मुख्य बिंदु:
• बड़ा फैसला: उत्तराखंड के 4 जिलों में कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी सरकारी, निजी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र कल बंद रहेंगे।
• अलर्ट की स्थिति: मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का ‘रेड और ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है।
• प्रभावित जिले: रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, देहरादून और टिहरी में जिलाधिकारियों ने जारी किए छुट्टी के सख्त आदेश।
• प्रशासन की अपील: नदी-नालों के पास जाने से बचें, पहाड़ी क्षेत्रों में अनावश्यक यात्राओं को तत्काल टालें।
पूरी खबर: मानसून का रौद्र रूप, सुरक्षा के लिए उठाए गए एहतियाती कदम
देहरादून:
उत्तराखंड में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है। इसी बीच भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य में अगले 24 से 48 घंटों के भीतर रिकॉर्ड तोड़ बारिश होने की गंभीर चेतावनी जारी की है।
मौसम विभाग के इस ‘रेड अलर्ट’ को देखते हुए उत्तराखंड प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रदेश के चार प्रमुख जिलों में कल यानी सोमवार को सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने का एक बड़ा निर्णय लिया गया है।
इन 4 जिलों में लागू रहेगा आदेश, जिलाधिकारी मुस्तैद
मौसम विभाग की ओर से जारी की गई अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी के मद्देनजर रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, देहरादून और टिहरी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) ने अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत यह आदेश जारी किए हैं।
इस सरकारी आदेश के अनुसार, इन चारों जिलों में संचालित होने वाले सभी शासकीय, अशासकीय, सहायता प्राप्त और निजी स्कूल (कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक) पूरी तरह से बंद रहेंगे। इसके साथ ही क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में भी अनिवार्य रूप से अवकाश घोषित कर दिया गया है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी विद्यालय द्वारा इस आदेश का उल्लंघन किया गया, तो उसके खिलाफ आपदा प्रबंधन मानकों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
मौसम विभाग की चेतावनी: कई जिलों में ‘रेड’ तो कहीं ‘ऑरेंज’ अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की सक्रियता के चलते अगले कुछ दिन उत्तराखंड के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो सकते हैं।
20 जुलाई को राज्य के नैनीताल, चंपावत और ऊधम सिंह नगर के कुछ विशेष भौगोलिक क्षेत्रों के लिए मौसम विभाग ने ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है, जिसका अर्थ है कि इन इलाकों में बादल फटने या अत्यंत तीव्र गति से मूसलाधार बारिश होने की आशंका सबसे अधिक है।
इसके अतिरिक्त, राजधानी देहरादून समेत टिहरी, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार और बागेश्वर के कई हिस्सों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है। मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि 20 जुलाई के साथ-साथ 21 जुलाई को भी राज्य के अधिकांश हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का सिलसिला बदस्तूर जारी रह सकता है।
इस दौरान आकाशीय बिजली चमकने और तीव्र बौछारें पड़ने की भी संभावना है।
छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से विशेष अपील
मौसम के बिगड़े मिजाज को देखते हुए संबंधित जिला प्रशासनों ने एक विस्तृत गाइडलाइन जारी की है। प्रशासन ने सभी छात्रों, अभिभावकों और शिक्षक वर्ग से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए किसी भी प्रकार की अनावश्यक यात्रा करने से बचें।
पर्वतीय मार्गों पर लगातार हो रहे भूस्खलन और मलबे के आने के कारण रास्ते बेहद खतरनाक हो चुके हैं, इसलिए जब तक बहुत जरूरी न हो, घरों से बाहर न निकलें। स्कूल प्रबंधनों को भी निर्देशित किया गया है कि वे इस अवकाश की सूचना समय रहते सभी अभिभावकों तक डिजिटल माध्यमों से पहुंचा दें।
नदी-नालों के किनारे जाने पर पूर्ण प्रतिबंध, नियंत्रण कक्ष सक्रिय
लगातार हो रही बारिश के कारण उत्तराखंड की तमाम प्रमुख नदियां जैसे गंगा, यमुना, अलकनंदा, मंदाकिनी और सोंग नदी का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच रहा है।
वहीं, बरसाती नाले भी उफान पर हैं। इसे देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तटीय और संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं।
नागरिकों से सख्त लहजे में अपील की गई है कि:
1. भारी बारिश के दौरान किसी भी सूरत में नदी-नालों के करीब न जाएं, न ही वहां सेल्फी लेने या नहाने की कोशिश करें।
2. पहाड़ी क्षेत्रों में सफर करने से पूरी तरह परहेज करें, क्योंकि तीव्र बारिश के कारण चट्टानें दरकने का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
3. केवल मौसम विभाग और जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक एवं प्रामाणिक बुलेटिन और दिशा-निर्देशों पर ही भरोसा करें।
राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF) की टीमों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात कर दिया गया है। सभी जिलों के आपदा नियंत्रण कक्षों (Disaster Control Rooms) को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
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