देहरादून। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के अंतर्गत बने 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड को और अधिक सुरक्षित बनाने की कवायद तेज हो गई है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने तय किया है कि सड़क के पिलरों को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान की जाएगी। इसके लिए पिलर्स के निचले हिस्से को दो से आठ मीटर की ऊंचाई तक मजबूत जैकेटिंग से ढका जाएगा, ताकि भारी बारिश या बाढ़ के दौरान आने वाले बोल्डर और पेड़ सीधे पिलर्स से न टकरा सकें।
मानसून में दिखी मजबूती, फिर भी उठाया गया एहतियाती कदम
इस मानसून सीजन में 15 सितंबर की रात हुई रिकॉर्ड तोड़ बारिश के बाद देहरादून की नदियां उफान पर आ गईं। तेज बहाव के साथ बड़े-बड़े पत्थर और पेड़ भी बाढ़ में बहकर आए। इसके बावजूद गणेशपुर से डाटकाली तक बने पिलर सुरक्षित खड़े रहे। एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं की आशंका से इन पिलर्स को अतिरिक्त सुरक्षा देना आवश्यक है।
24 से 30 पिलर्स होंगे और मजबूत
एनएचएआई ने पानी के तेज बहाव के संपर्क में आने वाले करीब 24 से 30 पिलर्स को चिह्नित किया है। इन पर जरूरत के अनुसार दो, चार और आठ मीटर तक ऊंचाई पर जैकेटिंग की जाएगी। इसके लिए पिलर्स में ड्रिल कर सरिए डाले जाएंगे और बाहर से सरियों का मजबूत जाल चढ़ाया जाएगा। इस तकनीक से अगर भारी बोल्डर पिलर्स की ओर बढ़ेंगे तो वे सीधे पिलर्स से न टकराकर पहले सरियों के जाल से टकराएंगे, जिससे उनका असर सीमित रहेगा। चूंकि परियोजना अभी ठेकेदार के अधीन है, इसलिए इस पर अतिरिक्त खर्च का बोझ सरकार पर नहीं आएगा।
सेना के वाहनों से हुई थी सफल टेस्टिंग
एनएचएआई के परियोजना निदेशक पंकज मौर्य ने बताया कि हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सेना ने युद्धाभ्यास किया था। इस दौरान करीब 100 भारी सैन्य वाहन एकसाथ एलिवेटेड रोड से गुजरे। इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का यह पहला मौका था और इस परीक्षण ने परियोजना की मजबूती और क्षमता को साबित कर दिया।
आपदा के बाद यातायात इसी मार्ग से
हालिया आपदा में मोहंड के पास दिल्ली-देहरादून राजमार्ग का एक हिस्सा धंस गया था। इसके बाद से वर्तमान में पूरे यातायात का संचालन इसी एलिवेटेड रोड से किया जा रहा है।
इस तरह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का यह अहम हिस्सा न केवल प्राकृतिक आपदाओं में मजबूती साबित कर चुका है, बल्कि भविष्य के लिए और भी सुरक्षित बनाया जा रहा है।
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