देहरादून | उत्तराखंड के पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य में हवाई संपर्क (Air Connectivity) को और अधिक सुदृढ़ और सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्र सरकार ने देहरादून और पिथौरागढ़ के बीच नियमित हवाई सेवा शुरू करने की मंजूरी दे दी है। इस संबंध में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखकर औपचारिक जानकारी दी है।
यह नई विमान सेवा केंद्र सरकार की ‘क्षेत्रीय संपर्क योजना’ (Regional Connectivity Scheme – RCS), जिसे लोकप्रिय रूप से ‘उड़ान’ (UDAN – Ude Desh ka Aam Naagrik) के नाम से जाना जाता है, के तहत संचालित की जाएगी। इस सेवा के शुरू होने से न केवल राज्य के दो महत्वपूर्ण जिलों के बीच यात्रा का समय नाटकीय रूप से कम हो जाएगा, बल्कि यह सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए भी गेम-चेंजर साबित होगी।
धामी सरकार के अनुरोध पर केंद्र की मुहर
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में केंद्रीय नागर विमानन मंत्री को पत्र लिखकर देहरादून-पिथौरागढ़ मार्ग पर हवाई सेवाओं को सुदृढ़ करने का विशेष अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया था कि पिथौरागढ़ एक महत्वपूर्ण सीमांत जनपद है, जिसे सामरिक और पर्यटन दोनों दृष्टियों से राजधानी देहरादून से सीधे हवाई संपर्क के माध्यम से जोड़ना आवश्यक है। केंद्र सरकार ने इस अनुरोध की गंभीरता को समझते हुए त्वरित स्वीकृति प्रदान की है।
‘स्काईहाप एविएशन’ संभालेगी कमान
केंद्रीय मंत्री के. राममोहन नायडू ने मुख्यमंत्री धामी को सूचित किया है कि इस मार्ग पर परिचालन की जिम्मेदारी ‘स्काईहाप एविएशन प्राइवेट लिमिटेड’ (Skyhap Aviation Pvt Ltd) को सौंपी गई है। कंपनी वर्तमान में परिचालन शुरू करने के लिए आवश्यक विनियामक और परिचालन संबंधी औपचारिकताओं को पूरा कर रही है।
इन औपचारिकताओं में ‘उड़ान प्रचालक प्रमाण पत्र’ (Air Operator Certificate) प्राप्त करना और उपयुक्त विमानों का अधिग्रहण करना शामिल है। जैसे ही ये तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाएं पूर्ण होंगी, कंपनी इस रूट पर नियमित उड़ानें शुरू कर देगी।
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह केवल स्काईहाप पर ही निर्भर नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुविधा और बेहतर प्रतिस्पर्धा के लिए अन्य प्रमुख विमानन कंपनियों से भी इस मार्ग पर सेवाएं शुरू करने के लिए सक्रिय रूप से संपर्क कर रही है।
पिथौरागढ़ के विकास को मिलेगी नई गति
देहरादून से सीमांत पिथौरागढ़ के बीच उड़ान सेवा शीघ्र शुरू होने से क्षेत्र के विकास को बहुआयामी लाभ मिलने की उम्मीद है।
- यात्रा समय में भारी कमी: वर्तमान में देहरादून से पिथौरागढ़ की सड़क मार्ग से दूरी तय करने में 12 से 15 घंटे का समय लगता है, जो विशेष रूप से बीमारों और बुजुर्गों के लिए कष्टदायक होता है। हवाई सेवा शुरू होने से यह यात्रा मात्र 1 से 1.5 घंटे में पूरी हो जाएगी।
- पर्यटन को बढ़ावा: पिथौरागढ़, जिसे अक्सर ‘छोटा कश्मीर’ कहा जाता है, अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। सीधी हवाई सेवा पर्यटन क्षेत्र में नए अवसर खोलेगी, जिससे स्थानीय रोजगार में वृद्धि होगी।
- आपातकालीन चिकित्सा सुविधा: हवाई संपर्क चिकित्सा आपात स्थितियों में पिथौरागढ़ के निवासियों के लिए जीवनरक्षक साबित होगा। मरीजों को त्वरित इलाज के लिए देहरादून या अन्य बड़े शहरों के उच्च अस्पतालों में समय पर पहुँचाया जा सकेगा।
- सामरिक महत्व: चीन और नेपाल की सीमाओं से सटे होने के कारण पिथौरागढ़ का सामरिक महत्व बहुत अधिक है। बेहतर कनेक्टिविटी से सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और संचार को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
हवाई सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ रहा है: धामी
केंद्रीय मंत्री के पत्र पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उत्तराखंड के लिए मोदी सरकार के विशेष लगाव को दर्शाता है।
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मुख्यमंत्री धामी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी मार्गदर्शन में केंद्र सरकार लगातार उत्तराखंड के समग्र विकास में सहयोग कर रही है। प्रदेश में हेली व हवाई सेवाओं का दायरा लगातार मजबूत किया जा रहा है। नए क्षेत्र इन सेवाओं से जुड़ रहे हैं, और केंद्र इसमें राज्य सरकार को हर संभव सहायता दे रही है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि हवाई सेवाओं के सुदृढ़ होने से पिथौरागढ़ जैसे सुदूर सीमांत क्षेत्रों के निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा। यह न केवल उनकी जीवन सुगमता (Ease of Living) को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास को भी एक नई और तीव्र गति प्रदान करेगा।
उत्तराखंड सरकार राज्य के अन्य प्रमुख पर्यटक और धार्मिक स्थलों को भी हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, ताकि ‘होमस्टे’ योजना और स्थानीय हस्तशिल्प को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके।









