देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने सफाई कर्मचारियों को राहत देते हुए बड़ा फैसला लिया है। मृत संवर्ग के अंतर्गत भर्ती किए गए 859 सफाई कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद अब उनके खाली पदों पर नई भर्तियां की जाएंगी। साथ ही, इन कर्मचारियों के परिजनों को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी देने का रास्ता भी साफ हो गया है।
कर्मचारियों की मांग पर जारी हुआ शासनादेश
सफाई कर्मचारियों की ओर से लंबे समय से यह मांग उठाई जा रही थी कि मृत संवर्ग के तहत कार्यरत कर्मचारियों को भी अन्य नियमित कर्मचारियों की तरह सेवा लाभ और उनके परिजनों को आश्रित कोटे में नौकरी का लाभ दिया जाए। उनकी इस मांग पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संज्ञान लेते हुए शासनादेश जारी कर दिया है।
आयोग उपाध्यक्ष ने जताया आभार
सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त भगवत प्रसाद मकवाना ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस निर्णय के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने हमेशा सफाई कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और समाधान किया है।
मृत संवर्ग में भर्ती से कर्मचारियों में थी नाराजगी
दरअसल, कुछ वर्ष पहले 859 सफाई कर्मचारियों को नियमित किया गया था, लेकिन उनकी भर्ती मृत संवर्ग के अंतर्गत कर दी गई थी। इस व्यवस्था के चलते कर्मचारियों और उनके परिजनों को आश्रित कोटे और अन्य सेवा लाभों से वंचित होना पड़ रहा था। लगातार विरोध के बाद अब सरकार ने कर्मचारियों की इस प्रमुख मांग को मान लिया है।
सफाई कर्मचारियों के लिए पहले भी किए गए कदम
मकवाना ने बताया कि मुख्यमंत्री धामी पहले भी सफाई कर्मचारियों के मानदेय में बढ़ोतरी कर चुके हैं। इसके अलावा कांग्रेस शासनकाल में बंद किए गए एक लाख के बीमा को धामी सरकार ने पुनः लागू कर उसकी राशि बढ़ाकर 5 लाख कर दी, जिससे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली।
नई भर्ती और प्रशिक्षण पर जोर
राज्य मंत्री मकवाना ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान नाला गैंग रात्रिकालीन सफाई कर्मचारियों के नियमितीकरण, नई भर्तियों की प्रक्रिया तेज करने और सफाई कर्मचारियों के कौशल प्रशिक्षण की भी मांग रखी। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इन मुद्दों पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेगी।
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