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“जलभराव से निपटने को दून 12 जोन में बांटा गया, डीएम सविन बंसल ने कसी कमर”

On: July 29, 2025 6:16 AM
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देहरादून। राजधानी और आस-पास के इलाकों में मानसून के दौरान जलभराव की recurring समस्या से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल के नेतृत्व में 17 नए डी-वाटरिंग पंप फील्ड में तैनात किए गए हैं, जिनकी खरीदी पर लगभग 30 लाख रुपये खर्च किए गए। सोमवार को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इन पंपों को कार्य क्षेत्र में उतार दिया गया।

12 जोन में बांटा गया शहर, हर जोन में एक पंप

जलभराव की समस्या को क्षेत्रवार निपटाने के लिए देहरादून नगर निगम क्षेत्र को 12 जोन में विभाजित किया गया है। हर जोन में एक पंप की तैनाती सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही 30 अधिकारियों की अलग से ड्यूटी लगाई गई है जो फील्ड में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को किया गया मजबूत

पहले से गठित क्विक रिस्पांस टीम (QRT) को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। अब QRT को नवीनतम उपकरणों व पंपों से लैस करते हुए तीन अनुभवी अधिकारियों को ज़ोनल प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है:

सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह (QRT प्रभारी – जोन-1)

जिम्मेदारी वाले क्षेत्र:

प्रिंस चौक

बल्लूपुर व जीटीसी क्षेत्र (बिंदाल पुल, सिनर्जी अस्पताल समेत)

आईटी पार्क व उसके आस-पास (तपोवन, रायपुर रोड, सहस्रधारा क्रॉसिंग)

सहस्रधारा रोड, ऊषा कॉलोनी, कृषाली चौक

उपजिलाधिकारी सदर हर गिरि (QRT प्रभारी – जोन-2)

जिम्मेदारी वाले क्षेत्र:

06 नंबर पुलिया से रायपुर स्टेडियम क्षेत्र

रिस्पना नदी किनारे बस्तियां (सपेरा बस्ती, अधोईवाला, मोहिनी रोड)

कांवली रोड, कमला पैलेस, सहारनपुर रोड, बिंदाल, भूसा स्टोर, निरंजनपुर मंडी

चंद्रबनी, जीएमएस रोड, सेंट ज्यूड्स चौक, आशारोड़ी

उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी (QRT प्रभारी – जोन-3)

जिम्मेदारी वाले क्षेत्र:

आईएसबीटी, लालपुल, महंत इंद्रेश अस्पताल, कारगी, जीएमएस रोड

बंगाली कोठी, दून यूनिवर्सिटी, मोथरोवाला

बल्लूपुर चौक, पंडितवाड़ी, सीमाद्वार

बंजारावाला, आर्केडिया ग्रांट

ऋषिकेश और डोईवाला को भी राहत

शहर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए ऋषिकेश और डोईवाला के लिए भी 5 डी-वाटरिंग पंप अलग से आवंटित किए गए हैं, जिनका संचालन शुरू कर दिया गया है।

उद्देश्य: जलभराव से त्वरित राहत

इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जलभराव की स्थिति में तुरंत रिस्पांस देना और राहत कार्यों को तेज करना है। प्रशासन का मानना है कि यह सिस्टम मानसून के समय जलभराव जैसी समस्याओं से लड़ने में कारगर साबित होगा और नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

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