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इटावा में सनसनी: भाभी की आत्महत्या के 12 घंटे बाद देवर ने भी चुना मौत का रास्ता, गांव में पसरा सन्नाटा

On: March 13, 2026 5:47 PM
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उत्तर प्रदेश के इटावा में पुलिस जांच और शोकाकुल ग्रामीणों का दृश्य

​इटावा, उत्तर प्रदेश।

उत्तर प्रदेश के इटावा जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों को झकझोर कर रख दिया है। जिले के भरेह थाना क्षेत्र के हरौली बहादुरपुर गांव में एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत से कोहराम मच गया है। रविवार रात जहाँ भाभी ने फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, वहीं इस घटना के महज 12 घंटे बाद देवर का शव भी पेड़ से लटका मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

​रविवार रात शुरू हुआ मौत का तांडव

​घटना की शुरुआत रविवार रात करीब 10 बजे हुई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, हरौली बहादुरपुर निवासी पिंकू दोहरे, जो मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण करता है, अपनी 28 वर्षीय पत्नी तारा के साथ रात का खाना खाकर बाहर टहलने निकला था। जब वह रात 11 बजे वापस लौटा, तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो पिंकू ने खिड़की से अंदर झांका। अंदर का दृश्य देखकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई; उसकी पत्नी तारा का शव फंदे से लटक रहा था।

​संतान सुख की कमी बनी वजह?

​मृतका तारा मूल रूप से कानपुर देहात के रसूलाबाद क्षेत्र की रहने वाली थी। पिंकू और तारा का विवाह छह साल पहले हुआ था। परिजनों के अनुसार, तारा ने शादी के बाद दो बच्चों को जन्म दिया था, लेकिन दुर्भाग्यवश दोनों बच्चों की अस्पताल में ही मृत्यु हो गई। इस हादसे के बाद से तारा गहरे मानसिक तनाव और अवसाद में रहने लगी थी। मायके पक्ष का भी कहना है कि संतान न होने के दुख और मानसिक ग्लानि के कारण वह अक्सर गुमसुम रहती थी। पुलिस की प्राथमिक जांच में यही बात सामने आ रही है कि इसी मानसिक पीड़ा के चलते उसने आत्मघाती कदम उठाया।

​12 घंटे बाद देवर ने भी दे दी जान

​अभी परिवार तारा की मौत के सदमे से उबर भी नहीं पाया था और उसका शव पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचने की तैयारी में ही था कि सोमवार दोपहर एक और भयानक खबर आई। तारा के देवर अंकित (22) ने गांव के बाहर यमुना नदी के किनारे एक बबूल के पेड़ पर रस्सी का फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। अंकित अपने सात भाइयों में पांचवें नंबर का था। एक ही घर में 12 घंटे के भीतर हुई इन दो मौतों ने पूरे गांव को सुन्न कर दिया है।

​गांव में चर्चाओं का बाजार गर्म

​हालांकि पुलिस इस मामले को घरेलू कलह और मानसिक तनाव से जोड़कर देख रही है, लेकिन ग्रामीणों के बीच कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। गांव में चर्चा है कि भाभी की मौत के बाद अंकित शायद कानूनी कार्रवाई या ‘दहेज एक्ट’ के तहत जेल जाने के डर से घबरा गया था। पुलिस इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है कि आखिर अंकित ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया।

​पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई

​घटना की सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष जगदीश भाटी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने अंकित के शव को पेड़ से उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थानाध्यक्ष ने बताया कि तारा के मायके वालों ने किसी पर भी कोई आरोप नहीं लगाया है और न ही कोई तहरीर दी है।

​इटावा के एसएसपी बृजेश कुमार श्रीवास्तव ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा, “प्रथम दृष्टया यह मामला पारिवारिक कलह और मानसिक अवसाद का प्रतीत होता है। भाभी की मौत के बाद देवर द्वारा उठाए गए इस कदम के पीछे की असल वजह क्या है, इसकी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी।”

​गहरे सदमे में परिवार

​एक ही आंगन से दो अर्थियां उठने की खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है। पिंकू दोहरे के घर में जहाँ कल तक सामान्य जीवन था, आज वहां सिर्फ चीख-पुकार और सन्नाटा है। समाजशास्त्रियों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ते मानसिक तनाव और उचित काउंसलिंग की कमी को दर्शाती हैं।

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​निष्कर्ष

​इटावा की यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि किस तरह मानसिक दुख और कानूनी डर इंसानी दिमाग पर हावी हो सकता है। फिलहाल, पूरा हरौली बहादुरपुर गांव इस दोहरे दुख में डूबा हुआ है और पुलिस मामले के हर पहलू को सुलझाने में जुटी है।

​मुख्य बिंदु (SEO के लिए उपयोगी):

  • ​स्थान: हरौली बहादुरपुर, भरेह, इटावा।
  • ​मृतक: तारा (28 वर्ष) और अंकित (22 वर्ष)।
  • ​कारण: संतान न होने का दुख और संभावित कानूनी भय।
  • ​पुलिस जांच: पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, घरेलू कलह का कोण।

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