Doon Prime News ब्यूरो, अमृतसर।
पंजाब के पवित्र शहर अमृतसर से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। यहाँ के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध गुरुद्वारा शहीद गंज बाबा दीप सिंह जी (शहीदां साहिब) में रविवार को एक बड़ा हादसा हो गया। गुरुद्वारा परिसर में निर्माणाधीन लंगर हॉल की छत की भारी-भरकम लोहे की प्लेटें अचानक ढहकर नीचे गिर गईं। इस दर्दनाक हादसे की चपेट में आने से वहाँ सेवा कर रहीं दो महिला श्रद्धालुओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच अन्य महिलाएं गंभीर रूप से घायल हो गईं। घटना के बाद से पूरे इलाके और सिख संगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?
स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, रविवार को गुरुद्वारा साहिब के नए बन रहे लंगर हॉल में रोजाना की तरह निर्माण और सेवा का कार्य चल रहा था। रविवार का दिन होने के कारण गुरुद्वारा परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी और बड़ी संख्या में महिलाएं लंगर हॉल में अपनी सेवाएं दे रही थीं।
तभी अचानक एक जोरदार आवाज के साथ निर्माणाधीन छत को सहारा देने वाली लोहे की भारी शटरिंग प्लेटें भरभरा कर नीचे आ गिरीं। प्लेटों का वजन इतना ज्यादा था कि नीचे काम कर रही महिलाओं को संभलने का मौका तक नहीं मिला। पल भर में ही सेवा का माहौल चीख-पुकार और दहशत में बदल गया। मलबे के नीचे कई महिलाएं दब गईं।
राहत और बचाव कार्य: श्रद्धालुओं ने दिखाई तत्परता
हादसा होते ही गुरुद्वारा परिसर में मौजूद अन्य सेवादारों और श्रद्धालुओं ने अभूतपूर्व तत्परता दिखाई। बिना वक्त गंवाए लोगों ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तुरंत राहत और बचाव कार्य (Rescue Operation) शुरू कर दिया। भारी लोहे की प्लेटों और मलबे को हटाकर नीचे दबी महिलाओं को बाहर निकाला गया।
घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। मलबे से निकाली गई सभी महिलाओं को तुरंत नजदीकी ‘श्री गुरु रामदास अस्पताल’ ले जाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, दो महिलाओं की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो चुकी थी, जबकि पांच घायलों का आपातकालीन वार्ड में इलाज चल रहा है।
अस्पताल में जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता को देखते हुए अमृतसर की वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अमनदीप कौर (Amandeep Kaur) तुरंत पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। हादसे के बाद बड़ी संख्या में पीड़ित परिवारों के लोग, स्थानीय नागरिक और श्रद्धालु अस्पताल परिसर में एकत्र हो गए थे, जिससे शुरुआत में डॉक्टरों को इलाज करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मीडिया से बात करते हुए पुलिस अधिकारी अमनदीप कौर ने बताया:
”हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। घायल महिलाओं के बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में डॉक्टरों की विशेष टीम तैनात है। शुरुआत में अस्पताल के भीतर भारी भीड़ जमा हो गई थी, जिससे चिकित्सा प्रक्रिया में बाधा आ रही थी। कानून-व्यवस्था और डॉक्टरों की सुविधा को देखते हुए पुलिस ने भीड़ को बाहर निकाला, ताकि घायलों को बिना किसी देरी के तुरंत और सही इलाज मिल सके।”
निर्माण कार्य में लापरवाही की होगी उच्च स्तरीय जांच
इस दर्दनाक हादसे ने गुरुद्वारा प्रबंधन और निर्माण कार्य कर रहे ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस बात को लेकर गहरा रोष है कि इतने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थल पर निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों (Safety Standards) का ध्यान क्यों नहीं रखा गया?
प्रशासन ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर अचानक लोहे की प्लेटें किस वजह से टूटीं। क्या शटरिंग कमजोर थी या फिर इस्तेमाल की जा रही निर्माण सामग्री की गुणवत्ता में कोई कमी थी?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल प्रशासन और गुरुद्वारा प्रबंधन का पूरा ध्यान घायल महिलाओं को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता प्रदान करने और उनकी जान बचाने पर केंद्रित है।
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इलाके में शोक और सन्नाटा
गुरुद्वारा शहीद गंज बाबा दीप सिंह जी (शहीदां साहिब) में हर दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु नतमस्तक होने और सेवा करने आते हैं। इस हादसे के बाद से न केवल अमृतसर बल्कि पूरे पंजाब में शोक का माहौल है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और विभिन्न धार्मिक व सामाजिक संगठनों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।









