चकराता तहसील क्षेत्र के जौनसार-बावर इलाके में आग की एक बड़ी घटना सामने आई है। बमटाड़ पट्टी के अंतर्गत आने वाले अष्टाड गांव में स्थित एक सेब के बगीचे में अचानक आग लगने से किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस हादसे में किसान ब्रह्मदत्त जोशी के लगभग 300 सेब के पेड़ पूरी तरह जलकर राख हो गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्टाड–मंगरौली मार्ग के किनारे सड़क से सटी घास की पट्टी में आग लगी थी। शुष्क मौसम और तेज हवाओं के चलते आग ने तेजी से फैलते हुए सड़क पार की और पास ही स्थित सेब के बगीचे को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।
ग्रामीणों ने तत्काल मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, पानी की कमी और सीमित संसाधनों के कारण आग पर समय रहते नियंत्रण नहीं पाया जा सका। आग की लपटों में सेब के सैकड़ों पेड़ जलकर नष्ट हो गए।
पीड़ित किसान ब्रह्मदत्त जोशी ने बताया कि उन्होंने और उनके परिवार ने पिछले पांच से छह वर्षों से कड़ी मेहनत कर इस सेब के बगीचे को तैयार किया था। यह बगीचा उनके परिवार की आजीविका का मुख्य साधन था, लेकिन इस आग ने उनकी वर्षों की मेहनत और उम्मीदों को एक झटके में खत्म कर दिया। उन्होंने बताया कि इस घटना से उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई है।
घटना की सूचना मिलने पर क्षेत्रीय पटवारी मौके पर पहुंचे और नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया। प्रारंभिक रिपोर्ट में लगभग 300 सेब के पेड़ों के नुकसान की पुष्टि की गई है। हालांकि, पीड़ित बागवान को अब तक किसी प्रकार की सरकारी सहायता या बीमा मुआवजे को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिल पाया है।
गौरतलब है कि जौनसार-बावर क्षेत्र में बागवानी किसानों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इस तरह की घटनाएं किसानों की आर्थिक स्थिति को गहरे संकट में डाल देती हैं। स्थानीय ग्रामीणों और बागवानों ने प्रशासन से सड़क किनारे घास की पट्टियों की नियमित सफाई कराने, आग से बचाव के लिए जागरूकता अभियान चलाने और प्रभावित किसान को शीघ्र मुआवजा प्रदान करने की मांग की है।






