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देहरादून: वकीलों की हड़ताल जारी, सीएम से मुलाकात के बाद भी नहीं बनी बात; आज डीएम करेंगे वार्ता

On: November 17, 2025 7:13 AM
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देहरादून में अधिवक्ताओं की हड़ताल फिलहाल खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं। चेंबर निर्माण की मांग को लेकर वकीलों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को अधिवक्ता प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अपनी समस्याएं और मांगें रखीं। सीएम ने उनकी बात सुनकर जिलाधिकारी को वकीलों से बातचीत कर समाधान निकालने के निर्देश दिए। इसके तहत आज डीएम अधिवक्ताओं से वार्ता करेंगे, लेकिन बार एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि सिर्फ बातचीत या आश्वासन से अब हड़ताल नहीं रुकेगी।

अधिवक्ताओं का कहना है कि वे कई दिनों से न्यायालय परिसर में चेंबर निर्माण के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग कर रहे हैं। मौजूदा स्थिति यह है कि नए न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं को जो जमीन चेंबर निर्माण के लिए आवंटित की गई है, उसमें सिर्फ एक हजार अधिवक्ताओं के बैठने की व्यवस्था ही हो सकेगी। जबकि देहरादून बार के अंतर्गत पांच हजार से अधिक वकील काम कर रहे हैं। इसके अलावा पांच हजार से ज्यादा स्टांप वेंडर, मुंशी और अन्य स्टाफ भी रोज न्यायालय परिसर में मौजूद रहते हैं। हर दिन 20 से 25 हजार वादकारी और उनके परिजन कचहरी पहुंचते हैं, जिनके बैठने के लिए भी पर्याप्त स्थान नहीं है।

इसी बीच बार एसोसिएशन ने हड़ताल का समय प्रतिदिन बढ़ाने की रणनीति बनाई है। पहले दिन हड़ताल एक घंटे की थी, जिसे हर दिन बढ़ाया गया। अब वकील हर रोज आधा-आधा घंटा समय बढ़ाकर आंदोलन को और लंबा कर रहे हैं। सोमवार को हड़ताल शाम तीन बजे तक रहेगी और मंगलवार को साढ़े तीन बजे तक। इसके बाद धीरे-धीरे पूरे दिन की हड़ताल फिर से शुरू की जाएगी।

वकीलों का यह भी कहना है कि इस बार आंदोलन केवल आश्वासन पर वापस नहीं लिया जाएगा। उनकी मांगों पर स्पष्ट और ठोस निर्णय चाहिए। बार की ओर से अब रजिस्ट्रार कार्यालयों को भी बंद कराने की तैयारी की जा रही है। शनिवार को बार काउंसिल के आह्वान पर प्रदेशभर में वकीलों ने पूर्ण हड़ताल की, जिसके चलते कचहरियों में पूरा दिन कामकाज ठप रहा।

रविवार को राज्यसभा सांसद नरेश बंसल के नेतृत्व में बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनमोहन कंडवाल, सचिव राजबीर सिंह बिष्ट सहित अन्य पदाधिकारी मुख्यमंत्री से मिले। उन्होंने सीएम को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि पुराना न्यायालय भवन अब दून अस्पताल को आवंटित कर दिया गया है, जो कचहरी से काफी दूर है। ऐसे में यह निर्णय अधिवक्ताओं और वादकारियों दोनों के हित में नहीं है।

फिलहाल सभी की निगाहें सोमवार को होने वाली डीएम और वकीलों की बैठक पर टिकी हैं। हालांकि अधिवक्ता संकेत दे चुके हैं कि बिना ठोस निर्णय के आंदोलन वापस लेना संभव नहीं है।

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