बेरूत/यरूशलेम: मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुँच गया है। बुधवार की रात इजरायली वायुसेना ने लेबनान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई को अंजाम दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इजरायल ने महज 10 मिनट के भीतर लेबनान के विभिन्न हिस्सों में 100 से अधिक ठिकानों पर भीषण बमबारी की। इस हमले ने न केवल लेबनान की राजधानी बेरूत को हिलाकर रख दिया, बल्कि मानवीय त्रासदी का एक नया मंजर पेश किया है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों में अब तक 250 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 890 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
10 मिनट का ‘ऑपरेशन’ और तबाही का मंजर
इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने इस हमले को हिज्बुल्लाह के खिलाफ अपनी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया है। इजरायल का दावा है कि जिन 100 ठिकानों को निशाना बनाया गया, वे हिज्बुल्लाह के कमांड सेंटर, हथियार डिपो और सैन्य ठिकाने थे। यह हमला इतना तीव्र था कि बेरूत के दक्षिणी उपनगरों, दक्षिणी लेबनान और पूर्वी बेका घाटी में आसमान आग के गोलों से भर गया।
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पुष्टि की है कि मलबे के नीचे अभी भी कई जिंदगियां दबी हुई हैं। बचावकर्मी कंक्रीट के ढेरों के बीच अपनों को तलाश रहे हैं। अस्पताल घायलों से पटे पड़े हैं और चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी देखी जा रही है।
सीजफायर के दावों के बीच जारी है जंग
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम (Ceasefire) की चर्चाएं जोरों पर थीं। हालांकि, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने उन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि लेबनान भी हालिया संघर्ष-विराम समझौते का हिस्सा है।
इजरायल का स्पष्ट रुख है कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार के समझौते का मतलब यह नहीं है कि लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह को छूट दी जाएगी। वॉशिंगटन ने भी इजरायल के इस रुख का समर्थन किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समझौता केवल विशिष्ट सीमाओं तक सीमित है और लेबनान इस सीजफायर का हिस्सा नहीं है।
मलबे में तब्दील होती जिंदगियां: डराने वाले आंकड़े
लेबनान में जारी इस संघर्ष ने अब तक हजारों परिवारों को तबाह कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार:
कुल मौतें: 1,700 से अधिक।
बच्चों की जान:अब तक 130 से ज्यादा मासूम इस युद्ध की भेंट चढ़ चुके हैं।
इजरायल का दावा: आईडीएफ का कहना है कि उन्होंने अब तक हिज्बुल्लाह के लगभग 1,100 लड़ाकों को ढेर किया है।
लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट है, जहाँ आम नागरिक इस सैन्य रस्साकशी के बीच पिस रहे हैं। बेरूत की सड़कों पर केवल सायरन की आवाजें और ढहती इमारतों का शोर सुनाई दे रहा है।
दशकों पुराना संघर्ष और ताजा चिंगारी
हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच संघर्ष की जड़ें दशकों पुरानी हैं, लेकिन हालिया तेजी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या और उसके बाद हिज्बुल्लाह द्वारा इजरायल पर दागे गए रॉकेटों के बाद आई है। नवंबर 2024 में एक अस्थायी संघर्ष-विराम की कोशिश की गई थी, लेकिन इजरायल द्वारा लेबनान पर किए जा रहे नियमित हमलों और हिज्बुल्लाह की जवाबी कार्रवाई ने शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।
क्या कहता है इजरायल का सैन्य नेतृत्व?
इजरायली सैन्य सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेना का फिलहाल अभियान रोकने का कोई इरादा नहीं है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इजरायल का लक्ष्य हिज्बुल्लाह की सैन्य कमर तोड़ना है। हालांकि, इजरायली सेना ने यह भी स्वीकार किया है कि केवल हवाई हमलों के जरिए हिज्बुल्लाह को पूरी तरह निहत्था करना एक कठिन चुनौती है।
लेबनान की शांति की अपील
दूसरी ओर, लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर शांति बहाली की कोशिशें जारी रखेंगे। लेबनान ने वैश्विक शक्तियों से हस्तक्षेप की मांग की है ताकि निर्दोष नागरिकों की जान बचाई जा सके।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए, मध्य पूर्व के अन्य देशों में भी इस युद्ध की आग फैलने का डर बना हुआ है। यदि जल्द ही कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है।
ये भी पढ़े➜ सीजफायर के बाद ट्रंप का ‘टैरिफ अटैक’: ईरान को हथियार देने वाले देशों पर लगेगा 50% भारी शुल्क
मुख्य बिंदु एक नजर में:
हमले की तीव्रता: 10 मिनट में 100 मिसाइलें।
हताहत: 250 मृत, 890 घायल।
मुख्य लक्ष्य: बेरूत, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी।
राजनीतिक स्थिति: लेबनान सीजफायर समझौते से बाहर, इजरायल का हमला जारी रखने का संकल्प।










