देहरादून। राज्य सरकार ने निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर शिकंजा कस दिया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (सीईओ) को निर्देश दिए हैं कि वे अपने जिले के निजी स्कूलों से इस शैक्षिक सत्र की पूरी फीस संरचना और इस वर्ष की फीस वृद्धि का ब्योरा विभाग को उपलब्ध कराएं।
राज्य में फिलहाल 5,438 निजी स्कूल संचालित हैं। पिछले आदेशों के बावजूद कई स्कूल अब भी मनमाने ढंग से फीस वसूल रहे हैं। मार्च में शिक्षा विभाग ने राजधानी के कई नामी स्कूलों के प्रबंधकों को पहली बार मुख्य शिक्षा अधिकारी के समक्ष हाजिर होने को कहा था। नियमों की अवहेलना करने वाले स्कूलों की मान्यता पर भी तलवार लटकी थी।
सीईओ ने दून के छह प्रमुख निजी स्कूलों को तलब किया था, जहां अभिभावकों ने टोल फ्री नंबर पर शिकायत की थी। अनुपस्थित स्कूलों को नोटिस जारी किए गए थे। साथ ही, सभी स्कूलों को ड्रेस एडवाइजरी लागू करने और फीस संरचना समय पर अभिभावकों को बताने के निर्देश भी दिए गए थे।
अब माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने साफ कर दिया है कि सभी सीईओ को निजी स्कूलों की मासिक फीस वसूली और फीस वृद्धि का विवरण विभाग को भेजना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
इसके अलावा, सभी स्कूलों को वार्षिक रिपोर्ट, शैक्षणिक कैलेंडर, शिक्षकों की संख्या और पीटीए गठन संबंधी जानकारी हर साल 15 सितंबर से पहले अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी। छात्रों से कोई अतिरिक्त डोनेशन वसूला नहीं जाएगा और केवल सरकार द्वारा तय मासिक शुल्क ही लिया जाएगा।
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