इटावा। उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ लवेदी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धर्मपुरा गांव में शुक्रवार की दोपहर खुशियों और सहेलियों की हंसी-ठिठोली मातम में बदल गई।
भोगनीपुर नहर में नहाने गईं चार किशोरियां अचानक पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गईं।
स्थानीय ग्रामीणों की सूझबूझ और साहस से तीन लड़कियों को तो सकुशल बचा लिया गया, लेकिन एक 15 वर्षीय किशोरी अब भी लापता है। लापता किशोरी की तलाश के लिए पुलिस, गोताखोर और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमें जुटी हुई हैं।
कूड़ा डालने गई थीं सहेलियां, फिर बना नहाने का मन
मिली जानकारी के अनुसार, धर्मपुरा गांव के रहने वाले नरेश राजपूत की 15 वर्षीय पुत्री उपासना शुक्रवार दोपहर को अपनी सहेलियों—निधि, छाया और दीक्षा के साथ घर से खेतों की ओर गई थी। बताया जा रहा है कि सभी किशोरियां पास के खेतों में कूड़ा डालने गई थीं। काम खत्म करने के बाद भीषण गर्मी से राहत पाने के उद्देश्य से सभी सहेलियां पास ही बह रही भोगनीपुर नहर के किनारे पहुंच गईं और पानी में नहाने लगीं।
तेज बहाव बना काल, बचाने के चक्कर में चारों डूबीं
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के मुताबिक, शुक्रवार को भोगनीपुर नहर में पानी का जलस्तर काफी बढ़ा हुआ था और बहाव भी सामान्य से अधिक तेज था।
नहाते समय अचानक उपासना का संतुलन बिगड़ गया और वह गहरे पानी में समाने लगी। अपनी सहेली को डूबता देख निधि, छाया और दीक्षा ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन पानी का वेग इतना प्रचंड था कि देखते ही देखते चारों किशोरियां डूबने लगीं और चीख-पुकार मच गई।
ग्रामीण ओमकार सिंह बने ‘देवदूत’
इसी दौरान गांव के ही निवासी ओमकार सिंह पास से गुजर रहे थे। किशोरियों के डूबने की आवाज और शोर सुनकर वे तुरंत मौके पर पहुंचे। अपनी जान की परवाह न करते हुए उन्होंने नहर में छलांग लगा दी। कड़ी मशक्कत के बाद ओमकार सिंह ने निधि, छाया और दीक्षा को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, जब तक वे उपासना तक पहुँच पाते, वह पानी के तेज बहाव के साथ आगे बह गई और गहरे पानी में ओझल हो गई।
घटनास्थल पर उमड़ा जनसैलाब, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी
जैसे ही गांव में चार किशोरियों के डूबने की खबर फैली, सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण नहर की ओर दौड़ पड़े। सूचना मिलते ही लवेदी थाना प्रभारी निरीक्षक अनिल विश्वकर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने रस्सियों और लाठी-डंडों की मदद से अपने स्तर पर उपासना को खोजने का प्रयास शुरू किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीम को मौके पर बुलाया। घंटों की तलाश के बाद भी जब उपासना का कोई सुराग नहीं मिला, तो पुलिस ने सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों से संपर्क कर नहर का पानी कम कराने का आग्रह किया है, ताकि सर्च ऑपरेशन में तेजी लाई जा सके।
परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
हादसे के बाद से ही नरेश राजपूत के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी सन्नाटा पसरा हुआ है। बचाई गई तीनों किशोरियां भी इस हादसे के सदमे में हैं।
पुलिस और प्रशासन का बयान
प्रभारी निरीक्षक लवेदी अनिल विश्वकर्मा ने बताया, “घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई थी। तीन बच्चियों को ग्रामीणों की मदद से बचा लिया गया है, जो सुरक्षित हैं। चौथी किशोरी उपासना की तलाश के लिए जाल डाले गए हैं और गोताखोरों की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। नहर के पानी को कम कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। हमारी प्राथमिकता किशोरी को जल्द से जल्द ढूंढना है।”
सावधानी बरतने की अपील
मानसून से ठीक पहले और गर्मी के इस मौसम में अक्सर नहरों और नदियों का जलस्तर बढ़ जाता है। प्रशासन ने क्षेत्र के ग्रामीणों से अपील की है कि वे बच्चों को गहरे पानी या नहरों के किनारे अकेले न जाने दें। तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहाना जानलेवा साबित हो सकता है।
फिलहाल, पूरा प्रशासन और ग्रामीण टकटकी लगाए नहर की लहरों को देख रहे हैं, इस उम्मीद में कि उपासना का कोई सुराग मिल सके।








