हजारीबाग (झारखंड): झारखंड के हजारीबाग जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुंभा गांव में एक 12 वर्षीय नाबालिग किशोरी के साथ नृशंसता की सारी हदें पार कर दी गईं। मंगलवार रात मंगला जुलूस देखने निकली मासूम की दुष्कर्म के बाद पत्थर से कूचकर हत्या कर दी गई। बुधवार सुबह जब उसका रक्तरंजित शव एक गड्ढे में मिला, तो पूरे इलाके में आक्रोश की लहर दौड़ गई।
खुशी के माहौल में पसरा मातम
झारखंड में होली से लेकर रामनवमी तक प्रत्येक मंगलवार को ‘मंगला जुलूस’ निकालने की परंपरा है। कुसुंभा गांव में भी मंगलवार रात उत्सव का माहौल था। गांव की ही 12 वर्षीय छात्रा इसी जुलूस की रौनक देखने के लिए घर से उत्साह के साथ निकली थी। परिजनों को अंदाजा भी नहीं था कि उनकी लाडली कभी वापस नहीं लौटेगी। देर रात तक जब किशोरी घर नहीं पहुंची, तो परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू की, लेकिन अंधेरे और भीड़ के कारण उसका कहीं पता नहीं चला।
रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात
बुधवार की सुबह गांव के ही एक मैदान के पास स्थित गड्ढे में ग्रामीणों ने एक शव देखा। पास जाकर देखने पर पता चला कि यह वही किशोरी थी जो रात से लापता थी। शव की स्थिति देखकर लोगों की रूह कांप गई।
अपराधियों ने न केवल मासूम के साथ दुष्कर्म किया, बल्कि अपनी पहचान छिपाने के लिए दरिंदगी की इंतहा कर दी। अपराधी ने बड़े पत्थरों से प्रहार कर किशोरी का चेहरा पूरी तरह क्षत-विक्षत कर दिया था ताकि उसकी पहचान न हो सके।
आक्रोशित ग्रामीणों का हंगामा, पुलिस का घेराव
घटना की जानकारी मिलते ही हजारों की संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर मौके पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों का लगभग एक घंटे तक घेराव किया। ग्रामीणों का आरोप है कि उत्सव के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता नहीं थी, जिसका फायदा उठाकर इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया। स्थानीय विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी मौके पर पहुंचकर इस घटना को ‘समाज के माथे पर कलंक’ करार दिया।
फॉरेंसिक जांच और पुलिस की कार्रवाई
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। मौके पर एसडीपीओ बैजनाथ प्रसाद, बीडीओ अखिलेश कुमार और थाना प्रभारी सपन कुमार महथा भारी पुलिस बल के साथ पहुंचे। साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए रांची से फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाया गया।
- फॉरेंसिक साक्ष्य: टीम ने घटनास्थल से खून के नमूने, फिंगरप्रिंट्स और अन्य संदिग्ध वस्तुएं एकत्रित की हैं।
- पोस्टमार्टम: शव को कब्जे में लेकर हजारीबाग मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया है, जहां मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा।
- संदेह के घेरे में परिचित: पुलिस को अंदेशा है कि यह किसी परिचित का काम हो सकता है, जो किशोरी को बहला-फुसलाकर भीड़ से दूर सुनसान जगह पर ले गया।
प्रशासन का आश्वासन
एसडीपीओ बैजनाथ प्रसाद ने ग्रामीणों को शांत कराते हुए ठोस आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, “यह एक जघन्य अपराध है और पुलिस अपराधियों के बेहद करीब है। वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर बहुत जल्द दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी।” प्रशासन के लिखित और मौखिक आश्वासन के बाद ही ग्रामीण शांत हुए और शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाने दिया गया।
सुरक्षा और समाज पर सवाल
मंगला जुलूस जैसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों के बीच इस तरह की घटना ने बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा डर है कि आखिर भीड़भाड़ वाले इलाके से एक बच्ची को गायब कर इस तरह की वारदात को कैसे अंजाम दिया गया।
प्रमुख विवरण:
- स्थान: कुसुंभा गांव, विष्णुगढ़ प्रखंड, हजारीबाग।
- पीड़िता: 12 वर्षीय नाबालिग छात्रा।
- वारदात: दुष्कर्म के बाद पत्थर से चेहरा कूचकर हत्या।
- जांच: फॉरेंसिक और डॉग स्क्वायड द्वारा सुरागों की तलाश जारी।
यह एक अत्यंत संवेदनशील मामला है। प्रशासन और पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि और जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी प्रकार की अफवाहों से बचें।









