अल्मोड़ा में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के खिलाफ चल रहा “ऑपरेशन स्वास्थ्य” आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। 24 दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों ने शुक्रवार को देहरादून कूच पदयात्रा की शुरुआत की। आंदोलन का नेतृत्व भुवन कठायत कर रहे हैं, जिनके साथ मातृशक्ति, युवा और बुजुर्गों की बड़ी संख्या सड़कों पर उतर आई। सुबह आरती घाट से निकली यह यात्रा गगनभेदी नारों — “स्वास्थ्य सेवाएं बहाल करो”, “डॉक्टर दो-अस्पताल बचाओ”, “धामी सरकार होश में आओ” — से गूंज उठी।
शहर में हुई विशाल रैली में लोगों का सैलाब उमड़ा और प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ तीखे नारे लगाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और उग्र रूप लेगा। रैली के बाद पदयात्रा जमणियां-रामपुर होते हुए गैरसैंण के लिए रवाना हुई, जहां रात्रि पड़ाव होगा।
भुवन कठायत के नेतृत्व में इस रैली में पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी, उपपा के पीसी तिवारी, जीवन नेगी, पूर्व प्रमुख मीना कांडपाल, गीता कठायत, दान सिंह कुमयां, कैलाश पांडे, नंदन मेहरा, संतोषी वर्मा, कांता रावत सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
आरती घाट पर आमरण अनशन भी 23वें दिन जारी है। बुधवार को नारायण मेहरा पांचवें दिन और प्रधान मनोहर दत्त देवतला दूसरे दिन भूख हड़ताल पर बैठे रहे। कई ग्रामीण महिलाएं और जनप्रतिनिधि क्रमिक अनशन में भाग ले रहे हैं। अब तक 16 लोग भूख हड़ताल में शामिल हो चुके हैं, जिनमें से 14 को पुलिस पहले ही अस्पताल पहुंचा चुकी है, जबकि अनशन का सिलसिला जारी है।
इधर आंदोलन के दबाव का असर भी दिखने लगा है। शुक्रवार को दो विशेषज्ञ चिकित्सक सीएचसी पहुंचे हैं और उनकी नियमित तैनाती की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इससे पहले एक एमबीबीएस डॉक्टर की नियुक्ति हो चुकी है। प्रभारी डॉ. अमित रतन सिंह ने बताया कि अब ईसीजी मशीन भी चालू हो गई है और मरीजों को सीधा लाभ मिल रहा है। साथ ही उप जिला चिकित्सालय के भवन निर्माण के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे, जब तक ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह दुरुस्त नहीं किया जाता और सरकार ठोस कदम नहीं उठाती।
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