आईपीएस अधिकारी तृप्ति भट्ट ने एक बार फिर अपनी दूरदर्शिता और कार्यक्षमता का परिचय देते हुए उत्तराखंड पुलिस प्रशासन में एक नई मिसाल कायम की है। वर्ष 2017 से 2019 तक वे चमोली जिले में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर नियुक्त रहीं, जहां उन्होंने पुलिस कल्याण और कार्यप्रणाली में सुधार के लिए कई उल्लेखनीय कार्य किए। उनके प्रयासों में राज्य का पहला वर्चुअल पुलिस स्टेशन शुरू करना एक क्रांतिकारी कदम माना गया, जो डिजिटल युग में पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ।
अब एक नई पहल के तहत आईपीएस तृप्ति भट्ट, जो वर्तमान में 40वीं वाहिनी पीएसी हरिद्वार की सेनानायक के पद पर कार्यरत हैं, ने बदरीनाथ थाना गोद लिया है। यह कदम मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के “आदर्श थाने” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
सोमवार को बदरीनाथ धाम पहुंचकर तृप्ति भट्ट ने पहले मंदिर में दर्शन किए और फिर थाने का गहन निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक विस्तृत चेकलिस्ट के आधार पर थाना परिसर की वर्तमान व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया। इसमें क्षेत्र का क्राइम ग्राफ, सुरक्षा प्रबंधन, और पुलिसकर्मियों को उपलब्ध सुविधाएं जैसे बैरक, कार्यालय, भोजनालय और शौचालय आदि शामिल थे। उन्होंने इन सभी पहलुओं पर बारीकी से निरीक्षण करते हुए आवश्यक सुधारों के निर्देश दिए।
सुरक्षा बलों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश
आईपीएस तृप्ति भट्ट ने बदरीनाथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड (एटीएस) के जवानों को भी ब्रीफ किया और सुरक्षा को लेकर अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने एटीएस द्वारा बनाए गए टास्क की मॉनिटरिंग की और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में निरंतर चेकिंग, फ्रिस्किंग, अभिसूचना एकत्रीकरण और सत्यापन पर विशेष बल देने को कहा। इसके साथ ही संयुक्त अभियान चलाने का निर्देश भी दिया।
उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। दर्शन के दौरान वरिष्ठ नागरिकों, बीमार व्यक्तियों और दिव्यांगों को प्राथमिकता देने की बात भी स्पष्ट रूप से कही गई।
एक आदर्श थाने की ओर बढ़ता कदम
आईपीएस तृप्ति भट्ट द्वारा बदरीनाथ कोतवाली को गोद लेना न केवल एक प्रशासनिक पहल है, बल्कि यह पुलिस व्यवस्था में जनहित, तकनीकी नवाचार और संवेदनशीलता को समाहित करने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम भी है। यह पहल भविष्य में अन्य थानों के लिए एक मॉडल बन सकती है, जो उत्तराखंड पुलिस के प्रशासनिक दृष्टिकोण और सेवा भावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
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