उत्तराखंड
उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में बागवानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कीवी नीति 2025 को लागू कर दिया है। इस नई नीति के तहत किसानों को कीवी उत्पादन पर 70% तक सरकारी सहायता दी जाएगी। सरकार ने इस नीति को 31 मार्च 2031 तक लागू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य कीवी के उत्पादन को अगले 6 वर्षों में 140 गुना तक बढ़ाना है।
कीवी नीति 2025 की प्रमुख बातें:
- उद्देश्य: 2030 तक 3500 हेक्टेयर क्षेत्र में कीवी उद्यान लगाना।
- उत्पादन लक्ष्य: मौजूदा उत्पादन को 140 गुना तक बढ़ाना।
- अवधि: वर्ष 2025 से 2031 तक लागू।
- सब्सिडी: प्रति एकड़ 12 लाख रुपये की लागत पर 70% तक अनुदान।
किन्हें मिलेगा इस योजना का लाभ?
इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं:
- लाभार्थी किसान, पंजीकृत सहकारी समिति, स्वयं सहायता समूह या पंजीकृत पट्टाधारक हो सकते हैं।
- पट्टाधारक के पास 25 वर्षों के लिए कृषि योग्य भूमि का पट्टा होना आवश्यक है।
- व्यक्तिगत लाभार्थियों को 0.04 हेक्टेयर से 1 हेक्टेयर भूमि पर 70% अनुदान मिलेगा।
- समूहों को 5 हेक्टेयर तक के क्षेत्र में 70% सब्सिडी दी जाएगी।
- 1 हेक्टेयर से अधिक भूमि होने पर व्यक्तिगत लाभार्थी को 50% और समूह को 5 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल पर 50% सब्सिडी मिलेगी।
- सब्सिडी ₹12 लाख प्रति एकड़ लागत के आधार पर दी जाएगी।
किन क्षेत्रों में लागू होगी यह नीति?
राज्य सरकार ने कुछ चिह्नित जिलों और विकासखंडों में ही योजना को लागू किया है:
- देहरादून: चकराता, कालसी, रायपुर
- उत्तरकाशी: भटवाड़ी, डुंडा, मोरी, पुरोला, चिन्यालीसौड़, नौगांव
- टिहरी: चंबा, धौलधार, जौनपुर, भिलंगना, प्रतापनगर, कीर्तिनगर, जाखणीधार
- पौड़ी: कल्जीखाल, कोट, खिरसू, पौड़ी, पोखड़ा, नैनीडांडा, बिरोखाल, रिखणीखाल
- रुद्रप्रयाग: जखोली, अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ
- चमोली: दसोली, जोशीमठ, पोखरी, घाट, देवाल, कर्णप्रयाग, गैरसैंण, नारायणबगड़, थराली
- नैनीताल: रामगढ़, ओखलकांडा, धारी, भीमताल, बेतालघाट
- अल्मोड़ा: हवालबाग, ताकुला, लमगड़ा, धौलादेवी, ताड़ीखेत, द्वाराहाट, सल्ट
- पिथौरागढ़: बीन, मुनाकोट, कनालीछीना, डीडीहाट, बेरीनाग, गंगोलीहाट, मुनस्यारी, धारचूला
- बागेश्वर: कपकोट, गरुड़, बागेश्वर
- चंपावत: चंपावत, लोहाघाट, पाटी, बाराकोट
आवेदन की प्रक्रिया और चयन:
- ऑनलाइन आवेदन करना अनिवार्य है।
- चयन प्रक्रिया पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर होगी।
- केवल उत्तराखंड के निवासी ही योजना का लाभ उठा सकते हैं।
- एक परिवार को केवल एक बार सब्सिडी मिलेगी।
- योजना का निरीक्षण और मूल्यांकन किसी तृतीय पक्ष एजेंसी से कराया जाएगा।
उत्तराखंड में कीवी की स्थिति:
वर्तमान में उत्तराखंड में 682.66 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कीवी की खेती हो रही है, जिससे 381.80 मीट्रिक टन उत्पादन हो रहा है। यह उत्पादन न्यूजीलैंड (40.5 मीट्रिक टन/हेक्टेयर) जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है। उत्तरकाशी, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में मुख्यत: कीवी की खेती की जाती है।
निष्कर्ष:
कीवी नीति 2025 उत्तराखंड के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर लेकर आई है। इससे जहां प्रदेश की कृषि आय बढ़ेगी, वहीं कीवी के आयात पर निर्भरता भी घटेगी। यदि आप किसान हैं और उपयुक्त भूमि आपके पास है, तो यह योजना आपके लिए आर्थिक रूप से लाभकारी हो सकती है।





