इस बार का मानसून उत्तराखंड के पहाड़ों में भारी तबाही लेकर आया है। धराली से थराली तक राज्य के कई हिस्सों में कुदरत ने कहर बरपाया। जहां पहाड़ों पर अचानक बादल फटने से पहले से ही खतरे के संकेत मिल रहे थे, वहीं राजधानी देहरादून पर एकाएक आफत टूट पड़ी।
सहस्रधारा और कार्लीगाड़ में आधी रात के समय अचानक तेज बारिश के बीच भारी धमाके के साथ बादल फट गए। पानी की भीषण धार और मलबे ने सब कुछ निगल लिया, जिससे लोगों के संभलने का कोई मौका नहीं बचा।
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक एक व्यक्ति की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 12 लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर चल रहा है ताकि जिंदगियों के बचे निशान तलाशे जा सकें। प्रभावित परिवारों को मजाड़ा स्थित प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर और सहस्रधारा रोड के अधिग्रहीत होटलों में स्थानांतरित किया जा रहा है।
प्रेमनगर क्षेत्र में टौंस नदी का उफान भी गंभीर तबाही की वजह बना। नंदा चौकी के पास पुल का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया, वहीं खनन कार्य के लिए ट्रैक्टर-ट्राली से नदी की ओर जा रहे 14 लोग उफान में फंस गए। मदद पहुंचने से पहले ही सभी को पानी की तेज़ धार में बहा ले जाया गया।
एसडीआरएफ की अथक कोशिश के बाद दो लोगों को सुरक्षित निकाला जा सका, जबकि 12 अभी भी लापता हैं। टौंस नदी से अब तक 8 शव बरामद किए जा चुके हैं और बाकी 4 की तलाश जारी है। विकासनगर क्षेत्र में आसन नदी से तीन और शव मिले हैं।
देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में हर नदी-नाला उफान पर है। भूस्खलन की घटनाओं ने भी भारी जनहानि की वजह बनी। मोहिनी रोड, भगत सिंह कालोनी, ग्रीन वैली हास्टल, मसूरी के बार्लोगंज, ऋषिकेश के 200 बीघा क्षेत्र और कालसी में कुल मिलाकर छह लोगों की मौत हो चुकी है।
इस तरह कुल मिलाकर देहरादून में अब तक 17 लोगों की मौत और 16 लापता होने की जानकारी मिली है, जबकि प्रशासन की आधिकारिक रिपोर्ट में अभी तक 11 मौतें और 12 लापता बताए गए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने के लिए मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रशासन और पुलिस को आपदा प्रभावितों की मदद करने के कड़े निर्देश दिए। जिलाधिकारी सविन बंसल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह ने भी पैदल प्रभावित क्षेत्रों में जाकर राहत कार्यों को गति दी।
सड़कों और पुलों को भारी नुकसान हुआ है। पांवटा साहिब-देहरादून राजमार्ग पर नंदा चौकी के पास पुल ध्वस्त हो गया, हरिद्वार राजमार्ग पर लालतप्पड़ के पास पुराने पुल का एप्रोच रोड बह गया। दिल्ली-देहरादून मार्ग का एक हिस्सा मोहंड के पास धंस गया। मसूरी मार्ग पर शिव मंदिर के पास पुल टूट गया, साथ ही मालदेवता और सहस्रधारा के पास भी पुल ध्वस्त हो चुका है।
राज्य के अनेक मार्ग इस समय बंद या क्षतिग्रस्त हैं, जिससे राहत कार्यों में भारी बाधा उत्पन्न हो रही है।
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