नई दिल्ली: आगामी राज्यसभा द्विवार्षिक चुनावों को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इसी क्रम में कांग्रेस आलाकमान ने अपने उम्मीदवारों की बहुप्रतीक्षित सूची जारी कर दी है। पार्टी ने इस बार अनुभव और क्षेत्रीय समीकरणों का संतुलन बनाने की कोशिश की है। सूची में सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी से लेकर छत्तीसगढ़ की कद्दावर आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम तक कई बड़े नामों को जगह दी गई है।
तेलंगाना: सिंघवी और रेड्डी पर भरोसा
कांग्रेस ने तेलंगाना की दो महत्वपूर्ण सीटों के लिए अपनी रणनीति साफ कर दी है। पार्टी ने राज्यसभा के अनुभवी सदस्य और देश के जाने-माने कानूनविद अभिषेक मनु सिंघवी को एक बार फिर से मैदान में उतारा है। सिंघवी की उम्मीदवारी को पार्टी के लिए विधायी और कानूनी मोर्चे पर मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है।
वहीं, तेलंगाना से दूसरे उम्मीदवार के रूप में वेम नरेंद्र रेड्डी के नाम की घोषणा की गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के करीबी सलाहकार होने के नाते वेम नरेंद्र रेड्डी का चयन राज्य में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बिठाने की कवायद है। 16 मार्च को होने वाले मतदान में इन दोनों ही चेहरों की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़: आदिवासी कार्ड और फूलो देवी की वापसी
छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपनी पैठ मजबूत बनाए रखने के लिए कांग्रेस ने फूलो देवी नेताम को राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। फूलो देवी का चयन न केवल उनकी वरिष्ठता को दर्शाता है, बल्कि राज्य के बड़े आदिवासी वोट बैंक को साधने की एक सोची-समझी रणनीति भी है। बस्तर क्षेत्र में उनकी सक्रियता और पकड़ पार्टी के लिए भविष्य के चुनावों में भी फायदेमंद साबित हो सकती है।
हरियाणा और हिमाचल: दलित और युवा चेहरों को तरजीह
हरियाणा में पार्टी ने करमवीर सिंह बौद्ध पर दांव लगाया है। दलित समुदाय से आने वाले बौद्ध लंबे समय से जमीन पर पार्टी की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। उन्हें टिकट देकर कांग्रेस ने राज्य में सोशल इंजीनियरिंग का संदेश देने की कोशिश की है।
दूसरी ओर, हिमाचल प्रदेश से अनुराग शर्मा को उम्मीदवार बनाया गया है। अनुराग पार्टी के उन युवा और ऊर्जावान चेहरों में शामिल हैं, जो राज्य की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। युवाओं को प्रतिनिधित्व देकर कांग्रेस आलाकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह नई पीढ़ी के नेतृत्व को तैयार करने के पक्ष में है।
दक्षिण भारत: तमिलनाडु से क्रिस्टोफर तिलक को मौका
दक्षिण भारत में अपनी उपस्थिति को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कांग्रेस ने तमिलनाडु से एम. क्रिस्टोफर तिलक को अपना प्रत्याशी बनाया है। तिलक की छवि एक समर्पित कार्यकर्ता की रही है और उनके चयन से पार्टी कैडर में सकारात्मक संदेश जाने की उम्मीद है।
चुनावी समीकरण और आगामी चुनौतियां
16 मार्च को होने वाले इन चुनावों में कुल 37 सीटों पर मतदान होना है। कांग्रेस के लिए ये चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके नतीजों का सीधा असर संसद के उच्च सदन में पार्टी की ताकत और विपक्षी एकता की धार पर पड़ेगा।
मुख्य बिंदु:
- अभिषेक मनु सिंघवी: अनुभवी विधिवेत्ता और तेलंगाना से उम्मीदवार।
- फूलो देवी नेताम: छत्तीसगढ़ में आदिवासी नेतृत्व का चेहरा।
- सोशल इंजीनियरिंग: दलित और युवा चेहरों को प्राथमिकता।
- रणनीति: 16 मार्च को होने वाले मतदान में अधिकतम सीटें जीतने का लक्ष्य।
कांग्रेस की इस सूची से स्पष्ट है कि पार्टी आलाकमान ने राज्यों की स्थानीय राजनीति, जातीय समीकरण और राष्ट्रीय स्तर पर बौद्धिक क्षमता, तीनों का विशेष ध्यान रखा है। अब देखना यह होगा कि विपक्षी खेमे की क्या प्रतिक्रिया रहती है और यह नई टीम राज्यसभा में कांग्रेस के एजेंडे को कितनी मजबूती से आगे बढ़ाती है।
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