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“ग्लोबल साइबर ठगी पर ED की बड़ी कार्रवाई, दिल्ली से देहरादून तक 11 ठिकानों पर छापेमारी”

On: August 6, 2025 7:53 AM
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नई दिल्ली – प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 260 करोड़ रुपये की एक हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी मामले में बुधवार को बड़ा एक्शन लिया है। दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कुल 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दिल्ली पुलिस और CBI की FIR के आधार पर की गई।

यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से विदेशी और भारतीय नागरिकों को निशाना बनाता था। आरोपी खुद को पुलिस या जांच एजेंसी के अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी की धमकी देते थे और उनसे मोटी रकम वसूलते थे। कई मामलों में उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी बड़ी कंपनियों के फर्जी टेक्निकल सपोर्ट एजेंट बनकर भी लोगों को ठगा है।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए ठगी का हाई-टेक जाल

जांच एजेंसियों के अनुसार, ठगों ने पीड़ितों से वसूली गई रकम को क्रिप्टोकरेंसी—खासकर बिटकॉइन और USDT (Tether)—में बदला और फिर इसे अलग-अलग डिजिटल वॉलेट्स में ट्रांसफर कर UAE के हवाला नेटवर्क के ज़रिए नकदी में तब्दील कर दिया। अब तक की छानबीन में यह सामने आया है कि आरोपियों ने करीब 260 करोड़ रुपये मूल्य के बिटकॉइन का लेन-देन किया है।

CBI की पिछली कार्रवाई: गिरोह का मास्टरमाइंड गिरफ्तार

CBI ने इससे पहले 26 जून को मुंबई और अहमदाबाद में छापेमारी कर इस अंतरराष्ट्रीय साइबर रैकेट के एक बड़े खिलाड़ी प्रिंस जशवंतलाल आनंद को गिरफ्तार किया था। वह अमेरिका और कनाडा में रहने वाले लोगों को निशाना बनाकर ठगी करने वाले इस गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।

फर्जी कानूनी नोटिस और डिजिटल गिरफ्तारी से डराकर ठगी

जांच में यह भी सामने आया है कि ठग लोगों को सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर फर्जी कानूनी नोटिस भेजते थे। इसके बाद उन्हें डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी देकर भारी रकम वसूलते थे। 25 जून को ED ने इसी तरह के एक अन्य साइबर फ्रॉड केस में गुजरात और महाराष्ट्र के अहमदाबाद, सूरत और मुंबई में छापे मारे थे। उस केस में भी 100 करोड़ से ज्यादा की ठगी सामने आई थी।

मुख्य आरोपी: मेडिकल बैकग्राउंड से लेकर टेक फ्रॉड तक

ED की रिपोर्ट के अनुसार, इस गिरोह में शामिल प्रमुख नाम हैं – मकबूल डॉक्टर, काशिफ डॉक्टर, बसम डॉक्टर, महेश मफतलाल देसाई और मज अब्दुल रहीम नदा। इन सभी ने मिलकर USDT ट्रेडिंग घोटाला, फर्जी प्रवर्तन नोटिस और डिजिटल गिरफ्तारी की धमकियों का इस्तेमाल करते हुए बड़ी संख्या में लोगों से ठगी की है।

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