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ऋषिकेश में यूट्यूबर तनु रावत के डांस वीडियो पर विवाद, हिंदू संगठन का विरोध – निजी स्वतंत्रता पर बहस तेज

On: October 31, 2025 5:51 AM
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ऋषिकेश। तीर्थनगरी ऋषिकेश में एक यूट्यूबर के डांस वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मशहूर यूट्यूबर तनु रावत द्वारा बनाए गए एक डांस वीडियो पर राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन ने आपत्ति जताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। संगठन ने वीडियो को “अमर्यादित” बताते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियाँ ऋषिकेश जैसी पवित्र नगरी की मर्यादा और धार्मिक छवि को आहत करती हैं। वहीं, तनु रावत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का मामला बताया है।
बुधवार शाम यह मामला तब तूल पकड़ गया जब संगठन के कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष राघवेंद्र भटनागर के नेतृत्व में एक आश्रम परिसर स्थित अपार्टमेंट पहुंचे। उनका कहना था कि तनु रावत ने अपना डांस वीडियो वहीं पर शूट किया है। कार्यकर्ताओं ने अपार्टमेंट प्रबंधन से तीखी चर्चा की और मांग की कि भविष्य में इस तरह के वीडियो शूट न किए जाएँ। उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल होने के कारण ऋषिकेश में “अशोभनीय कपड़ों और डांस” के वीडियो बनाना अनुचित है।
विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही तनु रावत और उनकी माँ भी मौके पर पहुँचीं। तनु ने प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से कहा कि उनके वीडियो में ऐसी कोई बात नहीं है, जिससे किसी की धार्मिक भावना आहत हो। उन्होंने कहा, “मैं भारतीय संस्कृति का सम्मान करती हूँ। लेकिन धर्म और संस्कृति के नाम पर किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना गलत है।” तनु ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सभी को समान रूप से प्राप्त है।
दोनों पक्षों के बीच कुछ देर तक तीखी नोकझोंक चली, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। इसकी सूचना मिलते ही लायंस क्लब रॉयल के अध्यक्ष पंकज चंदानी और नगर व्यापार मंडल अध्यक्ष ललित मोहन मिश्र मौके पर पहुँचे और आपसी बातचीत से विवाद को शांत कराया। स्थानीय पार्षद राजेंद्र सिंह बिष्ट, आलोक चावला समेत कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।
तनु रावत का यह वीडियो इस बीच इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है, जिससे मामला और चर्चा में आ गया है। कुछ लोग इसे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन मान रहे हैं, तो कई युवाओं का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनुचित रोक लगाने जैसा है।
स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप के बाद फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन यह घटना धार्मिक आस्था बनाम व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बहस को एक बार फिर सुर्खियों में ले आई है।

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