नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी तनाव और युद्ध की स्थितियों ने अब वैश्विक स्तर पर आम आदमी की जेब पर असर डालना शुरू कर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और जेट फ्यूल (ATF) के दामों में हुए बेतहाशा इजाफे के कारण देश की प्रमुख एयरलाइन एअर इंडिया (Air India) ने अपने फ्यूल सरचार्ज में बढ़ोतरी का बड़ा फैसला लिया है। एयरलाइन के इस कदम से घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में भारी वृद्धि होने जा रही है।
जेट फ्यूल की कीमतों में 100% का उछाल
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के हालिया आंकड़ों ने एयरलाइन इंडस्ट्री की चिंताएं बढ़ा दी हैं। 27 मार्च को समाप्त हुए सप्ताह तक जेट फ्यूल की औसत वैश्विक कीमत 195.19 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गई है। गौर करने वाली बात यह है कि फरवरी माह में यह कीमत महज 99.40 डॉलर प्रति बैरल थी। यानी मात्र एक महीने के भीतर ईंधन की कीमतों में लगभग 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी भारी लागत दबाव को देखते हुए एअर इंडिया को अपने किराये में संशोधन करने पर मजबूर होना पड़ा है।
घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर कितना बढ़ेगा बोझ?
एअर इंडिया द्वारा लागू किए गए नए फ्यूल सरचार्ज के बाद टिकटों की कीमतों में निम्नलिखित बदलाव देखने को मिलेंगे:
- घरेलू उड़ानें (Domestic Flights): भारत के भीतर यात्रा करने वाले यात्रियों को अब प्रति टिकट 299 रुपये से लेकर 899 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना होगा। एयरलाइन ने इसके लिए एक ‘दूरी-आधारित ग्रिड सिस्टम’ लागू किया है, जिसके तहत सफर जितना लंबा होगा, सरचार्ज उतना ही अधिक लगेगा।
- अंतरराष्ट्रीय उड़ानें (International Flights): विदेश यात्रा करने वालों के लिए यह झटका काफी बड़ा है। अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर टिकटों के दाम 2,200 रुपये से लेकर 26,000 रुपये तक बढ़ जाएंगे। सबसे अधिक बढ़ोतरी यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे लंबी दूरी के रूट्स पर देखने को मिलेगी।
कब से लागू होंगी नई दरें?
एअर इंडिया ने स्पष्ट किया है कि सरचार्ज में यह बदलाव अलग-अलग चरणों में प्रभावी होगा:
- ज्यादातर रूट्स पर: नए दाम 8 अप्रैल, 2026 (बुधवार) से प्रभावी हो जाएंगे।
- लंबी दूरी के रूट्स: यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जाने वाली उड़ानों के लिए बदला हुआ सरचार्ज 10 अप्रैल, 2026 से लागू होगा।
सरकार और मंत्रालयों का संतुलित दृष्टिकोण
एयरलाइन के अनुसार, कीमतों में बढ़ोतरी का यह फैसला पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। सरकार ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए घरेलू एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में बढ़ोतरी को 25 प्रतिशत तक सीमित रखने का प्रयास किया है।
हालांकि, एअर इंडिया का कहना है कि यह सरचार्ज जेट फ्यूल की कीमतों में हुई वास्तविक बढ़ोतरी को पूरी तरह कवर नहीं करता है। कंपनी अभी भी लागत के एक बड़े हिस्से का बोझ खुद उठा रही है ताकि यात्रियों पर अचानक बहुत अधिक भार न पड़े।
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अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव
घरेलू उड़ानों की तुलना में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए में अधिक वृद्धि इसलिए की गई है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय एटीएफ (ATF) की कीमतों पर कोई सरकारी सीमा या लिमिट नहीं है। वैश्विक बाजार में ईंधन की अस्थिरता का सीधा असर लंबी दूरी की उड़ानों पर पड़ रहा है।
एविएशन सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले समय में अन्य एयरलाइंस भी एअर इंडिया की राह पर चलते हुए अपने किराये में बढ़ोतरी कर सकती हैं। गर्मियों की छुट्टियों के सीजन से ठीक पहले हुई इस बढ़ोतरी ने उन परिवारों के बजट को बिगाड़ दिया है जो विदेश यात्रा की योजना बना रहे थे।









