कुवैत सिटी/तेहरान: पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी संघर्ष अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी इस जंग की आग अब खाड़ी देशों के तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तक फैल चुकी है। ताजा घटनाक्रम में, शुक्रवार सुबह कुवैत की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरियों में से एक, मीना अल अहमदी (Mina Al-Ahmadi) पर ड्रोन हमला किया गया है। इस हमले के बाद रिफाइनरी की कई यूनिट्स में भीषण आग लग गई, जिसके चलते ऑपरेशंस को एहतियातन बंद करना पड़ा है।
इस हमले ने वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया की तेल और गैस आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है।
कुवैत रिफाइनरी पर हमला और वर्तमान स्थिति
कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है। केपीसी के मुताबिक, “आज सुबह मीना अल अहमदी रिफाइनरी को ड्रोन के जरिए निशाना बनाया गया। हमले के कारण परिसर की कई प्रमुख इकाइयों में आग लग गई। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए फैक्ट्री के कुछ हिस्सों में कामकाज रोक दिया गया है।”
गनीमत यह रही कि इस हमले में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। कुवैत की इमरजेंसी टीमें आग पर काबू पाने और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। हालांकि, रिफाइनरी के बंद होने से कुवैत के तेल निर्यात पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान का पलटवार: इजराइल के ‘साउथ पारस’ हमले का जवाब
विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत और अन्य खाड़ी क्षेत्रों पर हो रहे ये हमले ईरान की उस जवाबी कार्रवाई का हिस्सा हैं, जो इजराइल द्वारा बुधवार रात ईरान के साउथ पारस गैस फील्ड पर किए गए हमले के बाद शुरू हुई है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि यदि उसके ऊर्जा संसाधनों को निशाना बनाया जाएगा, तो वह पूरे क्षेत्र की एनर्जी फैसिलिटी को पंगु बना देगा। इसी कड़ी में ईरान ने कतर की रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी (Ras Laffan Industrial City) पर भी हमला किया है, जिससे कतर की लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) एक्सपोर्ट क्षमता में लगभग 17 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान है। इसका सीधा असर यूरोप और एशिया की गैस सप्लाई पर पड़ेगा।
हाइफा रिफाइनरी पर बैलिस्टिक मिसाइल का प्रहार
सीएनएन (CNN) की एक रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष की यह आग केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। गुरुवार देर रात ईरान ने एक बैलिस्टिक मिसाइल से उत्तरी इजराइल के हाइफा तेल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स पर हमला किया। इस हमले ने इजराइल के भीतर भी ऊर्जा संकट की आहट पैदा कर दी है। इजराइल के रक्षा सूत्रों का कहना है कि वे इस हमले का कड़ा जवाब देने की तैयारी कर रहे हैं।
ईरानी विदेश मंत्री की चेतावनी: “अब कोई संयम नहीं”
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराकची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा, “हमने अब तक बहुत संयम बरता है, लेकिन अगर हमारे ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से निशाना बनाया गया, तो ‘जीरो रेस्ट्रेंट’ (Zero Restraint) की नीति अपनाई जाएगी। हमने अपनी ताकत का अभी बहुत कम हिस्सा इस्तेमाल किया है। अब किसी भी हमले का जवाब और भी भयानक होगा।”
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वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
इस ‘एनर्जी वॉर’ का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है।
- कच्चे तेल की कीमतें: खाड़ी देशों में असुरक्षा के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं।
- सप्लाई चेन में रुकावट: कतर से होने वाली एलएनजी सप्लाई रुकने से यूरोप में ऊर्जा संकट गहरा सकता है, जिससे बिजली की कीमतें बढ़ेंगी।
- महंगाई का डर: ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ेगी, जिसके परिणामस्वरूप खाद्य वस्तुओं और अन्य आवश्यक सेवाओं के दाम बढ़ सकते हैं।
निष्कर्ष
पश्चिम एशिया में ऊर्जा केंद्रों पर हो रहे ये हमले न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा हैं, बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़े आर्थिक संकट की ओर धकेल रहे हैं। यदि कूटनीतिक रास्तों से इस तनाव को तुरंत कम नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में दुनिया भर में ईंधन और गैस के लिए त्राहि-त्राहि मच सकती है।











