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उत्तराखंड: खाली जमीन पर नीली-पीली-हरी चादर डालकर होने वाले कब्ज़े पर अब सख्त रोक लगेगी – सीएम धामी

On: December 4, 2025 9:27 AM
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दो टूक कहा कि राज्य में अवैध तरीके से हो रही घुसपैठ, फर्जी दस्तावेज़ों का खेल और भूमि कब्ज़े की प्रवृत्ति अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की डेमोग्राफी बदलने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि घुसपैठियों ने फर्जी कागज़ात बनवाकर राशन कार्ड, निवास प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज़ तैयार कर लिए, जिनकी अब सरकार द्वारा सख्ती से जांच की जा रही है। उनका कहना था कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को किसी भी कीमत पर आंच नहीं आने दी जाएगी, और राज्य के मूल निवासियों में असुरक्षा की भावना पैदा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
धामी ने यह भी कहा कि राज्य में जहां कहीं खाली ज़मीन दिखी, वहां “नीली-पीली-हरी चादर बिछाकर कब्ज़ा” करने का चलन शुरू हो गया था, जिसके बाद अवैध निर्माण खड़े कर दिए जाते थे। सरकार ने ऐसे मामलों पर कार्रवाई करते हुए 550 अवैध धार्मिक संरचनाओं की पहचान की और उन्हें हटाकर जमीन को सरकारी कब्जे में वापस लिया। उनका कहना था कि यह अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
काठगोदाम स्थित सीआरपीएफ कैंप में आयोजित पूर्व केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल कार्मिक संगठन के वार्षिक सम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने वाले लोग बसने की कोशिश कर रहे हैं, और कई तो खुद को “मूल निवासी” बताकर फर्जी दस्तावेज़ भी तैयार करा चुके हैं।
उन्होंने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि दंगाइयों पर अब सख्त कार्रवाई होगी, और जो नुकसान करेगा, वही उसकी भरपाई भी करेगा। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने गोरक्षा कानून लागू किया है और दो अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से लगे उत्तराखंड में सभी धर्मों और समुदायों के लिए यूनीफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू किया गया है।
अर्धसैनिक बलों के परिवारों को बढ़ी आर्थिक मदद
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अर्धसैनिक बल के जवानों के शहीद होने पर अब उनके परिजनों को 10 लाख की जगह 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम सुरक्षा बलों के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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