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​धामी कैबिनेट का बड़ा विस्तार: 5 दिग्गज मंत्रियों ने ली शपथ, ‘विकास की नई उड़ान’ का संकल्प

On: March 20, 2026 6:47 AM
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राज्यपाल गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ शपथ लेते पांच नए मंत्री

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में पिछले काफी समय से जिस कैबिनेट विस्तार का इंतजार किया जा रहा था, वह शुक्रवार को आखिरकार संपन्न हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए पांच नए मंत्रियों को शामिल किया है। राजभवन में आयोजित एक गरिमामय समारोह में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इस विस्तार के साथ ही धामी सरकार ने अपनी टीम को पूर्ण आकार दे दिया है। अब मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमंडल में सदस्यों की कुल संख्या 12 हो गई है, जो राज्य में अधिकतम निर्धारित सीमा है।

इन दिग्गजों ने ली मंत्री पद की शपथ

राजभवन के प्रांगण में हुए इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रदेश के अलग-अलग कोनों से आए विधायकों को कैबिनेट में जगह मिली है। शपथ लेने वाले नए मंत्रियों की सूची इस प्रकार है:

  • मदन कौशिक (हरिद्वार): पूर्व कैबिनेट मंत्री और वरिष्ठ नेता मदन कौशिक की एक बार फिर सरकार में वापसी हुई है। हरिद्वार क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए यह फैसला अहम माना जा रहा है।
  • प्रदीप बत्रा (रुड़की): रुड़की से विधायक प्रदीप बत्रा को उनके विकास कार्यों और क्षेत्र में सक्रियता का इनाम मिला है।
  • भरत सिंह चौधरी (रुद्रप्रयाग): रुद्रप्रयाग के विधायक भरत सिंह चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल कर सरकार ने केदारघाटी और पर्वतीय क्षेत्र को बड़ा प्रतिनिधित्व दिया है।
  • खजान दास (देहरादून): राजधानी देहरादून के राजपुर रोड से विधायक खजान दास को शामिल कर दलित चेहरों को मजबूती देने की कोशिश की गई है।
  • राम सिंह कैड़ा (नैनीताल): भीमताल से विधायक राम सिंह कैड़ा को कैबिनेट में जगह देकर कुमाऊं मंडल और विशेषकर नैनीताल जिले के समीकरणों को साधा गया है।

क्यों जरूरी था यह विस्तार?

धामी सरकार में लंबे समय से पांच पद खाली चल रहे थे। कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास के असामयिक निधन और प्रेमचंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद दो सीटें खाली हुई थीं, जबकि तीन पद सरकार के गठन के समय से ही रिक्त थे। शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने और विभागों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए मंत्रियों की नियुक्ति अनिवार्य हो गई थी।

पिछले कई महीनों से दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व के साथ मुख्यमंत्री धामी की कई दौर की बैठकें हुईं। माना जा रहा है कि आगामी चुनावों और राज्य के विकास कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से इन नामों पर मुहर लगाई गई है।

क्षेत्रीय और सियासी संतुलन का मेल

इस विस्तार में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘सोशल इंजीनियरिंग’ का खास ख्याल रखा है। एक तरफ जहां हरिद्वार और रुड़की से दो मंत्रियों को लेकर मैदानी बेल्ट को मजबूत किया गया है, वहीं रुद्रप्रयाग, देहरादून और नैनीताल से मंत्रियों को चुनकर पहाड़ और मैदान के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।

  • कुमाऊं बनाम गढ़वाल: मंत्रिमंडल में कुमाऊं और गढ़वाल दोनों मंडलों को बराबर तरजीह दी गई है ताकि विकास योजनाओं का क्रियान्वयन पूरे राज्य में समान रूप से हो सके।
  • अनुभव और ऊर्जा: मदन कौशिक जैसे अनुभवी नेताओं के साथ-साथ भरत चौधरी और राम सिंह कैड़ा जैसे चेहरों को लाकर अनुभव और नई ऊर्जा का मिश्रण तैयार किया गया है।

विपक्ष की नजर और चुनौतियां

कैबिनेट विस्तार के बाद अब सबकी नजरें विभागों के बंटवारे पर टिकी हैं। नए मंत्रियों को कौन से महत्वपूर्ण विभाग मिलते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमारी सरकार ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ आगे बढ़ रही है। नए मंत्रियों के आने से जनहित के कार्यों में और अधिक तेजी आएगी।”

यह भी पढ़ें-देहरादून: ओल्ड सर्वे रोड पर रफ़्तार का कहर, बेकाबू इनोवा ने 5 को रौंदा; एक की मौत, तीन की हालत नाजुक

दूसरी ओर, विपक्ष इस विस्तार को लेकर हमलावर है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह विस्तार केवल असंतोष को दबाने के लिए किया गया है। हालांकि, बीजेपी कार्यकर्ताओं में इस फैसले के बाद भारी उत्साह देखा जा रहा है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड की राजनीति के लिहाज से आज का दिन काफी अहम रहा। धामी 2.0 सरकार अब अपनी फुल स्ट्रेंथ के साथ मैदान में है। पांच नए मंत्रियों के कंधों पर अब न केवल अपने क्षेत्रों के विकास की जिम्मेदारी होगी, बल्कि उन्हें पूरे प्रदेश में सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए भी जी-जान से जुटना होगा।

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