशीलता को देखते हुए भागलपुर के एसएसपी प्रमोद कुमार यादव स्वयं दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना करने के बाद एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया है और अधिकारियों को २४ घंटे के भीतर इस अंधेरे हत्याकांड का पर्दाफाश करने का सख्त अल्टीमेटम दिया है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, तकनीकी इनपुट्स और आसपास के इलाकों से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोतवाली और परबत्ती क्षेत्र से दो मुख्य संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इन दोनों से किसी गुप्त स्थान पर कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस सूत्रों की मानें तो पंकज और रूपेश नामक जिन व्यक्तियों पर मृतक की पत्नी ने शक जताया था, उनके व्यापारिक संबंधों को खंगाला जा रहा है।
खाकी की नाक के नीचे कत्ल: सुरक्षा व्यवस्था तार-तार
यह घटना सिर्फ एक बिल्डर की मौत नहीं है, बल्कि यह भागलपुर की सुरक्षा व्यवस्था के सीने पर एक गहरा घाव है। जिस थाने के इर्द-गिर्द चौबीसों घंटे पुलिसकर्मियों की तैनाती रहती है, गश्ती गाड़ियां आती-जाती हैं, उसकी नाक के ठीक नीचे इतनी बर्बरता से एक इंसान को काट दिया गया और किसी को कानों-कान भनक तक नहीं लगी।
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि जब थाने के सामने ही लोग सुरक्षित नहीं हैं, तो शहर के बाकी कोनों का क्या हाल होगा।
फिलहाल, पुलिस की सुई व्यक्तिगत रंजिश, रुपयों के लेन-देन, जमीन के विवाद और प्रेम-प्रसंग जैसे तमाम बिंदुओं पर घूम रही है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही इस खौफनाक दास्तान के पीछे के चेहरों को बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।











