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उत्तराखंड: सीएम धामी ने 9.57 लाख पेंशनभोगियों के खातों में भेजे 141.91 करोड़, ‘वन क्लिक’ से हुआ भुगतान

On: March 2, 2026 6:58 AM
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उत्तराखंड पेंशन योजना की धनराशि डिजिटल रूप से जारी करते हुए।

देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में रविवार का दिन उत्तराखंड के लाखों परिवारों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान राज्य के 9.57 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए ₹141.91 करोड़ की विशाल पेंशन धनराशि को ‘वन-क्लिक’ के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में डिजिटल रूप से हस्तांतरित किया। यह धनराशि फरवरी 2026 की मासिक किस्त के साथ-साथ कई लाभार्थियों के लंबित एरियर भुगतान के रूप में जारी की गई है। होली के त्यौहार से ठीक पहले सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को प्रदेश के बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्पष्ट रूप से कहा कि सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की संवेदनशीलता और समाज के प्रति उसके उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि राज्य का कोई भी पात्र व्यक्ति, चाहे वह कितनी ही दुर्गम परिस्थितियों में क्यों न रह रहा हो, इन कल्याणकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए।
इस वित्तीय वितरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी पारदर्शिता और लाभार्थियों का विस्तृत दायरा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वृद्धावस्था पेंशन के तहत राज्य के 5,93,184 बुजुर्गों को ₹88.97 करोड़ की राशि प्रदान की गई है, जो इस वितरण का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसी प्रकार, विधवा पेंशन योजना के अंतर्गत 2,31,593 महिलाओं को ₹34.73 करोड़ और दिव्यांग पेंशन के माध्यम से 87,477 लाभार्थियों को ₹13.12 करोड़ की सहायता दी गई है। सरकार ने किसानों और अन्य विशिष्ट श्रेणियों का भी पूरा ध्यान रखा है, जिसके तहत 27,638 किसानों को ₹3.31 करोड़, 8,096 परित्यक्ता महिलाओं को ₹0.97 करोड़ और 7,409 लोगों को भरण-पोषण अनुदान के रूप में ₹0.51 करोड़ हस्तांतरित किए गए। इसके अतिरिक्त, तीलू रौतेली पेंशन योजना के 2,125 लाभार्थियों को ₹0.25 करोड़ और बौना पेंशन के पात्र 129 लोगों को ₹0.01 करोड़ की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए शिविरों के अत्यंत उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इन शिविरों के कारण ही प्रशासन उन पात्र लोगों तक पहुँचने में सफल रहा है, जो जानकारी के अभाव या शारीरिक अक्षमता के कारण पहले योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे थे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस तरह के विशेष अभियान, विशेषकर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में, निरंतर जारी रखे जाने चाहिए ताकि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सामाजिक सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने विभाग को नवाचार और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि एक ऐसी प्रभावी कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत की जाए जिससे पेंशन प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध हो सके।
प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री ने सचिव श्रीधर बाबू और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में पेंशन के मामलों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर हो। उन्होंने तकनीक के अधिकतम उपयोग की वकालत करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार की किसी भी गुंजाइश को खत्म करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि जिन क्षेत्रों में बैंकिंग नेटवर्क की समस्या है, वहां वैकल्पिक माध्यमों से सहायता पहुँचाने की व्यवस्था की जाए। सरकार का विजन आगामी महीनों में सरकारी सेवाओं को पूरी तरह से पेपरलेस बनाने और ‘डोरस्टेप डिलीवरी’ मॉडल को लागू करने का है, ताकि जरूरतमंदों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। अंततः, यह ₹141 करोड़ से अधिक की धनराशि न केवल लाभार्थियों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करेगी, बल्कि राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक प्रवाह सुनिश्चित करेगी।

देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में रविवार का दिन उत्तराखंड के लाखों परिवारों के लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक गरिमामयी कार्यक्रम के दौरान राज्य के 9.57 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए ₹141.91 करोड़ की विशाल पेंशन धनराशि को ‘वन-क्लिक’ के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में डिजिटल रूप से हस्तांतरित किया। यह धनराशि फरवरी 2026 की मासिक किस्त के साथ-साथ कई लाभार्थियों के लंबित एरियर भुगतान के रूप में जारी की गई है। होली के त्यौहार से ठीक पहले सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को प्रदेश के बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए एक बड़ा आर्थिक संबल माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्पष्ट रूप से कहा कि सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना केवल एक प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की संवेदनशीलता और समाज के प्रति उसके उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि राज्य का कोई भी पात्र व्यक्ति, चाहे वह कितनी ही दुर्गम परिस्थितियों में क्यों न रह रहा हो, इन कल्याणकारी योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए।
इस वित्तीय वितरण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसकी पारदर्शिता और लाभार्थियों का विस्तृत दायरा है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वृद्धावस्था पेंशन के तहत राज्य के 5,93,184 बुजुर्गों को ₹88.97 करोड़ की राशि प्रदान की गई है, जो इस वितरण का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसी प्रकार, विधवा पेंशन योजना के अंतर्गत 2,31,593 महिलाओं को ₹34.73 करोड़ और दिव्यांग पेंशन के माध्यम से 87,477 लाभार्थियों को ₹13.12 करोड़ की सहायता दी गई है। सरकार ने किसानों और अन्य विशिष्ट श्रेणियों का भी पूरा ध्यान रखा है, जिसके तहत 27,638 किसानों को ₹3.31 करोड़, 8,096 परित्यक्ता महिलाओं को ₹0.97 करोड़ और 7,409 लोगों को भरण-पोषण अनुदान के रूप में ₹0.51 करोड़ हस्तांतरित किए गए। इसके अतिरिक्त, तीलू रौतेली पेंशन योजना के 2,125 लाभार्थियों को ₹0.25 करोड़ और बौना पेंशन के पात्र 129 लोगों को ₹0.01 करोड़ की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कार्यक्रम के दौरान इस बात पर विशेष बल दिया कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लगाए गए शिविरों के अत्यंत उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। इन शिविरों के कारण ही प्रशासन उन पात्र लोगों तक पहुँचने में सफल रहा है, जो जानकारी के अभाव या शारीरिक अक्षमता के कारण पहले योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे थे। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस तरह के विशेष अभियान, विशेषकर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में, निरंतर जारी रखे जाने चाहिए ताकि अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सामाजिक सुरक्षा का लाभ सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने विभाग को नवाचार और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि एक ऐसी प्रभावी कार्ययोजना शीघ्र प्रस्तुत की जाए जिससे पेंशन प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध हो सके।
प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री ने सचिव श्रीधर बाबू और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की और यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में पेंशन के मामलों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर हो। उन्होंने तकनीक के अधिकतम उपयोग की वकालत करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार की किसी भी गुंजाइश को खत्म करने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को और अधिक सुदृढ़ बनाया जाए। बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि जिन क्षेत्रों में बैंकिंग नेटवर्क की समस्या है, वहां वैकल्पिक माध्यमों से सहायता पहुँचाने की व्यवस्था की जाए। सरकार का विजन आगामी महीनों में सरकारी सेवाओं को पूरी तरह से पेपरलेस बनाने और ‘डोरस्टेप डिलीवरी’ मॉडल को लागू करने का है, ताकि जरूरतमंदों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। अंततः, यह ₹141 करोड़ से अधिक की धनराशि न केवल लाभार्थियों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद करेगी, बल्कि राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी सकारात्मक प्रवाह सुनिश्चित करेगी।

यह भी पढ़ें- ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’: इजरायल-अमेरिकी मिसाइल हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत,तेहरान में भारी तबाही

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