देहरादून (दून प्राइम न्यूज़)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में गुरुवार को आयोजित उत्तराखंड मंत्रिमंडल की बैठक में राज्य के विकास और जनहित से जुड़े 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई।इस कैबिनेट बैठक में शिक्षा, रोजगार, पर्यटन, आबकारी, कृषि और पशुपालन जैसे विभिन्न विभागों से जुड़े नीतिगत निर्णयों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के दो सबसे बड़े फैसलों में उत्तराखंड को देश का ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ घोषित करना और लंबे समय से आंदोलनरत उपनल कर्मचारियों को वित्तीय लाभ के दायरे में लाने के लिए कटऑफ तिथि में बदलाव करना शामिल है।
बैठक की शुरुआत में दो मिनट का मौन, दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि
कैबिनेट बैठक की शुरुआत बेहद भावुक माहौल में हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और पद्मश्री से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज जसपाल राणा के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। मंत्रिमंडल ने दोनों दिवंगत विभूतियों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री खंडूड़ी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने प्रदेश के विकास, सुशासन और जनसेवा के क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान दिया, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा। वहीं, जसपाल राणा की खेल उपलब्धियों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने वैश्विक पटल पर उत्तराखंड और देश का मान बढ़ाया।
उत्तराखंड बना ‘पूर्ण साक्षर राज्य’: साक्षरता दर 98% पार
कैबिनेट का सबसे ऐतिहासिक फैसला उत्तराखंड को आधिकारिक तौर पर ‘पूर्ण साक्षर राज्य’ घोषित करने का रहा। सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर किए गए प्रयासों की बदौलत प्रदेश की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से अधिक के स्तर पर पहुंच चुकी है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के आधार पर कैबिनेट ने राज्य को पूर्ण साक्षर घोषित करने के प्रस्ताव को हरी झंडी दी। सरकार का मानना है कि इस घोषणा से राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड की साख मजबूत होगी और बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में चल रही योजनाओं को नया प्रोत्साहन मिलेगा।
उपनल कर्मचारियों को बड़ी राहत, कटऑफ तिथि में बदलाव
लंबे समय से ‘समान कार्य-समान वेतन’ और सेवा शर्तों में सुधार की मांग कर रहे उपनल (UPNL) कर्मचारियों के लिए कैबिनेट से बड़ी और राहत भरी खबर आई है। सरकार ने उपनल कर्मियों को वित्तीय और सेवा लाभ प्रदान करने के लिए निर्धारित पुरानी कटऑफ तिथि (12 नवंबर 2018) को संशोधित कर दिया है।
अब इस कटऑफ तिथि को बढ़ाकर 15 अगस्त 2024 कर दिया गया है। सरकार के इस संवेदनशील फैसले से विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत हजारों कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी लंबे समय से चली आ रही एक प्रमुख मांग पूरी होगी।
शिक्षा, बुनियादी ढांचे और व्यापार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण फैसले:
1. संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026 को मंजूरी
उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने ‘उत्तराखंड संस्कृत शिक्षा संशोधन नियमावली-2026’ को अपनी स्वीकृति दे दी है। इस नए संशोधन के लागू होने से राज्य के संस्कृत विद्यालयों की मान्यता देने की प्रक्रिया, पाठ्यक्रम के निर्धारण और परीक्षा संचालन की व्यवस्था में आवश्यक सुधार किए जाएंगे, जिससे पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था और अधिक प्रभावी व आधुनिक बनेगी।
2. लोक निर्माण विभाग: बिटुमेन की बढ़ती कीमतों पर मंथन
वैश्विक पटल और मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी युद्ध जनित परिस्थितियों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिटुमेन (डामर) की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल आया है। पीडब्ल्यूडी (PWD) के प्रस्ताव पर चर्चा करते हुए कैबिनेट ने माना कि इसका सीधा असर राज्य में चल रहे सड़क निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है।
