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देहरादून में सरकारी जमीनों की हकीकत उजागर: यू–सैक के सैटेलाइट सर्वे में सामने आई विस्तृत रिपोर्ट, अवैध कब्जों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी

On: November 29, 2025 5:48 AM
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देहरादून नगर निगम क्षेत्र में सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति अब पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट हो गई है। उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यू–सैक) द्वारा किए गए गोपनीय सैटेलाइट सर्वे ने शहर की जमीनों की श्रेणी, प्रकृति और उपयोग की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत की है। नगर निगम के सभी 100 वार्डों और नए शामिल 72 गांवों में किए गए इस सर्वे में कई ऐसी जमीनें चिन्हित हुई हैं, जिन पर वर्षों से कब्जे की आशंका थी या जिनका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
यू–सैक की ओर से तैयार की गई उच्च-रिज़ोल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी रिपोर्ट अब नगर निगम के भूमि अनुभाग को सौंप दी गई है, जिसके आधार पर फील्ड में जाकर भौतिक सत्यापन शुरू किया जाएगा। यह पहली बार है जब देहरादून नगर निगम अपने संपूर्ण क्षेत्र की जमीनों का इतना पारदर्शी और सटीक डेटा हाथ में लेकर काम कर रहा है।
कैसे किया गया सर्वे?
नगर निगम और यू–सैक के बीच हुए समझौते के बाद सर्वे को अत्यंत गोपनीय तरीके से पूरा किया गया।
बिना किसी पूर्व सूचना के किए गए इस सर्वे में—
• नदी और नाले क्षेत्र
• ढलान व ढांग
• खाले क्षेत्र
• बंजर भूमि
• जंगल–झाड़ी श्रेणी
• खाली तथा कब्जा-मुक्त भूखंड
सभी को स्पष्ट रूप से श्रेणीबद्ध किया गया है।
हर भू-भाग की लोकेशन, जमीन का प्रकार, उसका प्राकृतिक स्वरूप और भविष्य में संभावित उपयोग तक का विवरण रिपोर्ट में दर्ज है। अब निगम की टीम जमीन पर उतरकर अंतिम सत्यापन कर रही है, ताकि रिकॉर्ड बिल्कुल त्रुटिहीन हो सके।
देहरादून का पहला पारदर्शी ‘लैंड बैंक’ तैयार होगा
सर्वे के आधार पर नगर निगम पहली बार एक आधिकारिक लैंड बैंक तैयार कर रहा है, जिसमें शहर की समस्त सरकारी भूमि का पूरा डेटा संरक्षित होगा। वर्षों से सही रिकॉर्ड न होने के कारण कई सरकारी योजनाएं अटकी हुई थीं।
लैंड बैंक बनने के बाद—
• नगर निगम की विकास परियोजनाओं को जमीन आसानी से मिलेगी
• वेंडिंग ज़ोन, पार्क, सामुदायिक सुविधाओं जैसी योजनाओं में तेजी आएगी
• अवैध कब्जों और पुराने अतिक्रमणों पर कार्रवाई आसान होगी
• नए क्षेत्रों में ग्राम समाज की जमीनों के स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे
सैटेलाइट इमेज में पूरी तस्वीर साफ
यू–सैक की सर्वे रिपोर्ट में यह स्पष्ट दिख रहा है कि—
• कहां कितना भूखंड खाली है
• कहां संभावित अवैध कब्जा है
• कौन-सी जमीन सरकारी है और कौन-सी निजी
• भूमि का वास्तविक स्वरूप क्या है
• किस जमीन का भविष्य में किस उद्देश्य से उपयोग हो सकता है
सटीक डेटा होने से नगर निगम को पहली बार अपने क्षेत्र का जमीन आधारित डिजिटल मैप मिल गया है, जिसकी मदद से भविष्य की योजना निर्माण आसान होगा।
डालनवाला में मिली सबसे बड़ी सरकारी जमीन
सर्वे की सबसे विशेष खोज डालनवाला क्षेत्र रहा, जहां 48 हेक्टेयर से अधिक सरकारी भूमि चिन्हित हुई है।
इनमें—
• मोहिनी रोड
• इंदर रोड
• चंदर रोड
• तेगबहादुर रोड
• बलवीर रोड
जैसे क्षेत्रों की जमीनें शामिल हैं, जिन पर निगम अब अलग से जांच करेगा।
इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों में महत्वपूर्ण सरकारी भूमि का पता चला है:
• आरकेडिया क्षेत्र: 6.790 हेक्टेयर
• मोथरोवाला: नदी श्रेणी की 43.57 हेक्टेयर भूमि
• कुठाल गांव: 2.90 हेक्टेयर
• नकरौंदा: 4.83 हेक्टेयर
• डांडा लखौंड: 0.1940 हेक्टेयर
यह डेटा नगर निगम के लिए अतिक्रमण हटाने और भविष्य की योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।
पुराने कब्जों पर कठोर कार्रवाई का आधार बनेगी रिपोर्ट
कई नए क्षेत्रों के नगर निगम में शामिल होने के बाद भूमि रिकॉर्ड स्पष्ट नहीं थे, जिस कारण सही जानकारी के अभाव में अतिक्रमण बढ़ते गए।
अब यू–सैक की रिपोर्ट के आधार पर:
• पुराने विवादित भूखंडों की पहचान
• अवैध निर्माण पर रोक
• सरकारी भूमि की सुरक्षा
• नियोजित शहरी विकास
सभी में गति आएगी।
देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने बताया कि यह सर्वे न केवल नगर निगम के लिए, बल्कि शहर के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

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