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ओमान के सलालाह पोर्ट पर ईरान का भीषण ड्रोन हमला; कच्चे तेल के टैंकों में लगी आग, सुल्तान ने जताई कड़ी आपत्ति

On: March 12, 2026 5:31 AM
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ओमान के सलालाह बंदरगाह पर ईरान का ड्रोन हमला, जलते हुए तेल के टैंक और काला धुआं।

सलालाह/मस्कट: मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है। हाल ही में ईरान द्वारा ओमान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सलालाह बंदरगाह (Salalah Port) पर एक बड़ा ड्रोन हमला किया गया है। इस हमले में तेल भंडारण टैंकों (Oil Storage Tanks) को निशाना बनाया गया, जिससे वहां भीषण आग लग गई।

ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म एम्ब्रे (Ambrey) ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि ईरान ने बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचाया है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि बंदरगाह पर मौजूद व्यापारिक जहाजों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा है।

धुएं के गुबार से घिरा बंदरगाह: क्या है पूरा मामला?

ओमान टीवी और अल जजीरा की रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने एक साथ कई आत्मघाती ड्रोनों से सलालाह पोर्ट पर हमला किया। हमले के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए, जिनमें बंदरगाह से काले धुएं का विशाल गुबार निकलता दिखाई दे रहा है। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत दमकल विभाग को तैनात किया, लेकिन तेल टैंकों में आग लगने के कारण स्थिति को नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला ईरान के उस पुराने युद्ध कौशल (War Pattern) का हिस्सा है, जिसमें वह खाड़ी देशों के ऊर्जा और तेल ठिकानों को निशाना बनाकर दुनिया को अपनी ताकत का अहसास कराता है।

बधाई संदेश के तुरंत बाद हमला: कूटनीतिक हलकों में हैरानी

हैरान करने वाली बात यह है कि यह हमला उस समय हुआ जब ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को उनकी नियुक्ति पर बधाई संदेश भेजा था।
‘द टाइम्स ऑफ इजरायल’ के अनुसार, 9 मार्च को सुल्तान ने मोजतबा खामेनेई के उज्जवल भविष्य और सुरक्षा की कामना करते हुए संदेश भेजा था। कूटनीति की दुनिया में इसे एक दोस्ताना व्यवहार के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इसके तुरंत बाद हुए हमले ने अंतरराष्ट्रीय जगत को चौंका दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस हमले के जरिए संदेश दिया है कि उसकी सैन्य नीति किसी कूटनीतिक शिष्टाचार की मोहताज नहीं है।

ओमान के सुल्तान की कड़ी प्रतिक्रिया और चेतावनी

हमले के तुरंत बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की। सुल्तान ने ओमान की क्षेत्रीय संप्रभुता पर हुए इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की और अपनी गहरी नाराजगी (Asymmetry and Condemnation) व्यक्त की।

सुल्तान ने साफ तौर पर कहा कि:

“ओमान एक शांतिप्रिय देश है, लेकिन अपनी सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए वह सभी आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।”

यह भी पढ़ें- देहरादून में कमर्शियल गैस सिलेंडर का हाहाकार: होटल और रेस्टोरेंट कारोबार ठप होने की कगार पर, व्यापारियों ने दी चेतावनी

क्यों निशाना बना ओमान?

ईरान की ओर से यह सैन्य कार्रवाई अमेरिका और इजरायल द्वारा जारी सैन्य दबाव के जवाब में देखी जा रही है। ईरान अक्सर पश्चिमी देशों के सहयोगियों या तटस्थ देशों के व्यापारिक रूट को बाधित कर दबाव बनाने की कोशिश करता है। ओमान, जो ऐतिहासिक रूप से ईरान और पश्चिम के बीच एक मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाता रहा है, अब खुद इस जंग की आंच झेल रहा है।

वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव

सलालाह पोर्ट अरब सागर के किनारे स्थित एक महत्वपूर्ण व्यापारिक हब है। कच्चे तेल के टैंकों पर हमले से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ने की संभावना है। यदि इस तरह के हमले जारी रहते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।

मुख्य बिंदु:

  • हमलावर: ईरान (ड्रोन द्वारा)
  • लक्ष्य: सलालाह पोर्ट, ओमान (तेल भंडारण टैंक)
  • पुष्टि: ब्रिटिश सुरक्षा फर्म ‘एम्ब्रे’ और ‘ओमान टीवी’
  • हताहत: बुनियादी ढांचे को नुकसान, व्यापारिक जहाज सुरक्षित।
  • विवाद: सुल्तान द्वारा मोजतबा खामेनेई को बधाई देने के ठीक बाद हमला।

निष्कर्ष:

ओमान पर हुआ यह हमला मध्य पूर्व की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ओमान अपनी रक्षा के लिए किसी अंतरराष्ट्रीय गठबंधन (जैसे अमेरिका या यूके) का सहारा लेगा या ईरान के साथ बातचीत के जरिए तनाव को कम करेगा।

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