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दिल्ली से बदरी-केदार सिर्फ 4.5 घंटे में! नमो भारत और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मिलकर बदलेंगी उत्तराखंड की तस्वीर

On: June 22, 2026 7:56 AM
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​देहरादून। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा और पर्यटन के बुनियादी ढांचे को एक नया आयाम मिलने जा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा को बेहद सुगम, तीव्र और थकान मुक्त बनाने के लिए एक ऐतिहासिक महायोजना पर काम शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मेरठ से ऋषिकेश तक नमो भारत (रैपिड रेल) ट्रेन के विस्तार के लिए प्रारंभिक सर्वे को अपनी सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है और इसके लिए बजट का प्रविधान भी कर दिया है।


​यदि प्रस्तावित दिल्ली-हरिद्वार-ऋषिकेश नमो भारत रैपिड रेल कॉरिडोर और निर्माणाधीन ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना दोनों धरातल पर पूरी तरह परवान चढ़ती हैं, तो दिल्ली से उत्तराखंड के पहाड़ों का सफर हमेशा-हमेशा के लिए बदल जाएगा। श्रद्धालु और पर्यटक दिल्ली से महज 4.5 से 5 घंटे में पहाड़ों के प्रवेश द्वार को पार कर कर्णप्रयाग तक का सफर तय कर सकेंगे।

​क्यों है यह परियोजना खास? यात्रा का बदलेगा पूरा ढांचा

​वर्तमान समय में दिल्ली से ऋषिकेश तक सड़क मार्ग से पहुंचने में सामान्यतः 5 से 6 घंटे का समय लगता है। इसके बाद पहाड़ों के घुमावदार और संकरे रास्तों से होकर बदरीनाथ या केदारनाथ की आगे की यात्रा लंबी, थकाऊ और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। विशेषकर चारधाम यात्रा सीजन के दौरान यात्रियों को भारी ट्रैफिक जाम, मानसून के समय होने वाली मूसलाधार बारिश और भूस्खलन (Landslide) जैसी प्राकृतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे कई बार यात्रा घंटों बाधित रहती है।


​प्रस्तावित योजना के तहत, दिल्ली-एनसीआर के श्रद्धालु नमो भारत रैपिड रेल के जरिए बेहद तेजी से ऋषिकेश पहुंचेंगे। इसके बाद, वे वहीं से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग के जरिए सीधे ट्रेन बदलकर कर्णप्रयाग तक जा सकेंगे। इस ‘डबल इंजन’ रेल व्यवस्था से पहाड़ों पर सड़क मार्ग से की जाने वाली यात्रा और उसका समय काफी हद तक कम हो जाएगा।

​समय का गणित: परियोजनाओं से पहले और पूरा होने के बाद

​इस महापरियोजना के धरातल पर उतरने के बाद यात्रा समय में करीब 7 घंटे की भारी बचत होने का अनुमान लगाया गया है। आइए समझते हैं कि सफर के समय में यह अभूतपूर्व बदलाव कैसे आएगा:

​वर्तमान स्थिति (सड़क मार्ग द्वारा):

  • ​दिल्ली से ऋषिकेश: लगभग 5 से 6 घंटे
  • ​ऋषिकेश से कर्णप्रयाग: सड़क मार्ग से लगभग 6 से 7 घंटे
  • ​कर्णप्रयाग से बदरीनाथ: लगभग 3 से 4 घंटे
  • ​कर्णप्रयाग से गौरीकुंड (केदारनाथ मार्ग): लगभग 5 से 6 घंटे

​परियोजनाएं पूरी होने के बाद (प्रस्तावित समय):

  • ​पहला चरण (दिल्ली से ऋषिकेश – नमो भारत): करीब 2.5 से 3 घंटे
  • ​दूसरा चरण (ऋषिकेश से कर्णप्रयाग – भारतीय रेलवे): रेल मार्ग से लगभग 2 घंटे
  • ​कुल समय की बचत: यात्रा के कुल समय में करीब 7 घंटे की सीधी बचत संभव होगी।

​ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना: देश की सबसे लंबी परिवहन सुरंग

​पहाड़ों पर दौड़ने वाली इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। इस परियोजना की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • ​कुल लंबाई: यह पूरी रेल लाइन 125 किलोमीटर लंबी है।
  • ​डेडलाइन: सरकार और रेलवे प्रशासन की कोशिश है कि वर्ष 2028 तक इस परियोजना का कार्य पूरा कर लिया जाए।
  • ​सुरंग और पुल: इंजीनियरिंग का यह बेजोड़ नमूना है, क्योंकि इस मार्ग का 80% से अधिक हिस्सा अंडरग्राउंड सुरंगों और पुलों से होकर गुजरेगा।
  • ​देश का रिकॉर्ड: इस परियोजना में 14.58 किलोमीटर लंबी परिवहन सुरंग का निर्माण किया जा रहा है, जो देश की सबसे लंबी परिवहन सुरंगों में से एक होगी।
  • ​प्रमुख रेलवे स्टेशन: इस रूट पर कुल सात मुख्य स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिनमें योगनगरी ऋषिकेश, शिवपुरी, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, गौचर और कर्णप्रयाग शामिल हैं।

​स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को मिलेगा बड़ा बूस्ट

​इस कनेक्टिविटी का लाभ केवल तीर्थयात्रियों तक ही सीमित नहीं रहेगा। पहाड़ों पर रेल पहुंचने और दिल्ली से सीधी रैपिड कनेक्टिविटी मिलने से उत्तराखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को एक नई दिशा मिलेगी। इससे स्थानीय व्यापार, होमस्टे, होटल उद्योग, परिवहन ऑपरेटरों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के हजारों नए अवसरों का सृजन होगा। पलायन की मार झेल रहे उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों के लिए यह कनेक्टिविटी एक संजीवनी की तरह काम कर सकती है।

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​कनेक्टिविटी को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता: सीएम धामी

​परियोजना के संबंध में आधिकारिक दृष्टिकोण साझा करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा:


​”राज्य के भीतर कनेक्टिविटी को सुदृढ़ और आधुनिक बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर शामिल है। नमो भारत रैपिड रेल और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल जैसी बड़ी और दूरगामी परियोजनाएं उत्तराखंड में तीर्थाटन, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को एक नई गति प्रदान करेंगी। इन परियोजनाओं के पूरी तरह स्थापित होने से चारधाम आने वाले देशभर के श्रद्धालुओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, साथ ही हमारे दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिकों का जीवन भी बेहद सुगम और समृद्ध होगा।”

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