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उत्तराखंड में UTU Paper Leak पर बड़ा एक्शन: सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार, CM धामी बोले- नकल माफियाओं को नहीं मिलेगी कोई राहत! 

On: July 24, 2026 3:32 PM
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Major action on UTU paper leak in Uttarakhand: Assistant Professor arrested; CM Dhami declares that the cheating mafia will get no respite.

UTU Paper Leak मामले में उत्तराखंड सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाते हुए उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (UTU) की सेमेस्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक करने के आरोप में शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा के सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश में UTU Paper Leak जैसे मामलों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति पहले की तरह सख्ती से लागू रहेगी।

UTU Paper Leak मामले में सहायक प्रोफेसर गिरफ्तार

देहरादून पुलिस ने उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की सम-सेमेस्टर परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, झाझरा के सहायक प्रोफेसर आशीष कुमार गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी पर परीक्षा शुरू होने से पहले छात्रों को व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से महत्वपूर्ण प्रश्न साझा करने का आरोप है।

यह मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंतरिक जांच कराई। जांच में पाया गया कि परीक्षा से पहले छात्रों के बीच जो प्रश्न साझा किए गए थे, उनमें वास्तविक प्रश्नपत्र से काफी समानता थी। इसके बाद विश्वविद्यालय की शिकायत पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

CM धामी का सख्त संदेश, नकल माफियाओं पर रहेगा शिकंजा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने UTU Paper Leak मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार भर्ती और शैक्षणिक परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि चाहे भर्ती परीक्षा हो या विश्वविद्यालय की परीक्षा, प्रश्नपत्र लीक, नकल या परीक्षा प्रणाली की गोपनीयता भंग करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य में लागू सख्त नकलरोधी कानून का उद्देश्य मेहनती और ईमानदार छात्रों को पारदर्शी परीक्षा प्रणाली उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या परीक्षा में धांधली को स्वीकार नहीं करेगी।

अब तक 100 से ज्यादा नकल माफिया गिरफ्तार

राज्य सरकार के अनुसार उत्तराखंड में लागू नकलरोधी कानून के बाद लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत अब तक विभिन्न भर्ती और शैक्षणिक परीक्षाओं से जुड़े 100 से अधिक नकल माफियाओं और उनके सहयोगियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

सरकार का कहना है कि इन कार्रवाइयों का असर प्रदेश की परीक्षा प्रणाली पर सकारात्मक रूप से दिखाई दे रहा है। इससे परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ी है और युवाओं का विश्वास भी मजबूत हुआ है।

कैसे सामने आया पूरा मामला?

कोतवाली प्रेमनगर में परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनय कुमार पटेल की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार 8 जुलाई को आयोजित UTU सम-सेमेस्टर परीक्षा से पहले आरोपी सहायक प्रोफेसर ने छात्रों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न साझा किए थे।

जब परीक्षा पूरी हुई और प्रश्नपत्र का मिलान किया गया, तो पाया गया कि साझा किए गए कई प्रश्न वास्तविक प्रश्नपत्र से मेल खाते थे। इसके बाद विश्वविद्यालय की जांच समिति ने भी इस तथ्य की पुष्टि की कि परीक्षा से पहले छात्रों के बीच वही प्रश्न प्रसारित किए गए थे।

प्रारंभिक जांच के बाद पूरे मामले को पुलिस के हवाले कर दिया गया।

दून पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्य जुटाए और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।

फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां उसके मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्र लीक करने के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस मामले में अन्य शिक्षक, कर्मचारी या बाहरी लोग भी शामिल थे।

व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल सबूत जांच के दायरे में

जांच एजेंसियां उन सभी व्हाट्सएप ग्रुप और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जांच कर रही हैं जिनके माध्यम से कथित तौर पर परीक्षा से जुड़े प्रश्न साझा किए गए थे।

डिजिटल फॉरेंसिक टीम यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रश्नपत्र किस समय और किन-किन लोगों तक पहुंचा। यदि जांच में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का फोकस

उत्तराखंड सरकार पिछले कुछ वर्षों से परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा, डिजिटल निगरानी, परीक्षा केंद्रों पर कड़ी व्यवस्था और नकलरोधी कानून के जरिए सरकार लगातार परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई से परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा बढ़ता है और भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलती है।

मेहनती छात्रों के हितों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता

सरकार का कहना है कि लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करके प्रतियोगी और विश्वविद्यालय परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाएं उनके भविष्य के साथ अन्याय हैं। इसलिए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जरूरी है ताकि मेहनती अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री धामी ने भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में शिक्षा और भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

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