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रुद्रपुर इंडसइंड बैंक में 29 करोड़ की ठगी का सरगना हरियाणा से दबोचा गया

On: June 24, 2025 11:25 AM
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रुद्रपुर:
उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर में इंडसइंड बैंक के माध्यम से 29.50 करोड़ रुपये की बड़ी बैंक धोखाधड़ी मामले का मास्टरमाइंड राजकुमार उर्फ चेयरमैन आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। लंबे समय से फरार चल रहे इस शातिर अपराधी को पुलिस ने हरियाणा के सोनीपत से गिरफ्तार कर लिया। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था।

फर्जी चेकों से NHAI और CALA के संयुक्त खाते से निकाले करोड़ों

यह मामला 28 और 31 अगस्त 2024 को सामने आया, जब रुद्रपुर स्थित इंडसइंड बैंक में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और कॉम्पिटेंट अथॉरिटी ऑफ एक्विजिशन (CALA) के संयुक्त खाते से तीन फर्जी चेकों के जरिए करीब 13.51 करोड़ रुपये अवैध रूप से निकाल लिए गए थे।

बैंक मैनेजर और कैशियर की गिरफ्तारी के बाद सामने आया मास्टरमाइंड का नाम

शिकायत मिलते ही तत्कालीन विशेष भू-अधिग्रहण अधिकारी कौस्तुभ मिश्रा की तहरीर पर पुलिस ने जांच शुरू की और बैंक मैनेजर देवेंद्र सिंह तथा महिला कैशियर को गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि बाद की जांच में महिला कैशियर की भूमिका नहीं पाई गई।

जांच के दौरान ललित कुमार महेन्द्रू उर्फ लाली, मीनू बाठला और राजकुमार उर्फ चेयरमैन की संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद इनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू हुए।

फरार चेयरमैन को सेरोगेसी के सुराग से पकड़ा

राजकुमार की गिरफ्तारी लंबे समय से पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई थी। इसी बीच पुलिस को एक महत्वपूर्ण सुराग मिला कि वह सेरोगेसी के माध्यम से पिता बनने की योजना बना रहा है। इसी सूचना को आधार बनाकर पुलिस ने जाल बिछाया और सोनीपत से उसे धर दबोचा।

पूर्व में सहकारिता विभाग का चेयरमैन भी रह चुका है राजकुमार

पूछताछ में सामने आया कि राजकुमार सहकारिता विभाग की समितियों में चेयरमैन रह चुका है और उसने हरियाणा के सोनीपत से दो बार यह चुनाव भी जीता था। इसी कारण उसे ‘चेयरमैन’ नाम से जाना जाता है।

18 आपराधिक मामलों में वांछित, महंगी जीवनशैली का शौकीन

राजकुमार कोई आम अपराधी नहीं है। उस पर हत्या, लूट, ठगी और धोखाधड़ी सहित 18 से अधिक आपराधिक मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं। वह एक अय्याश और महंगी जीवनशैली का आदी है। पुलिस को चकमा देने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदलता रहा।

300 करोड़ की बड़ी साजिश को दिया था अंजाम, समय रहते पर्दाफाश

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह की योजना करीब 300 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने की थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता से वह पूरी तरह सफल नहीं हो सके। राजकुमार ने अपने संगठित गिरोह के साथ मिलकर विभिन्न राज्यों में फर्जी चेकों के जरिए पैसे की निकासी की थी।

गिरफ्तारी में लगी विशेष टीम

राजकुमार की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की एसओजी टीम ने तकनीकी निगरानी और मैनुअल खुफिया तंत्र के जरिए देशभर में दबिश दी। अंततः योजना बनाकर उसे पकड़ने में सफलता मिली।

गिरफ्तारी में शामिल टीम:

एसओजी प्रभारी निरीक्षक संजय पाठक

उप निरीक्षक अरविंद बहुगुणा

कांस्टेबल ललित कुमार

कांस्टेबल गिरीश पाटनी

एसएसपी का बयान

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मणिकांत मिश्रा ने बताया कि आरोपित ने इंडसइंड बैंक में NHAI और CALA के खाते से कुल 29.50 करोड़ रुपये की अवैध निकासी की थी। वह संगठित अपराध का सरगना है और लगातार पुलिस से बचता रहा। सेरोगेसी की योजना से मिले सुराग ने उसे पकड़वाने में निर्णायक भूमिका निभाई।

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