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सरकार के पास पूरा अधिकार’: नीट पेपर लीक मामले में टेलीग्राम को करारा झटका, दिल्ली हाईकोर्ट का प्रतिबंध हटाने से इनकार

On: June 19, 2026 6:29 AM
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​नई दिल्ली:

मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) पेपर लीक विवाद और आगामी परीक्षाओं की शुचिता को लेकर जारी कानूनी लड़ाई में मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम (Telegram) को तगड़ा झटका लगा है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीट की दोबारा परीक्षा के मद्देनजर केंद्र सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंध (Temporary Ban) को चुनौती देने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है।

अदालत के इस फैसले के बाद अब 22 जून तक टेलीग्राम पर लगा सरकारी प्रतिबंध पूरी तरह बरकरार रहेगा।
​न्यायमूर्ति तेजस करिया की एकल पीठ ने मामले की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय सुरक्षा व छात्रों के भविष्य को सर्वोपरि रखते हुए स्पष्ट किया कि आपातकालीन परिस्थितियों में सरकार के पास ऐसे कदम उठाने का पूरा वैधानिक अधिकार है।

​अदालत का बड़ा फैसला: टेलीग्राम को नहीं मिली कोई राहत

​दरअसल, देश में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के पेपर लीक होने और उससे जुड़े संवेदनशील दस्तावेजों को टेलीग्राम चैनलों पर प्रसारित किए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद, केंद्र सरकार ने आगामी नीट री-एग्जाम (NEET Re-exam) को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 69A का उपयोग करते हुए टेलीग्राम सेवाओं पर अस्थायी रोक लगा दी थी।

​टेलीग्राम ने सरकार के इस आपातकालीन ब्लॉक आदेश को मनमाना और अत्यधिक कठोर बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, याचिका पर विस्तृत सुनवाई के बाद जस्टिस तेजस करिया ने सरकार के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया।

​क्या है आईटी एक्ट की धारा 69A, जिसे कोर्ट ने माना सही?

​सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के उस तर्क को स्वीकार किया, जिसके तहत देश की संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण लगाया जा सकता है।
​अदालत ने अपने फैसले में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं को रेखांकित किया:

  • ​प्रक्रिया का पूर्ण पालन: अदालत ने माना कि नीट परीक्षा की संवेदनशीलता और देशव्यापी छात्र आंदोलन जैसी आपातकालीन स्थिति को देखते हुए सरकार ने आईटी अधिनियम की धारा 69ए (Section 69A of IT Act) के तहत तय नियमों और प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया है।
  • ​सोच-समझकर लिया गया निर्णय: हाईकोर्ट ने टेलीग्राम के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि सरकार ने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में यह कदम उठाया है। कोर्ट ने कहा कि इस आदेश में विवेक का इस्तेमाल न करने जैसी कोई कानूनी कमी नहीं दिखती।
  • ​कानून के दायरे से बाहर नहीं प्लेटफॉर्म: अदालत ने कड़े शब्दों में कहा कि आईटी एक्ट के तहत इस प्लेटफॉर्म को सरकारी जांच या नियामक दायरे से बाहर रखने का कोई तार्किक कारण मौजूद नहीं है।

​’आनुपातिकता की कसौटी पर खरा उतरा सरकार का कदम’

​दिल्ली उच्च न्यायालय ने अभिव्यक्ति की आजादी और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम ‘आनुपातिकता की कसौटी’ (Test of Proportionality) को पूरी तरह संतुष्ट करता है।


​अदालत के अनुसार, परीक्षा की गोपनीयता को बनाए रखने और भविष्य में किसी भी संभावित पेपर लीक या अफवाह को रोकने के लिए यह कदम ‘सबसे कम पाबंदी वाला’ (Least Restrictive) उपाय था। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से माना कि इस आदेश को किसी भी नजरिए से अनुचित, एकतरफा या जरूरत से ज्यादा कठोर (Disproportionate) नहीं कहा जा सकता।

​नीट परीक्षा की शुचिता और छात्रों का भविष्य सर्वोपरि

​गौरतलब है कि नीट परीक्षा को लेकर देश भर में मचे बवाल के बाद सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) अत्यधिक सतर्कता बरत रहे हैं। जांच एजेंसियों के इनपुट के मुताबिक, पेपर लीक माफियाओं और नकल गिरोहों द्वारा टेलीग्राम जैसे ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड’ प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल गुप्त ग्रुप बनाने और अवैध सामग्री साझा करने के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा था।

ऐसी स्थिति में, दोबारा होने वाली परीक्षा से ठीक पहले इस तरह की गतिविधियों पर अंकुश लगाना अनिवार्य हो गया था।
​हाईकोर्ट ने भी माना कि लाखों छात्रों के भविष्य और देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की साख को बचाना किसी भी कमर्शियल प्लेटफॉर्म के व्यावसायिक हितों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

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​निष्कर्ष और आगे की राह

​दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा टेलीग्राम की याचिका खारिज किए जाने के बाद अब यह साफ हो गया है कि कम से कम 22 जून तक देश में टेलीग्राम पर पाबंदियां लागू रहेंगी। इस ऐतिहासिक फैसले ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही को लेकर एक बड़ा नजीर पेश किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सरकार को उन विदेशी टेक कंपनियों और मैसेजिंग ऐप्स के खिलाफ कड़े कदम उठाने की शक्ति देगा, जो राष्ट्रीय सुरक्षा या देश की शिक्षा प्रणाली को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन रहे हैं। फिलहाल, सरकार का पूरा ध्यान बिना किसी कूटनीतिक या तकनीकी व्यवधान के नीट की री-एग्जाम को पूरी शुचिता के साथ आयोजित कराने पर केंद्रित है।

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