उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (यूईआरसी) ने राज्य में बिजली टैरिफ को लेकर एक अहम फैसला लिया है। अब बिजली की दरें सोलर और नॉन-सोलर आवर्स के आधार पर तय की जाएंगी। इस नई व्यवस्था के तहत सोलर आवर्स के दौरान उपभोक्ताओं को कम से कम 20 प्रतिशत सस्ती बिजली मिलेगी, जबकि पीक आवर्स में बिजली की कीमत बढ़ेगी। इस फैसले को ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है।
आयोग का यह निर्णय केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप है, जिनमें प्रत्येक राज्य को दिन के आठ घंटे “सोलर आवर्स” घोषित करना अनिवार्य किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, इन सोलर आवर्स में बिजली की दर सामान्य टैरिफ से न्यूनतम 20 प्रतिशत कम रखी जाएगी। वहीं, पीक आवर्स के दौरान वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ सामान्य दर से कम से कम 1.20 गुना और अन्य श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए 1.10 गुना तय किया जाएगा।
यह स्पष्ट किया गया है कि यह बदलाव केवल ऊर्जा शुल्क (एनर्जी चार्ज) पर लागू होगा, फिक्स्ड चार्ज में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। फिलहाल आयोग ने किसी नई दर की घोषणा नहीं की है। अंतिम टैरिफ का निर्धारण स्मार्ट मीटर से मिलने वाले वास्तविक बिजली खपत के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा, जिससे दरें अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी होंगी।
इस प्रस्ताव से संकेत मिलता है कि आने वाले समय में उत्तराखंड में दिन के समय, खासकर जब सौर ऊर्जा का उत्पादन अधिक होगा, तब बिजली सस्ती होगी। वहीं, शाम या अधिक मांग वाले पीक समय में बिजली महंगी पड़ेगी। इससे उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत की आदतें बदलने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
आयोग का मानना है कि इस पहल से राज्य की बिजली खरीद लागत में कमी आएगी, ग्रिड की स्थिरता बेहतर होगी और सौर ऊर्जा के अधिकतम उपयोग को बढ़ावा मिलेगा। इस प्रस्ताव पर आयोग ने 31 जनवरी 2026 तक आम जनता और हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद सभी पहलुओं पर विचार कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा और नया सोलर-आधारित टैरिफ ढांचा लागू किया जाएगा।








