देहरादून के भनियावाला क्षेत्र स्थित द प्रेसिडेंसी इंटरनेशनल स्कूल को मनमाने तरीके से फीस बढ़ाना भारी पड़ गया। 100 से अधिक अभिभावकों की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने इस मामले में जांच शुरू की। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि स्कूल की मान्यता मार्च 2025 में ही समाप्त हो चुकी है और इसके नवीनीकरण के लिए कोई आवेदन भी नहीं किया गया था। बिना मान्यता के स्कूल चला रहे प्रबंधन को प्रशासन ने कड़ी चेतावनी देते हुए 5.72 लाख रुपये का जुर्माना ठोका।
प्रशासन की सख्ती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बार-बार बुलाने के बावजूद जब स्कूल प्रबंधन पेश नहीं हुआ, तो मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने शिक्षा विभाग की मदद से स्कूल का पूरा ब्योरा खंगालना शुरू कर दिया। स्कूल पर कार्रवाई के संकेत मिलते ही प्रबंधन को अपनी गलती का एहसास हुआ और अंततः उसने चेक के माध्यम से पूरा जुर्माना भर दिया।
इतना ही नहीं, प्रशासन ने यह भी साफ कर दिया था कि अगर जुर्माना समय पर जमा नहीं किया गया, तो आरसी (रिकवरी सर्टिफिकेट) के तहत स्कूल की संपत्ति तक जब्त की जा सकती है। इस चेतावनी ने स्कूल प्रबंधन की हेकड़ी निकाल दी और मजबूरन उन्हें न सिर्फ जुर्माना अदा करना पड़ा, बल्कि प्रशासन को एक लिखित पत्र भी भेजा गया, जिसमें फीस में कटौती का आश्वासन दिया गया।
यह मामला उन सभी अभिभावकों के लिए एक मिसाल बनकर सामने आया है, जो निजी स्कूलों की मनमानी से परेशान रहते हैं। प्रशासन की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई ने दिखा दिया है कि अब शिक्षा के नाम पर अनुशासनहीनता और शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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