इसके समाधान के लिए सरकार ने कीमतों के बेहतर प्रबंधन और निर्माण कार्यों की गति को प्रभावित होने से बचाने के लिए एक विशेष व्यवस्था और वित्तीय ढांचा तैयार करने का निर्णय लिया है।
3. आबकारी नीति में व्यापारियों को राहत
व्यापारियों और विभागीय प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए आबकारी विभाग के एक अहम प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। नए फैसले के अनुसार, बोतलों पर लगे होलोग्राम के दोहराव (Duplication) की स्थिति में अब संबंधित कारोबारियों पर दोबारा कर (Double Tax) नहीं लगाया जाएगा। ऐसी तकनीकी या व्यावहारिक परिस्थितियों में केवल एक बार ही टैक्स वसूला जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।
4. हर्बल और सगंध उत्पादों की जांच के लिए पांच नए पद
प्रदेश में कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सेलाकुई (देहरादून) स्थित ‘सगंध एवं हर्बल केंद्र’ (CAP) में मिलावट की जांच के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशाला और सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
इस कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए कैबिनेट ने पांच नए तकनीकी पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है, जिससे हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी और उनके निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
पर्यटन, कानून-व्यवस्था और पशुपालकों के लिए बड़े निर्णय:
5. अंतरराष्ट्रीय हिमालयन कार रैली को हरी झंडी
राज्य में साहसिक पर्यटन (Adventure Tourism) को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के उद्देश्य से पर्यटन विभाग के ‘अंतरराष्ट्रीय हिमालयन कार रैली’ के आयोजन से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस वैश्विक आयोजन में लगभग 50 अंतरराष्ट्रीय स्तर की कारों और चालकों के शामिल होने की संभावना है। इस तरह के आयोजनों से वैश्विक स्तर पर उत्तराखंड की ‘टूरिज्म ब्रांडिंग’ मजबूत होगी।
6. गृह विभाग: जेल प्रशासन और नियमावली में संशोधन
कानून-व्यवस्था और जेलों के प्रबंधन को आधुनिक बनाने की दिशा में गृह विभाग के दो प्रस्तावों को स्वीकार किया गया। इसके तहत ‘उत्तराखंड कारागार नियमावली’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं और ‘कारागार अधीनस्थ सेवा नियमावली’ को भी मंजूरी दी गई है, जिससे जेल प्रशासन और वहां तैनात कर्मचारियों की सेवा नियमावली अधिक व्यावहारिक और प्रभावी हो सकेगी।
7. राज्य आंदोलनकारियों और युवाओं को एक और विशेष अवसर
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा आयोजित कनिष्ठ सहायक तथा पुलिस कांस्टेबल भर्ती-2024 के उन अभ्यर्थियों को कैबिनेट ने बड़ी राहत दी है, जिन्हें प्रमाणपत्र (Certificates) बनने में हुई देरी के कारण दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
सरकार ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए दस्तावेज सत्यापन (Document Verification) के दौरान ऐसे युवाओं और राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों को एक बार के लिए विशेष अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया है।
8. चारधाम यात्रा: घोड़ा-खच्चरों के लिए बीमा सहायता
चारधाम यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाने के क्रम में पशुपालकों और स्थानीय ऑपरेटरों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए एक महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। यात्रा मार्ग पर संचालित होने वाले घोड़ा-खच्चरों के लिए सरकार 5 प्रतिशत बीमा दर के तहत आर्थिक सहायता राशि उपलब्ध कराएगी, जिससे किसी अप्रिय घटना या पशु की मृत्यु होने पर संचालकों को भारी नुकसान न उठाना पड़े।
9. पशुपालन क्षेत्र में ‘एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक’ का पायलट प्रोजेक्ट
ग्रामीण अर्थव्यवस्था और दुग्ध उत्पादन को रफ्तार देने के लिए पशुपालन विभाग के अंतर्गत ‘एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक’ (भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक) के माध्यम से उच्च गुणवत्ता वाले गौवंश के विकास के लिए एक पायलट परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस वैज्ञानिक तकनीक की मदद से राज्य में दूध देने वाले मवेशियों की नस्ल सुधरेगी, दुग्ध उत्पादन में भारी वृद्धि होगी और अंततः पशुपालकों की आय में सुधार होगा।





