विशेष संवाददाता, लखनऊ
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके अलीगंज से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ सोमवार दोपहर एक बहुमंजिला इमारत के तीसरे तल पर स्थित गेमिंग जोन और सॉफ्टवेयर कंपनी के दफ्तर में अचानक भीषण आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 8 लोगों की दम घुटने और झुलसने से मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा रहा है कि अपनी जान बचाने के लिए दफ्तर में मौजूद कर्मचारी खिड़कियों से बाहर लटकते तारों के सहारे नीचे कूदने को मजबूर हो गए।
तीसरी मंजिल से उठीं आग की लपटें, दफ्तर में मची चीख-पुकार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अलीगंज स्थित एक पेट शॉप (Pet Shop) के ऊपर बनी इस बहुमंजिला इमारत की तीसरी मंजिल पर यह हादसा हुआ। दोपहर के वक्त जब दफ्तर में कामकाज सामान्य रूप से चल रहा था, तभी अचानक तीसरी मंजिल से धुएं का गुबार और आग की लपटें उठने लगीं। देखते ही देखते आग ने पूरे फ्लोर को अपनी चपेट में ले लिया।
जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय गेमिंग जोन और सॉफ्टवेयर ऑफिस को मिलाकर करीब 30 से अधिक लोग वहां मौजूद थे। आग की लपटें और जहरीला धुआं फैलता देख इमारत के भीतर चीख-पुकार और अफरातफरी मच गई। बाहर निकलने के रास्ते बंद होने के कारण लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
जान बचाने की जद्दोजहद: तारों के सहारे कूदे लोग
बिल्डिंग में फंसे लोगों को जब सुरक्षित बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उन्होंने खिड़कियों का रुख किया। सोशल मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह युवक और युवतियां अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग के बगल से गुजर रहे बिजली और केबल के तारों के सहारे लटककर नीचे कूद रहे थे।
इस खतरनाक जद्दोजहद में एक युवती सहित दो लोग गंभीर रूप से चोटिल हो गए, जिन्हें तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, जो लोग समय रहते बाहर नहीं निकल पाए, वे अंदर ही फंस गए। प्रशासनिक अधिकारियों ने अब तक इस हादसे में 8 लोगों की मौत की पुष्टि की है, और आशंका जताई जा रही है कि मृतकों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।
दमकल विभाग पर देरी का आरोप, 4 घंटे तक सुलगती रही इमारत
हादसे के बाद स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि आग लगने के करीब आधे घंटे बाद तक भी फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर नहीं पहुंच सकी थीं। यदि राहत और बचाव कार्य समय पर शुरू हो जाता, तो शायद कुछ मासूम जानें बचाई जा सकती थीं।
बाद में मौके पर पहुंचीं दमकल की कई गाड़ियों ने भारी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया। आग इतनी विकराल थी कि घटना के करीब 4 घंटे बाद भी पूरी बिल्डिंग अंदर ही अंदर सुलग रही थी और उसमें से गाढ़ा धुआं निकल रहा था। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान दमकल कर्मियों को भी इमारत के भीतर दाखिल होने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
एलडीए (LDA) ने शुरू की जांच, उठे गंभीर सवाल
इस भीषण अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) तुरंत हरकत में आ गया है और मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच केंद्रित कर रहा है:
- अवैध संचालन: क्या इस आवासीय या कमर्शियल बिल्डिंग में गेमिंग जोन और सॉफ्टवेयर ऑफिस चलाने की वैध अनुमति (Permission) ली गई थी?
- फायर सेफ्टी एनओसी (NOC): क्या इमारत में आग से निपटने के पुख्ता इंतजाम जैसे फायर एक्स्टिंग्विशर, स्प्रिंकलर और इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) मौजूद थे?
- शॉर्ट सर्किट की आशंका: शुरुआती तौर पर आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, लेकिन इसके सटीक कारणों का पता लगाया जा रहा है।
अधिकारियों का बयान:
“यह एक बेहद दुखद घटना है। प्राथमिकता घायलों को बेहतर इलाज मुहैया कराने और मलबे में फंसे संभावित लोगों को निकालने की है। इसके साथ ही, नियमों के उल्लंघन की जांच की जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
घायलों का इलाज जारी, परिजनों में कोहराम
हादसे में झुलसे और घायल हुए लोगों को तुरंत नजदीकी ट्रॉमा सेंटर और अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टरों की टीम उनकी देखरेख कर रही है। वहीं, मृतकों के परिवारों में इस घटना के बाद से कोहराम मचा हुआ है। दफ्तर गए अपनों की मौत की खबर ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं। फिलहाल, पुलिस मृतकों के शवों की शिनाख्त करने और उनके परिजनों से संपर्क साधने में जुटी है। नुकसान का सटीक आकलन और सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है।










