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हल्द्वानी में सुरक्षा दावों की खुली पोल: मनचलों के खौफ से सड़क पर भागती रही युवती, ‘गायब’ रही पुलिस

On: March 19, 2026 9:34 AM
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हल्द्वानी की सड़क पर रात के समय बाइक सवार युवती और युवक का पीछा करते मनचले, उत्तराखंड पुलिस सुरक्षा पर सवाल।

हल्द्वानी (उत्तराखंड): कुमाऊं के प्रवेश द्वार कहे जाने वाले हल्द्वानी शहर से एक ऐसी सनसनीखेज घटना सामने आई है जिसने न केवल महिला सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, बल्कि खाकी की मुस्तैदी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार की रात एक युवती और उसके मुंहबोले भाई को सरेराह मनचलों ने न केवल प्रताड़ित किया, बल्कि जान बचाने के लिए उन्हें शहर की सड़कों पर मीलों तक भागने पर मजबूर कर दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जिस मार्ग पर यह हाई-वोल्टेज ड्रामा चलता रहा, वहां पुलिस का नामोनिशान तक नहीं था।

जन्मदिन की खुशियां बदलीं दहशत में

घटना की शुरुआत सोमवार रात को हुई। कोतवाली क्षेत्र के रहने वाले एक युवक की बहन का जन्मदिन था, जिसकी पार्टी में रामपुर रोड निवासी युवती (युवक की मुंहबोली बहन) शामिल होने आई थी। रात अधिक होने के कारण युवक अपनी मुंहबोली बहन को सुरक्षित घर छोड़ने के लिए अपनी बाइक से निकला। उन्हें क्या पता था कि चंद मिनटों बाद उनकी सुरक्षा ही दांव पर लग जाएगी।

पुलिसिया ‘हूटर’ का फर्जी रौब और बदतमीजी

जैसे ही वे मिनी स्टेडियम के पास पहुंचे, पीछे से तेज हूटर की आवाज सुनाई दी। युवक ने यह सोचकर अपनी बाइक किनारे लगा ली कि शायद पुलिस की कोई गाड़ी आपात स्थिति में जा रही है। लेकिन हकीकत कुछ और ही थी। एक बुलेट पर सवार दो युवक अवैध रूप से हूटर बजाते हुए निकले। जब युवक ने उन्हें देखा, तो बुलेट सवार अजय थापा और अजय फर्त्याल ने “घूरने” का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज और बदतमीजी शुरू कर दी।

जेल रोड पर मारपीट और पीछा

विरोध करने पर आरोपी उग्र हो गए। उन्होंने जेल रोड चौराहे के पास युवती और उसके भाई को जबरन रुकवाया और मारपीट शुरू कर दी। बीच-बचाव करने आई युवती के साथ भी अभद्रता की गई और आरोप है कि उसके बाल पकड़कर उसे घसीटा गया। किसी तरह अपनी जान बचाकर दोनों वहां से बाइक स्टार्ट कर भागे, लेकिन आरोपी किसी शिकारी की तरह उनके पीछे लग गए।

वीआईपी इलाके में ‘लापता’ रही सुरक्षा

हैरानी और शर्मिंदगी की बात यह है कि यह पूरी घटना उस क्षेत्र में हुई जहां कुमाऊं कमिश्नर, डीआईजी और जिले के तमाम बड़े प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के आवास हैं। पास में ही कोतवाली भी स्थित है। इसके बावजूद, आरोपियों ने कानून का जरा भी भय न दिखाते हुए काफी दूर तक बाइक का पीछा जारी रखा। पीड़ितों ने मदद के लिए इधर-उधर देखा, लेकिन गश्त का दावा करने वाली पुलिस कहीं नजर नहीं आई।

छिपकर बचाई जान, परिवार बना ढाल

जब पुलिस से कोई मदद नहीं मिली, तो युवती ने साहस दिखाते हुए चलती बाइक पर ही अपने सगे भाई को फोन किया और पूरी स्थिति बताई। भाई ने उन्हें रामपुर रोड स्थित अग्रसेन भवन पहुंचने को कहा। वहां पहुंचने पर भी जब आरोपी पीछे लगे रहे, तो पीड़ितों ने समझदारी दिखाई और समता आश्रम वाली गली से होते हुए बरेली रोड की ओर मुड़ गए। वहां एक सुनसान जगह पर आड़ लेकर वे तब तक छिपे रहे जब तक युवती का सगा भाई और अन्य परिजन मौके पर नहीं पहुंच गए। अपनों को सामने देख दोनों की जान में जान आई।

पुलिस की कार्रवाई और आरोपियों की पहचान

मामला बढ़ता देख और परिजनों के हस्तक्षेप के बाद पुलिस हरकत में आई। हल्द्वानी पुलिस ने तहरीर के आधार पर अजय थापा (निवासी बड़ी मुखानी, पीलीकोठी) और अजय फर्त्याल (निवासी फतेहपुर) के खिलाफ छेड़खानी, मारपीट, गाली-गलौज और वाहन को नुकसान पहुंचाने की धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और घटना में प्रयुक्त बुलेट को सीज कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार, एक आरोपी अजय फर्त्याल पहले बाजपुर के एक स्कूल में कार्यरत रह चुका है।

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प्रशासन पर उठते गंभीर सवाल

एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने पुष्टि की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, इस घटना ने जनता के बीच कई अनुत्तरित प्रश्न छोड़ दिए हैं:

  • नाइट विजन और गश्त कहाँ है? वीआईपी क्षेत्र में भी अगर लड़कियां सुरक्षित नहीं हैं, तो आम गलियों का क्या हाल होगा?
  • अवैध हूटर का प्रयोग: आम नागरिकों की गाड़ियों पर पुलिसिया हूटर कैसे बज रहे हैं? क्या आरटीओ और पुलिस चेकिंग केवल कागजों तक सीमित है?
  • महिला सुरक्षा के दावे: सरकार ‘बेटी बचाओ’ का नारा देती है, लेकिन रात के समय संकट में फंसी बेटी को बचाने के लिए पुलिस सड़कों पर क्यों नहीं मिली?

निष्कर्ष:

हल्द्वानी की यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का प्रमाण है। यदि पीड़ित युवती के पास फोन न होता या उसका परिवार समय पर न पहुंचता, तो यह मामला किसी बड़ी अनहोनी में बदल सकता था। अब देखना यह है कि क्या पुलिस केवल गिरफ्तारी तक सीमित रहती है या शहर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए कोई ठोस कदम उठाती है।

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